इंदौर1 घंटे पहले
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बैठक में शामिल सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत।
इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की वार्षिक बैठक चल रही है। मंगलवार को बैठक का दूसरा दिन है। इसमें संगठन के अगले तीन साल की कार्ययोजना पर मंथन हो रहा है। संघ इस दौरान सामाजिक समरसता, पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली, कुटुंब प्रबोधन, स्व का भाव और नागरिक कर्तव्य पर फोकस करेगा। इन पांच विषयों को संघ ने ‘पंच परिवर्तन’ नाम दिया है।
डेली कॉलेज स्थित संत श्री रविदासजी महाराज सभागार में हो रही इस बैठक में देशभर से करीब 400 प्रतिनिधि शामिल हैं। इस बार पहली बार सभी प्रांतों के प्रमुख पदाधिकारियों को बुलाया गया है। संगठन में इस बदलाव की तैयारी पिछले करीब 18 महीने से चल रही थी।

बैठक में देशभर से करीब 400 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने पर जोर
बैठक में शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा भी हो रही है। सोमवार को शुरू हुई तीन दिवसीय बैठक में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। शहरों, गांवों और कॉलेज परिसरों में युवाओं को जोड़ने के लिए हुए कार्यक्रमों की समीक्षा की गई।
बैठक में युवाओं में नशीली दवाओं के बढ़ते चलन पर चिंता जताई गई। अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर प्रयास जरूरी हैं। इसके लिए सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाने पर विचार किया जा रहा है।
Gen-Z आंदोलनों से जुड़े सवाल पर आंबेकर ने कहा कि देश में कोई आवाज उठाता है तो संघ को पक्ष-विपक्ष के नजरिए से क्यों देखा जाता है। उन्होंने कहा कि सभी को ध्यान रखना चाहिए कि आंदोलन देशहित में हो। संघ इस विषय पर सतर्क रहता है और आगे भी रहेगा।
देशभर में 1.01 लाख से ज्यादा दैनिक शाखाएं
आंबेकर के मुताबिक, देश में संघ की दैनिक शाखाओं की संख्या बढ़कर 1 लाख 1 हजार 151 हो गई है। साप्ताहिक और मासिक मिलन को मिलाकर संघ का काम 1 लाख 10 हजार 849 स्थानों तक पहुंच गया है।
पिछले साल अक्टूबर की तुलना में शताब्दी वर्ष के दौरान 13 हजार से ज्यादा नई दैनिक शाखाएं जुड़ी हैं। बैठक में शाखाओं के विस्तार और उनकी गतिविधियों की समीक्षा की गई।

शताब्दी वर्ष में 65 हजार से ज्यादा हिंदू सम्मेलन
आंबेकर ने बताया कि शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में 65 हजार 660 हिंदू सम्मेलन हुए। शहरों में बस्ती स्तर पर और गांवों में मंडल स्तर पर ये आयोजन किए गए। कई जगह दो-तीन मंडलों को मिलाकर भी सम्मेलन हुए।
इन आयोजनों में समाज के अलग-अलग वर्गों की भागीदारी रही। कई लोगों ने शाखाओं से जुड़ने की इच्छा जताई। बैठक में इन सम्मेलनों से मिले अनुभवों और सामाजिक सहभागिता पर चर्चा हुई।
विदेश में संघ के काम और विस्तार पर भी चर्चा
बैठक में विदेशों में संघ की गतिविधियां बढ़ाने पर भी विचार हुआ। इसमें तीन विदेश प्रमुख शामिल हुए हैं। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के हालिया विदेश प्रवास के अनुभव भी साझा किए गए। अगस्त और सितंबर में वे अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन गए थे। वहां उन्होंने प्रमुख लोगों से संवाद किया और विभिन्न सम्मेलनों में विचार रखे।
आंबेकर के मुताबिक, भागवत ने विदेशों में हिंदुत्व की अवधारणा और दुनिया के कल्याण में भारत की भूमिका पर विचार रखे।
4 नवंबर की शाम तक चलेगी बैठक
बैठक की शुरुआत सोमवार को सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की थी। बैठक 4 नवंबर की शाम तक चलेगी।
बैठक में शामिल पदाधिकारियों का दिन सुबह 6 बजे शुरू होता है। सुबह शाखा और अन्य गतिविधियों के बाद अलग-अलग सत्रों में चर्चा होती है। बैठकों का सिलसिला रात करीब 8 बजे तक चलता है।

