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सुपौल में कोसी नव निर्माण मंच के आह्वान पर मंगलवार को कोसी तटबंध के भीतर मरौना अंचल के एकडेरा पलार घाट पर कोसी बाढ़ पीड़ितों ने एक दिवसीय जल सत्याग्रह किया। इस दौरान सैकड़ों महिला-पुरुष पानी में खड़े होकर अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर आवाज बुलंद करते नजर आए। खेतों में लगी फसल पूरी तरह बर्बाद जल सत्याग्रह में मरौना अंचल के सिसौनी पंचायत के एकडेरा, जोबहां, सिसौनी पलार तथा किशनपुर अंचल के बैराहा पंचायत के बौराहा, गोढ़ियारी, मानिकपुर, बुर्जा मुसहरी, नोआबाखर पंचायत के परसाही, सिमराहा समेत कई गांवों के लोग शामिल हुए। बाढ़ पीड़ितों ने कहा कि मानसून शुरू होने के बाद से तटबंध के भीतर गांवों में पानी जमा है। घर, आंगन और रास्ते पानी में डूबे हैं। एक गांव से दूसरे गांव जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। महिला, बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग परेशान हैं। पशुओं में भी पानी से बीमारी फैल रही है। वहीं, खेतों में लगी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग के पत्रांक 3340, दिनांक 3 सितंबर 2016 में चार-पांच दिनों तक चारों तरफ से पानी से घिरे और सामान्य जनजीवन प्रभावित होने वाले टोले-मोहल्ले व गांव को बाढ़ पीड़ित मानने का प्रावधान है। इसके बावजूद जिले में इसका अनुपालन नहीं किया जा रहा है। बाढ़ पीड़ितों ने जिले को बाढ़ग्रस्त घोषित कर मानक संचालन प्रक्रिया के तहत जीआर की राशि देने, फसल क्षति का इनपुट अनुदान देने, जरूरतमंद परिवारों को पुनर्वासित करने, तटबंध के भीतर स्वास्थ्य सुविधा और मेडिकल-पशु चिकित्सा शिविर लगाने, कोसी पीड़ित विकास प्राधिकार को पुनर्जीवित करने तथा कोसी की छाड़न धाराओं को पुनर्जीवित कर स्थायी समाधान की दिशा में काम करने समेत 8 सूत्री मांगें रखीं। कार्यक्रम में सुभाष यादव, जय कुमार, शिव नारायण मंडल समेत कई लोगों ने अपनी बात रखी।
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बाढ़ पीड़ितों ने पानी में खड़े होकर किया जल सत्याग्रह:सुपौल के पलार घाट पर 8 मांगों को लेकर प्रोटेस्ट
