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कटिहार में जदयू के ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ अभियान का समापन हुआ। कटिहार अभियान का 12वां और आखिरी पड़ाव था। संजय कुमार झा और उमेश सिंह कुशवाहा इससे पहले गंगा किनारे बसे 11 जिलों में संवाद कर चुके हैं।
इन जिलों में बक्सर, भोजपुर, बेगूसराय, खगड़िया, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, पटना, लखीसराय, मुंगेर और भागलपुर शामिल हैं। गंगा बक्सर से बिहार में प्रवेश करती है और कटिहार से निकलती है। इसी वजह से अभियान 5 सितंबर को बक्सर से शुरू हुआ और कटिहार में खत्म हुआ।
समापन से पहले जदयू कला, संस्कृति एवं खेल प्रकोष्ठ ने जागरूकता मैराथन कराई। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। संजय झा और उमेश कुशवाहा भी मैराथन में शामिल हुए।
टाउन हॉल में हुए कार्यक्रम में भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह, विधायक दुलाल चंद गोस्वामी और विधायक विजय सिंह निषाद मौजूद रहे। पूर्व सांसद अशफाक करीम, महादलित आयोग के अध्यक्ष मनोज ऋषि, पूर्व अध्यक्ष शंभू सुमन, जदयू जिलाध्यक्ष सूरज प्रकाश राय और नगर अध्यक्ष राणा विशाल समेत हजारों कार्यकर्ता भी पहुंचे। कार्यक्रम में डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई और पर्चे बांटे गए।
संजय झा ने कहा कि 1996 की भारत-बांग्लादेश जल संधि बिहार के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि संधि का मौजूदा स्वरूप में नवीनीकरण नहीं होना चाहिए। अगर संधि होती है, तो 2050 तक बिहार की जल जरूरतों को ध्यान में रखना होगा।
झा ने कहा कि संधि के कारण शुष्क मौसम में गंगा के साथ बिहार की आंतरिक नदियों का पानी भी बांग्लादेश को दिया जाता है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकारों ने बिहार के हितों की अनदेखी की।
उमेश कुशवाहा ने कहा कि फरक्का बराज और संधि से बिहार को दोहरा नुकसान होता है। उनके मुताबिक, बराज के कारण गाद जमा होती है और बाढ़ आती है, जबकि संधि के तहत पानी देने से सूखे की स्थिति बनती है। उन्होंने कहा कि संधि का 73 प्रतिशत बोझ अकेले बिहार उठा रहा है।
लेशी सिंह ने कहा कि यह संधि बिहार के जल हितों को नुकसान पहुंचाती है। इससे कृषि, उद्योग और पेयजल पर संकट है। उन्होंने कहा कि अभियान को लोगों का समर्थन मिल रहा है।
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कटिहार में जदयू के 'फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद':संजय झा बोले- '2050 की जरूरतों को ध्यान में रखकर ही हो संधि का नवीनीकरण'
