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भागलपुर के राघोपुर तटबंध के डाउन स्ट्रीम में गंगा नदी का कटाव लगातार जारी है। नदी की तेज धारा तटबंध के किनारे दबाव बना रही है। हालात को देखते हुए जल संसाधन विभाग की टीम अलर्ट पर है। विभाग बड़े जहाजों की मदद से नदी में मेगा जियो बैग डालकर कटाव रोकने की कोशिश कर रहा है। इसके बावजूद कटाव जारी रहने से ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में चिंता और गुस्सा बढ़ रहा है। राघोपुर में कटाव के बढ़ते दायरे ने अब विक्रमशिला सेतु की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि अगर गंगा की धारा इसी तरह अपना रुख बदलती रही, तो नवगछिया की तरफ से नदी का दबाव सेतु की ओर बढ़ सकता है। हालांकि, सेतु पर खतरे की सही स्थिति का पता तकनीकी जांच के बाद ही चलेगा। एक वक्ता ने बताया कि 2023 में जल संसाधन विभाग और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के इंजीनियरों ने मिलकर निरीक्षण किया था। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि गंगा की धारा उत्तर की ओर खिसक रही है। इसमें विक्रमशिला सेतु की सुरक्षा के लिए अपस्ट्रीम-डाउनस्ट्रीम में गाइड बांध बनाने और पुराने रेलवे बांध को मजबूत करने का सुझाव दिया गया था। वक्ता का आरोप है कि एनओसी और विभागीय प्रक्रिया के कारण यह मामला अटका रहा, जिससे समय पर स्थायी समाधान नहीं हो सका। अब कटाव बढ़ने के बाद इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। गाइड बांध बनाया जाना चाहिए था
बिहपुर विधानसभा से वीआईपी प्रत्याशी रही अपर्णा कुमारी ने राघोपुर तटबंध की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पथ निर्माण मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक इंजीनियर कुमार शैलेंद्र के इस्तीफे की मांग की है। उनका का कहना है कि विक्रमशिला सेतु की सुरक्षा को देखते हुए उसके अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम में पहले ही गाइड बांध बनाया जाना चाहिए था। ऊपर से जियो बैग डालने से नहीं रुकेगा कटाव
पूर्व जिला परिषद सदस्य विजय कुमार ने कटावरोधी कार्यों की गुणवत्ता और विभागीय कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि केवल सतह पर काम करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। गंगा के अंदर गहराई और निचले हिस्से में मजबूत तरीके से काम करना जरूरी है।
उन्होंने ब्रह्मबास्थान और छोटेलालपुर के आसपास कटाव की स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि पानी का स्तर नीचे होने के बावजूद नदी के तल और अंदरूनी हिस्से में पर्याप्त काम नहीं किया जा रहा है। उनके अनुसार, निचले हिस्से में सही तकनीक से मेगा बैग डालकर नदी की धारा को नियंत्रित करने की कोशिश की जाए तो तटबंध को बचाने में मदद मिल सकती है।
कटाव घटते ही काम बंद
विजय कुमार ने आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर के अधिकारी ऊपर से निर्देश आने का इंतजार करते हैं कि जियो बैग डालना है या मेगा बैग। उनका दावा है कि संवेदक काम के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन जैसे ही कटाव कुछ कम होता है, काम रोक दिया जाता है और स्थिति गंभीर होने पर फिर आनन-फानन में बचाव कार्य शुरू होता है। उन्होंने कहा कि कटाव से लड़ाई केवल मौके पर कुछ बैग डालने से नहीं जीती जा सकती, बल्कि नदी की गहराई और धारा के वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर स्थायी सुरक्षा कार्य जरूरी है।
विजय कुमार ने कहा कि क्षेत्र में हालात गंभीर होने के बाद संबंधित मंत्री को दोबारा कटाव स्थल का जायजा लेना चाहिए था।
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