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मुजफ्फरपुर के गोबरसही ब्लास्ट हादसे की जांच के लिए गुरुवार को नई दिल्ली से पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) की चार सदस्यीय टीम मुजफ्फरपुर पहुंची। डिप्टी डायरेक्टर विजय कुमार और अर्पित जौहरी के नेतृत्व में पहुंची टीम ने पहले दिन घटनास्थल का निरीक्षण किया। स्थानीय लोगों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए और घटना से जुड़े वीडियो भी जुटाए। जांच के बाद देर शाम टीम ने मरीन ड्राइव स्थित कार्यालय में एसएसपी कांतेश कुमार मिश्र से मुलाकात की। उन्हें पहले दिन की जांच और आगे की पड़ताल के बिंदुओं से अवगत कराया। प्रारंभिक जांच में टीम को घटनास्थल के आसपास एक घर में 15 से 20 एलपीजी सिलेंडर रखे होने की जानकारी मिली है। वहां छोटे एलपीजी सिलेंडरों में गैस भरने का काम भी किए जाने की बात सामने आई है। टीम को आशंका है कि गैस भरने के दौरान निकली चिंगारी हादसे की वजह हो सकती है। स्थानीय स्तर पर टीम को बताया गया कि वहां अनधिकृत रूप से करीब 20 सिलेंडर रखे गए थे। हालांकि, घर के सदस्यों ने पूछताछ में बताया कि शादी समारोह के कारण सिलेंडरों का स्टॉक किया गया था। टीम इन सभी पहलुओं का सत्यापन कर रही है।
पीएनजी पाइपलाइन और सड़क विभाग की भूमिका भी जांच के घेरे में
हादसे की जांच सिर्फ एलपीजी सिलेंडरों तक सीमित नहीं है। पीएनजी पाइपलाइन बिछाने और उसकी सुरक्षा में बरती गई सावधानियों के साथ सड़क निर्माण विभाग (आरसीडी) की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। यह देखा जाएगा कि खुदाई के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं। पाइपलाइन की स्थिति, गैस रिसाव और घटना के समय मौजूद परिस्थितियों की भी जांच होगी। इसके लिए टीम ने स्थानीय लोगों के बयान और वीडियो को अहम साक्ष्य के रूप में जुटाया है। एसएसपी के पत्र पर पहुंची टीम, केस डायरी में जुड़ेगी रिपोर्ट
गोबरसही हादसे के कारणों का तकनीकी रूप से पता लगाने के लिए एसएसपी ने पीएनजीआरबी को पत्र लिखकर विशेषज्ञ टीम से जांच कराने का अनुरोध किया था। इसके बाद चार सदस्यीय टीम यहां पहुंची है। एसएसपी कांतेश कुमार मिश्र ने बताया कि टीम सात दिनों में प्रारंभिक और 30 दिनों में पूरी जांच रिपोर्ट सौंपेगी। जांच रिपोर्ट को कांड दैनिकी में शामिल किया जाएगा, ताकि हादसे के कारणों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने में मदद मिल सके।
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