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बांका में 34 आशा कार्यकर्ता चयन मुक्त:एक साल तक काम नहीं करने, डिलीवरी में 0 उपलब्धि पर स्वास्थ्य विभाग का एक्शन




बांका जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में लापरवाही और विभागीय निर्देशों की अनदेखी करने वाली 34 आशा कार्यकर्ताओं को तत्काल प्रभाव से चयनमुक्त कर दिया गया है। लंबे समय से काम नहीं करने, निर्धारित दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन नहीं करने और अपने क्षेत्र में संस्थागत प्रसव के मामले में शून्य उपलब्धि पाए जाने के बाद जिला स्वास्थ्य समिति ने यह निर्णय लिया है। सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह की ओर से इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। छह माह से एक साल तक काम नहीं करने की बात आई सामने स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य स्वास्थ्य समिति के स्तर से जिले में कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं के कामकाज की लगातार समीक्षा की जा रही थी। इस दौरान सामने आया कि कई आशा कार्यकर्ता पिछले छह माह से लेकर एक साल तक अपने क्षेत्र में कोई काम नहीं कर रही थीं। इसके अलावा विभाग की ओर से जारी निर्देशों का भी पालन नहीं किया जा रहा था। समीक्षा में उनके कामकाज और निर्धारित जिम्मेदारियों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही पाई गई। धोरैया में सबसे अधिक 9 आशा कार्यकर्ता चयनमुक्त सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि जिले के नौ प्रखंडों की कुल 34 आशा कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की गई है। इनमें धोरैया प्रखंड की सबसे अधिक 9 कार्यकर्ता शामिल हैं। इसके अलावा बांका और शंभूगंज की 7-7, कटोरिया की 4, अमरपुर और बाराहाट की 2-2 तथा बेलहर, फुल्लीडुमर और चांदन की 1-1 आशा कार्यकर्ता को चयनमुक्त किया गया है। नोटिस के बाद भी कार्यशैली में नहीं हुआ सुधार अधिसूचना के अनुसार, संबंधित आशा कार्यकर्ताओं को पहले भी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों की ओर से कार्य में लापरवाही को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उन्हें कामकाज में सुधार के लिए पर्याप्त अवसर भी दिया गया, लेकिन उनकी कार्यशैली में बदलाव नहीं आया। कई कार्यकर्ताओं के क्षेत्र में संस्थागत प्रसव की उपलब्धि भी शून्य पाई गई। इन तथ्यों और समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर जिला स्वास्थ्य समिति ने उपलब्ध कराई गई सूची के अनुसार चयनमुक्ति का निर्णय लिया। रिक्त पदों पर जल्द होगा नई आशा कार्यकर्ताओं का चयन स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना और सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों का सुचारू संचालन सुनिश्चित करना है। चयनमुक्ति के बाद रिक्त हुए 34 पदों पर नियमानुसार जल्द नई आशा कार्यकर्ताओं का चयन किया जाएगा। इससे गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और बच्चों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं प्रभावित नहीं होंगी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा सकेगा।



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