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कटिहार में दो युवकों को हिरासत में पीटने का आरोप:तारकिशोर बोले- पुलिस की भूमिका रक्षक की होनी चाहिए, भक्षक की नहीं




कटिहार के गोविंदपुर चौक पर दो युवकों को हिरासत में लेकर पिटाई करने का आरोप पुलिस पर लगा है। घटना के विरोध में ग्रामीणों ने पूर्व उपमुख्यमंत्री और कटिहार विधायक तारकिशोर प्रसाद से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने पुलिसकर्मियों के साथ डीआईओ अमित कुमार पर भी कार्रवाई की मांग उठाई है। पीड़ितों की पहचान गोविंद चौहान और ट्रैक्टर चालक गुड्डू चौहान के रूप में हुई है। आरोप है कि मंगलवार रात करीब दो बजे पुलिस की कई गाड़ियां गोविंदपुर चौक पहुंचीं और दोनों युवकों को सोते समय उठा लिया। गोविंद अपनी पत्नी से विवाद के बाद गांव के हवा महल में सो रहा था, जबकि गुड्डू काम खत्म करने के बाद वहीं सोया था। 12 घंटे थाने में रखने का दावा पीड़ितों का कहना है कि पुलिस ने दोनों को करीब 12 घंटे तक थाने में रखा और बाद में छोड़ दिया। उनका आरोप है कि पुलिस ने डराकर उनसे यह लिखवा लिया कि वे फिट और सुरक्षित हैं। ग्रामीणों का दावा है कि दोनों के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं था और न ही कोई शिकायत थी। घर में सामान बिखेरने का आरोप महिलाओं ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई के दौरान घर में रखा अनाज बिखेर दिया गया। तलाशी के नाम पर सामान भी तहस-नहस किया गया। इन आरोपों के बाद ग्रामीण एसपी कार्यालय पहुंचे और लिखित आवेदन देकर पूरे घटनाक्रम की जांच कराने की मांग की। तारकिशोर बोले- कार्रवाई होनी चाहिए तारकिशोर प्रसाद ने घटना की तीखी निंदा करते हुए कहा कि निर्दोष लोगों पर ऐसी कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, “पुलिस की भूमिका रक्षक की होनी चाहिए, भक्षक की नहीं।” उन्होंने कटिहार एसपी से मामले की जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने को कहा। गृह मंत्रालय तक मामला ले जाने की बात विधायक ने कहा कि जरूरत पड़ने पर मामले को गृह मंत्रालय, आईजी और डीआईजी तक ले जाएंगे। उन्होंने पीड़ित परिवारों को निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया। वहीं, एसपी ने ग्रामीणों को मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई फिलहाल पुलिस पर लगे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उपलब्ध जानकारी में पुलिस का पक्ष और जांच के नतीजे सामने नहीं आए हैं। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही हिरासत में लिए जाने और कथित पिटाई के आरोपों की सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।



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