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आरा सदर अस्पताल में चौथे दिन भी ओपीडी ठप:मरीज बोले- घंटों लाइन में खड़े होने के बावजूद इलाज नहीं; भासा की अपील पर हड़ताल जारी




शरीर में बीमारी और आंखों में दर्द लिए बुजुर्ग महिला सोमवार को सदर अस्पताल की लंबी कतार में इलाज का इंतजार करती रही। सुबह-सुबह अस्पताल पहुंची महिला को उम्मीद थी कि डॉक्टर को दिखाने के बाद दर्द से राहत मिलेगी, लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल के कारण लगातार चौथे दिन ओपीडी सेवा बंद थी। ओपीडी के बाहर मरीज और उनके परिजन डॉक्टरों के आने का इंतजार करते रहे, जबकि कई मरीज घंटों भटकने के बाद बिना इलाज वापस लौट गए। ग्रामीण इलाकों से बस और अन्य साधनों से सदर अस्पताल पहुंचे मरीजों की परेशानी और बढ़ गई। कई मरीजों ने बताया कि अस्पताल आने-जाने में किराया खर्च हो गया, लेकिन यहां पहुंचने के बाद ओपीडी बंद होने की जानकारी मिली। दरअसल, सहरसा सदर अस्पताल में डॉक्टरों और एक पत्रकार के बीच हुए विवाद के बाद डॉक्टरों पर की गई एकतरफा विभागीय व प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में हो रही है। गंभीर बीमारी, लंबे समय से इलाज करा रहे बुजुर्ग मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी सबसे अधिक परेशानी गंभीर बीमारी, चोट और लंबे समय से इलाज करा रहे मरीजों के साथ बुजुर्गों को हुई। इलाज नहीं मिलने से मरीज अस्पताल परिसर में इधर-उधर भटकते रहे। ओपीडी बंद होने का असर इमरजेंसी सेवा पर भी दिखाई दिया। इमरजेंसी में छह डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है, लेकिन सामान्य मरीजों का दबाव बढ़ने से रजिस्ट्रेशन काउंटर और डॉक्टरों के चेंबर के बाहर लंबी कतारें लग गईं। मरीजों को दो-दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। गंभीर मरीजों को प्राथमिकता दिए जाने के कारण सामान्य मरीजों को भी इलाज के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी। मरीजों का कहना है कि डॉक्टरों की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर गरीब और ग्रामीण परिवारों पर पड़ रहा है, जिन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ता है। ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे मरीजों की भीड़… मरीज बोली- चार दिनों से अस्पताल आ रही हूं, इलाज नहीं हो पा रहा मरीज रजीना कुमारी ने कहा कि पिछले चार दिनों से लगातार इलाज कराने के लिए सदर अस्पताल आ रहे हैं, लेकिन इलाज नहीं हो पा रहा है। नेता, विधायक और मुख्यमंत्री कहते हैं कि गरीबों का इलाज मुफ्त में होगा। हम चार दिनों से अस्पताल का चक्कर लगा रहे हैं। जब भी अस्पताल आते हैं तो बताया जाता है कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं। गरीब मरीज जाएं तो जाएं कहां? रजीना ने कहा कि सरकार जिंदा रहेगी, लेकिन गरीब इलाज के अभाव में मर जाएगा। गरीबों के लिए सरकार के पास कोई समाधान नहीं दिख रहा है। कई बार डॉक्टर पर्ची तक फेंक देते हैं। सरकार को जल्द से जल्द अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था और सिस्टम में सुधार करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर गरीबों की इसी तरह अनदेखी होती रही तो सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। गरीबों की अनदेखी हुई तो हमलोग सरकार को गद्दी से उखाड़कर फेंकने का काम करेंगे। बुजुर्ग महिला मरीज बोली- 2 घंटे से लाइन में हूं, इलाज नहीं हो पा रहा बुजुर्ग मरीज प्रभावती देवी ने बताया कि पेट और सिर में दर्द है। इलाज कराने के लिए सदर अस्पताल आई हूं। करीब दो घंटे से लाइन में खड़ी हूं, लेकिन अभी तक डॉक्टर से इलाज नहीं हो पाया है। अस्पताल के कर्मचारियों का कहना है कि डॉक्टरों के हड़ताल पर रहने के कारण इमरजेंसी में मरीजों की काफी भीड़ है। सामान्य मरीजों को भी वहीं इलाज के लिए भेजा जा रहा है। गरीब आदमी बाहर निजी अस्पताल में इलाज नहीं करा सकता है। ऐसे में सरकारी अस्पताल ही हमारा सहारा है। अगर यहां भी इलाज नहीं मिलेगा तो गरीब मरीज कहां जाएंगे। समाजसेवी बोले- इलाके के मरीजों को लेकर आया था, इलाज ही नहीं हुआ समाजसेवी रघुपति यादव ने कहा कि आज अपने क्षेत्र के मरीजों का इलाज कराने के लिए सदर अस्पताल आया हूं। पिछले चार दिनों से ओपीडी के डॉक्टर हड़ताल पर हैं। इससे जिले के अलग-अलग इलाकों से आने वाले मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य मंत्रालय से आग्रह है कि जल्द से जल्द ओपीडी सेवा बहाल कराई जाए। अगर इसी तरह मरीजों की भीड़ बढ़ती रही तो स्थिति को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा। इमरजेंसी में पहले से गंभीर मरीजों का इलाज होता है और ओपीडी बंद होने के कारण सामान्य मरीजों का दबाव भी वहीं बढ़ गया है। ऐसी स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो गंभीर मरीजों के लिए खतरा बढ़ सकता है। सरकार को तत्काल इसका समाधान निकालना चाहिए। डॉक्टर बोले- बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ की अपील पर हड़ताल है ऑन ड्यूटी डॉ. अमन सिंह ने बताया भाषा के आह्वान पर ओपीडी सेवा बंद है। हालांकि मरीजों की भीड़ को देखते हुए इमरजेंसी वार्ड में ओपीडी के कुछ डॉक्टरों से भी मरीजों का इलाज कराया जा रहा है। ओपीडी बंद होने के कारण इमरजेंसी पर मरीजों का दबाव काफी बढ़ गया है। इससे गंभीर मरीजों के इलाज में कुछ परेशानी जरूर हो रही है, लेकिन डॉक्टरों की टीम लगातार मरीजों को देखने और उनका इलाज करने में लगी हुई है। कोशिश है कि किसी भी गंभीर मरीज को इलाज में परेशानी न हो और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। सदर अस्पताल के प्रभारी सुपरिटेंडेंट बोले- ओपीडी के डॉक्टरों को इमरजेंसी सेवा में लगाया सदर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक अरुण कुमार ने बताया कि पिछले चार दिनों से ओपीडी सेवा बंद है। इसके बावजूद मरीजों की सुविधा को देखते हुए ओपीडी के छह डॉक्टरों को इमरजेंसी सेवा में लगाया गया है। ओपीडी बंद होने के कारण मरीजों को परेशानी हो रही है, लेकिन अस्पताल प्रशासन की टीम लगातार मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। खासकर दूर-दराज के इलाकों से आने वाले मरीजों को इलाज मिल सके, इसके लिए अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। सोमवार को सामान्य तौर पर भी मरीजों की संख्या अधिक रहती है। ऐसे में ओपीडी बंद रहने से इमरजेंसी पर दबाव और बढ़ गया है। हमारी कोशिश है कि अस्पताल आने वाले सभी मरीजों की जांच और इलाज हो सके तथा किसी मरीज को बिना इलाज लौटना न पड़े।



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