35 मिनट पहले
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भागलपुर मां काली की भक्ति और आस्था में डूबने के लिए भागलपुर तैयार है। यहां काली पूजा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की पहचान और वर्षों पुरानी परंपरा है। इस बार भी शहर के 81 प्रमुख स्थानों पर मां काली की प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं। पूजा को व्यवस्थित करने के लिए पूरे शहर को पूर्वी, पश्चिमी, उत्तरी और दक्षिणी चार क्षेत्रों में बांटा गया है।
चारों दिशाओं में पूजा समितियों की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पंडालों की सजावट से लेकर रोशनी तक की व्यवस्था अंतिम रूप ले चुकी है। शहर में उत्सव की रौनक और श्रद्धालुओं की चहल-पहल शुरू हो गई है।

कहीं भव्य पंडाल, तो कहीं रोशनी से जगमगाती सड़क
परबती, मनरोजा, एसकेपी, उर्दू बाजार की मशान काली, सराय रोड, इशाकचक की बुढ़िया काली, कोयला घाट, कालीघाट, खिरनी घाट, बड़ी खंजरपुर, भट्टा, जबारीपुर, कटहरबाड़ी, जरलाही, विकनपुर और लालूचक सहित 81 प्रमुख स्थानों पर मां की प्रतिमाएं स्थापित होती हैं। इन सभी स्थानों की अपनी अलग पहचान और पूजा की परंपरा है।
कहीं भव्य पंडाल आकर्षण का केंद्र बनते हैं तो कहीं वर्षों पुरानी धार्मिक परंपराओं के अनुसार मां की आराधना की जाती है। नवयुवा क्लब सहित विभिन्न पूजा समितियां भी आयोजन को भव्य बनाने में जुटी हैं। सड़कों को रंगबिरंगी लाइटों से सजाया गया है।

आधी रात पट खुलते ही शुरू होगी चार दिनों की दीपावली
काली पूजा महासमिति के अध्यक्ष धनंजय यादव और महासमिति से जुड़े रवि सिंह ने बताया कि भागलपुर में काली पूजा का उत्साह दूसरे शहरों से अलग है। यहां के लोग चार दिनों तक दीपावली मनाते हैं। रविवार की रात 12 बजे मां काली की प्रतिमाओं का पट खुलेगा।
इसके बाद दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। पट खुलने के साथ ही शहर में दीपावली जैसा माहौल बन जाएगा। प्रतिमाओं के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए लोग देर रात तक पंडालों में पहुंचेंगे। पट खुलने से लेकर विसर्जन तक शहर में उत्सव का माहौल बना रहता है।

कहीं भक्ति जागरण होगा तो कहीं बंटेगा महा-प्रसाद
मां बुढ़िया काली (इशाकचक): इस बार असम के प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर की थीम पर पंडाल तैयार किया गया है। पूजा समिति के मोनू मिश्रा ने बताया कि यहां तांत्रिक विधि से पूजा की जाती है।
सोमवार को कोलकाता से आई कलाकारों की टीम की ओर से भव्य भक्ति जागरण और झांकियों की प्रस्तुति दी जाएगी।
सिद्धेश्वरी काली (बरारी बरगाछ चौक): यहां भगवान शिव के महाकाल स्वरूप का भव्य और आकर्षक पंडाल बनाया गया है, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी है।
मां बुढ़िया काली (परबत्ती): सोमवार को भक्ति जागरण के साथ-साथ स्थानीय कलाकारों और ”किलकारी” के बच्चों की ओर से सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
मशानी काली (उर्दू बाजार): सोमवार को बच्चों के लिए विभिन्न खेलकूदव चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा।
हड़बड़िया काली (मंदरोजा): रविवार रात 12:30 बजे मां की प्रतिमा वेदी पर स्थापित होगी। मंदिर अध्यक्ष संजय सिंह के अनुसार, सोमवार दोपहर 1 बजे खीर का भोग, 1:30 बजे कन्या पूजन व ब्राह्मण भोज होगा। शाम 7 बजे खिचड़ी का भोग लगाकर महाप्रसाद बांटा जाएगा।
मंगलवार दोपहर 1 बजे खिचड़ी और 3 बजे हलवे का भोग लगेगा (यहां प्रत्येक अमावस्या पर हलवे का भोग लगाने की परंपरा है)।
बम काली (जोगसर/बूढ़ानाथ): 200 से अधिक वर्षों का इतिहास समेटे इस मंदिर में तांत्रिक परंपरा से पूजा होगी।

विसर्जन में उमड़ेगी लाखों श्रद्धालुओं की भीड़
भागलपुर की काली पूजा का सबसे बड़ा आकर्षण प्रतिमाओं का भव्य विसर्जन जुलूस है। इसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। भागलपुर के अलावा आसपास के जिलों और झारखंड से भी बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन को देखने और इसमें शामिल होने पहुंचते हैं।
प्रतिमाओं की भव्यता, आकर्षक सजावट और विसर्जन जुलूस का नजारा देखने के लिए दूर-दराज से लोग आते हैं। इस दौरान पूरा शहर श्रद्धालुओं की भीड़ और उत्साह से सराबोर रहता है।

