लंदन के सिटी क्षेत्र स्थित सेंट एथेलबर्गा सेंटर फॉर रिकंसिलिएशन एंड पीस में रविवार को ‘हाउस ऑफ ऑल फेथ्स एंड कम्युनिटीज’ (HOFAC) का आधिकारिक शुभारंभ किया गया। ब्रिटेन और दुनिया के विभिन्न देशों से आए धर्मगुरु, सामुदायिक नेता, राजनयिक और शांति दूत एक म
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समाजसेवी-मानवतावादी ब्रह्मऋषि मोहनजी की ओर से स्थापित HOFAC एक ऐसा सामूहिक मंच है, जो एक मूल सिद्धांत पर आधारित है, जैसे… ईश्वर, आस्था या धर्म के नाम पर किसी भी व्यक्ति, जीवित प्राणी, समुदाय-संस्कृति को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए। इस संगठन का काम 3 प्रमुख स्तंभों पर आधारित है, जिम्मेदारी, जवाबदेही और सम्मान।
‘समय की मांग, नेताओं की जिम्मेदारी’ विषय पर आयोजित यह कार्यक्रम इंटरफेथ वीक (8 से 15 नवंबर) की प्रस्तावना के रूप में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में स्कॉटलैंड, बेल्जियम, न्यूयॉर्क और सर्बिया से अतिथि पहुंचे, जबकि दुनिया भर से 200 से अधिक लोगों ने ऑनलाइन प्रसारण के माध्यम से इसमें भाग लिया।

लंदन में HOFAC की शुरुआत।
केवल फोटो खिंचवाने का मंच नहीं होगा HOFAC
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मोहन ने बताया कि HOFAC की स्थापना का विचार उन्हें विभिन्न अंतरधार्मिक सम्मेलनों में वर्षों तक भाग लेने के अनुभव से आया।
उन्होंने देखा कि इन सम्मेलनों में बड़े-बड़े भाषण तो होते हैं, लेकिन उनके बाद ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
यदि आप किसी भी प्रकार के नेता हैं, भले ही केवल दस लोग आपकी बात सुनते हों या आपका अनुसरण करते हों, तब भी आप जिम्मेदार हैं। अपने आचरण के लिए भी और दुनिया में आपके अनुयायियों के आचरण के लिए भी। HOFAC केवल फोटो खिंचवाने के लिए बैठकें नहीं करेगा। हम स्वयं कार्य करेंगे और अपने कार्यों से दूसरों को प्रेरित करेंगे।
न्यूयॉर्क में सर्बिया गणराज्य के महावाणिज्यदूत और HOFAC के शांति दूत महामहिम व्लादिमीर बोजोविच ने भी मोहन के विचार का समर्थन किया। बोजोविच ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि HOFAC जिम्मेदारी, कार्रवाई और वास्तविक गतिविधियों का मंच बनेगा, न कि साल में एक बार आयोजित होने वाला सम्मेलन।
दुर्घटना में जान गंवाने वालों को दी श्रद्धांजलि
मानवतावादी संस्था ACT Foundation की ग्लोबल प्रेसिडेंट देवी मोहन ने अपने गृह देश सर्बिया के नोवी साद रेलवे स्टेशन हादसे की दूसरी बरसी पर उन लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने इस दुर्घटना में अपनी जान गंवाई थी।
उन्होंने उन विद्यार्थियों के शांतिपूर्ण आंदोलन का भी उल्लेख किया, जिसने सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देवी मोहन ने कहा, यह आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि बेहतर बदलाव के लिए था और इसे बिना किसी हिंसा के पूरा किया गया।
‘धर्म-समुदायों के नेताओं को एक साथ लाना सराहनीय पहल है’
