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10 लाख की वापसी को लेकर साइबर पुलिस पर सवाल:प्रेस रिलीज, पीड़ित के बयान में अंतर; आखिर रुपए लौटाने का मामला क्या है?




गया में 10 लाख रुपए की वापसी को लेकर साइबर पुलिस की कार्रवाई पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। रकम वापस मिलने की कहानी में पुलिस की प्रेस रिलीज और पीड़ित के वीडियो बाइट के बीच कई अहम अंतर सामने आए हैं। पुलिस की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कारोबारी के खाते से भूलवश दूसरे खाते में रकम ट्रांसफर होने की बात कही गई है। वहीं, पीड़ित के वीडियो बाइट में मोबाइल कंपनी का काम लेने के सिलसिले में 10 लाख रुपए ट्रांसफर करने और प्रभात पांडे नाम के व्यक्ति की ओर से धोखाधड़ी किए जाने का दावा है। दोनों ही बातें गया पुलिस की ओर से जारी की गई हैं। ऐसे में सवाल है कि आखिर 10 लाख रुपए की वापसी का वास्तविक मामला क्या है। प्रेस रिलीज में गलती, बाइट में धोखाधड़ी का दावा गया पुलिस की प्रेस रिलीज के अनुसार, विक्की इंटरप्राइजेज के मालिक साजिद इकबाल, पिता मोहम्मद फखरुद्दीन, निवासी वार्ड संख्या-18, उर्दू बाजार, शेरघाटी ने 30 मार्च 2026 को साइबर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि भूलवश उनके बैंक खाते से 10 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर हो गए। यह खाता विंटेज मैप वेंचर प्राइवेट लिमिटेड के नाम से दर्ज था। इसके उलट, पीड़ित के वीडियो बाइट में मोहम्मद साजिद इकबाल ने बताया कि 22 अक्टूबर 2026 को मोबाइल कंपनी का काम लेने के सिलसिले में उन्होंने जो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के अकाउंट में 10 लाख रुपए ट्रांसफर किए थे। इसी दौरान प्रभात पांडे नाम के व्यक्ति ने उनके साथ फ्रॉड किया। उन्होंने यह भी कहा कि 7 नवंबर 2026 को कंपनी की ओर से उनके 10 लाख रुपये वापस कर दिए गए और रकम उनके खाते में आ गई। कंपनी ने लौटाए पैसे या पुलिस ने कराए वापस यहीं से पुलिस की कहानी में सबसे बड़ा पेंच सामने आता है। प्रेस रिलीज में गया साइबर थाना की तकनीकी जांच और कार्रवाई के बाद कारोबारी के खाते में पूरी रकम वापस कराने का दावा किया गया है। वहीं, वीडियो बाइट में पीड़ित सीधे तौर पर कंपनी की ओर से रकम लौटाए जाने की बात कह रहे हैं। दोनों बयानों में रकम वापसी का श्रेय अलग-अलग तरीके से सामने आता है। शिकायत की तारीख, रकम ट्रांसफर होने की तारीख और संबंधित कंपनी के नाम में भी अंतर है। प्रेस रिलीज में 30 मार्च की शिकायत और Vantage Mep Ventures Private Limited का उल्लेख है, जबकि बाइट में 22 अक्टूबर की घटना और Zo Ventures Private Limited का नाम लिया गया है। पुलिस के अपने दो बयानों में सवाल गया पुलिस की ओर से जारी दोनों बयानों में सामने आए अंतर को स्पष्ट करना जरूरी है। क्या दोनों कंपनियां एक ही मामले से जुड़ी हैं। क्या शिकायत की तारीख में अंतर है या मामला अलग है। और रकम वापस कराने में कंपनी की भूमिका क्या रही? या फिर पीड़ित पक्ष पर साइबर पुलिस का कोई दवाब है। या फिर पूरी दाल ही काली है। इन सवालों का जवाब पुलिस की ओर से स्पष्ट किया जाना चाहिए।



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