सीवान के लोजपा (रामविलास) नेता रईस खान को AK-47 के 47 जिंदा कारतूस की बरामदगी से जुड़े मामले में शनिवार को न्यायालय से बड़ी राहत मिली।
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पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट में साक्ष्यों की कमजोरी और अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपों को ठोस तरीके से साबित नहीं कर पाने के कारण न्यायालय ने उन्हें इस केस से रिहा कर दिया। इस फैसले के बाद पुलिस की कार्रवाई और अनुसंधान की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
21 सितंबर 2025 को सिसवन थाना क्षेत्र के ग्यासपुर स्थित रईस खान के आवास पर एसटीएफ और जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी की थी। इस दौरान रईस खान समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने कार्रवाई को बड़ी उपलब्धि बताया था।
AK-47 के 47 कारतूस मिलने का दावा
पुलिस ने छापेमारी के दौरान AK-47 के 47 जिंदा कारतूस समेत अन्य हथियार और आपत्तिजनक सामान बरामद करने का दावा किया था। इस बरामदगी के आधार पर मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई थी।

चार्जशीट में सामने आईं साक्ष्यों की कमजोरियां
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने अनुसंधान पूरा कर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और आरोपों में कमजोरियां सामने आईं। अभियोजन पक्ष भी आरोपों को ठोस तरीके से साबित नहीं कर सका।
न्यायालय ने रईस खान को दी राहत
मामले की सुनवाई के बाद शनिवार को न्यायालय ने रईस खान को इस केस से रिहा करने का आदेश दिया। पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों को पर्याप्त साक्ष्यों के साथ साबित नहीं किए जाने के बाद यह राहत मिली।
पुलिस की कार्रवाई और जांच पर सवाल
न्यायालय के फैसले के बाद करीब एक साल पहले हुई छापेमारी और पुलिस अनुसंधान चर्चा के केंद्र में आ गया है। भारी मात्रा में AK-47 कारतूस बरामद करने के दावे के बाद हुई गिरफ्तारी और अब न्यायालय से मिली राहत ने चार्जशीट तथा जांच की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं।