कार्यक्रम में नई दिल्ली से गोस्वामी सुशील जी महाराज का संदेश भी पढ़कर सुनाया गया। वे भारतीय सर्व धर्म संसद के राष्ट्रीय संयोजक और HOFAC के प्रथम सलाहकार हैं।
भारतीय सर्व धर्म संसद को भारत का सबसे बड़ा अंतरधार्मिक मंच बताया गया है। उन्होंने कहा, आपसी सम्मान, जिम्मेदारी, जवाबदेही और सार्थक कार्यों के माध्यम से धर्म-समुदायों के नेताओं को एक साथ लाना वास्तव में सराहनीय पहल है।
मेरी कामना है कि HOFAC एकता, शांति और मानवता के लिए एक सार्थक वैश्विक मंच के रूप में विकसित हो।
अजमेर शरीफ दरगाह के हाजी सैयद सलमान चिश्ती, जो HOFAC के शांति दूत भी हैं, उन्होंने अपने संदेश में कहा, इस मंच को ऐसा स्थान बनाएं, जहां हम बोलने से पहले सुनें, उपदेश देने से पहले कार्य करें और निर्णय सुनाने से पहले घावों को भरने का प्रयास करें।

दुनिया भर से 200 से अधिक लोगों ने ऑनलाइन भाग लिया।
नेताओं की जिम्मेदारी पर विशेष परिचर्चा
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘द लीडर्स रिस्पॉन्सिबिलिटी’ विषय पर आयोजित परिचर्चा रही। इसका संचालन HOFAC के CEO क्रिस्टोफर ग्रीनवुड ने किया। इस परिचर्चा को HOFAC के पहले पॉडकास्ट के रूप में भी रिकॉर्ड किया गया।
विभिन्न धार्मिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करने वाले तीन प्रमुख वक्ताओं ने इस बात पर चर्चा की कि वास्तविक जीवन में नेतृत्व की जिम्मेदारी का क्या अर्थ है।
परिचर्चा में एक महत्वपूर्ण विचार उभरकर सामने आया कि समाज के उस बड़े वर्ग को जागरूक और सक्रिय करने की जरूरत है, जो शांति और सद्भाव में विश्वास तो रखता है, लेकिन अक्सर चुप रहता है।
GPS नेटवर्क के निदेशक जेरेमी वूटलिफ ने अपने अभियान को ‘मौन बहुसंख्यक को जगाने’ का प्रयास बताया। GPS नेटवर्क विभिन्न धर्मों को मानने वाले और किसी धर्म को न मानने वाले लोगों को एक साथ जोड़ता है।
ब्रिटिश संस्कृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने पर जोर
HOFAC का मानना है कि ब्रिटेन में धार्मिक और सामुदायिक जीवन को वहां की मौजूदा संस्कृति के साथ सामंजस्य बनाकर चलना चाहिए, न कि उसे बदलने के उद्देश्य से आगे बढ़ना चाहिए। संगठन के अनुसार, संस्कृति किसी समाज की जड़ों का प्रतिनिधित्व करती है। जब ये जड़ें कमजोर होती हैं या खो जाती हैं, तो अगली पीढ़ी अपनी पहचान और विरासत से दूर होने लगती है और उसे गुमराह करना आसान हो जाता है।
HOFAC के CEO क्रिस्टोफ़र ग्रीनवुड ने कहा, हम ऐसा मंच नहीं बनाना चाहते थे, जहां केवल बातें होती रहें। हमारा उद्देश्य विभिन्न समुदायों के नेताओं को एक साथ लाना और समाज में उनके द्वारा किए जा रहे वास्तविक कार्यों को सामने लाना था।
अमेरिका और UAE में भी होगा HOFAC का विस्तार लंदन में सफल शुभारंभ के बाद HOFAC अब अपने वैश्विक विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आगामी कुछ सप्ताह में न्यूयॉर्क में HOFAC की एक शाखा का पंजीकरण कराया जाएगा।
इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भी इसकी शाखा स्थापित करने के लिए रुचि व्यक्त की गई है।
