औरंगाबाद में खरीफ विपणन वर्ष के तहत 15 नवंबर से धान की खरीद शुरू होगी। इसके लिए सहकारिता विभाग की ओर से आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। जिले में किसानों से धान खरीदने के लिए कुल 183 समितियों का चयन किया गया है। इनमें 173 पैक्स और 10 व्यापार मंडल
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जिला सहकारिता पदाधिकारी राजीव कुमार यादव ने बताया कि निर्धारित तिथि से धान की खरीद शुरू कराने को लेकर विभागीय स्तर पर तैयारी की जा रही है। इस वर्ष जिले को 2,00,454 मीट्रिक टन धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य दिया गया है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 20 हजार मीट्रिक टन अधिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने बताया कि डिफॉल्टर पैक्स को धान अधिप्राप्ति की प्रक्रिया से अलग रखा जाएगा। ऐसे पैक्स को नजदीकी दूसरे पैक्स से टैग किया जाएगा, ताकि संबंधित क्षेत्र के किसानों को धान बेचने में किसी तरह की परेशानी नहीं हो।
किसान टैग किए गए पैक्स में अपना धान बेच सकेंगे। विभाग का प्रयास है कि सभी चयनित क्रय केंद्रों पर समय से व्यवस्था पूरी कर ली जाए, ताकि अधिप्राप्ति शुरू होने के बाद किसानों को इंतजार नहीं करना पड़े।

किसानों को पैक्स में धान बेचने के लिए निर्धारित पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य है। -फाइल फोटो
धान बेचने के लिए 5542 किसानों ने किया ऑनलाइन आवेदन, देव सबसे आगे
धान खरीद को लेकर जिले में किसानों के ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी जारी है। अब तक कुल 5542 किसानों ने धान बेचने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है।
इनमें 522 रैयत और 2059 गैर रैयत किसानों के आवेदन का उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त 2961 रैयत एवं गैर रैयत किसानों ने भी ऑनलाइन आवेदन किया है।
प्रखंडवार आंकड़ों पर नजर डालें तो देव प्रखंड में सबसे अधिक 1967 किसानों ने आवेदन किया है। औरंगाबाद सदर प्रखंड में 851, रफीगंज में 483, मदनपुर में 476, कुटुंबा में 288 और गोह में 184 किसानों ने आवेदन किया है।
वहीं बारुण में 37, हसपुरा में 15, ओबरा में सात और दाउदनगर में छह किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया है। आंकड़ों के अनुसार देव प्रखंड के किसानों में धान अधिप्राप्ति को लेकर सबसे अधिक उत्साह देखा जा रहा है।

इस वर्ष सरकार ने सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2441 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। -फाइल फोटो
धान बेचने के लिए निर्धारित पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य
किसानों को पैक्स में धान बेचने के लिए निर्धारित पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य है। आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसान संबंधित क्रय केंद्र पर धान पहुंचाकर बिक्री कर सकेंगे। विभाग की ओर से किसानों से समय रहते आवेदन करने की अपील की जा रही है।
इस वर्ष सरकार ने सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2441 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। वहीं ग्रेड-ए धान की कीमत 2461 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है।
सरकारी दर पर धान बेचने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके बाद निर्धारित पैक्स या व्यापार मंडल के क्रय केंद्र पर धान पहुंचाना होगा। हालांकि, किसानों के बीच सरकारी खरीद को लेकर उत्साह कम रहने की बात भी सामने आती रही है।
किसानों का कहना है कि पैक्स में धान बेचने के दौरान नमी और अन्य खर्चों का हवाला देकर कई बार खरीद में परेशानी होती है। वहीं, स्थानीय स्तर पर व्यापारियों की ओर से किसानों से 2000 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद लिया जाता है। ऐसे में कई किसान सरकारी क्रय केंद्रों के बजाय व्यापारियों को धान बेचना सुविधाजनक समझते हैं।
किसानों का मानना है कि यदि पैक्स में समय पर खरीद, पारदर्शी व्यवस्था और निर्धारित समर्थन मूल्य का पूरा लाभ मिले तो अधिक संख्या में किसान सरकारी अधिप्राप्ति प्रक्रिया से जुड़ सकते हैं। विभाग के सामने इस बार निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप धान खरीद सुनिश्चित करने के साथ किसानों का भरोसा बढ़ाने की भी चुनौती होगी।

किसानों का कहना है कि पैक्स में धान बेचने के दौरान नमी और अन्य खर्चों का हवाला देकर कई बार खरीद में परेशानी होती है। -फाइल फोटो
घेउरा पैक्स में अध्यक्ष और प्रबंधक के बीच विवाद गहराया, डीसीओ कर रहे जांच
एक ओर जिले में धान अधिप्राप्ति की तैयारी चल रही है, वहीं दूसरी ओर घेउरा पैक्स में अध्यक्ष और प्रबंधक के बीच विवाद गहराता जा रहा है। पैक्स अध्यक्ष ने प्रबंधक अनुज कुमार सिंह को निलंबित कर दिया है। साथ ही अस्थायी प्रबंधक की नियुक्ति भी की गई है। अध्यक्ष की ओर से प्रबंधक पर वित्तीय अनियमितता समेत कई आरोप लगाए गए हैं। हालांकि प्रबंधक ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
प्रबंधक का कहना है कि पैक्स के बैंक खाते का संचालन अध्यक्ष और प्रबंधक के संयुक्त हस्ताक्षर से होता है। ऐसे में यदि वित्तीय अनियमितता हुई है तो इसमें अध्यक्ष की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। प्रबंधक ने डीसीओ समेत अन्य वरीय अधिकारियों को आवेदन देकर मामले में उचित कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि आदर्श पैक्स नियमावली में अस्थायी बहाली का प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर नियुक्ति की गई है। इस संबंध में जिला सहकारिता पदाधिकारी राजीव कुमार यादव ने बताया कि मामले की जांच-पड़ताल की जा रही है। जांच में यदि प्रबंधक सही पाए जाते हैं तो उन्हें निलंबन से मुक्त किया जाएगा। ऐसे में धान अधिप्राप्ति शुरू होने से पहले घेउरा पैक्स का विवाद सुलझाना भी विभाग के लिए जरूरी होगा।
