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बिहारशरीफ के सुनियोजित विकास के लिए तैयार किए जा रहे मास्टर प्लान 2047 के अंतर्गत शहर के औद्योगिक विकास और पर्यावरण सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की पुख्ता योजना बनाई गई है। बिहारशरीफ स्थित नालंदा डेयरी इकाई लगभग 9.9 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली है, जिसकी प्रतिदिन प्रसंस्करण क्षमता 4 लाख लीटर दूध, 30 मीट्रिक टन मिल्क पाउडर, 20 मीट्रिक टन मक्खन और 20 हजार लीटर आइसक्रीम तैयार करने की है। यह प्लांट करीब 220 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देने के साथ ही क्षेत्र के दुग्ध उत्पादक किसानों की आजीविका का बड़ा आधार है। वर्तमान में डेयरी इकाई के चारों ओर कोई निर्धारित हरित पट्टी नहीं है और यह घनी आवासीय आबादी से घिरी है, जिससे दुर्गंध, प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बना रहता है। औद्योगिक मानकों के तहत रेड कैटेगरी की ऐसी इकाइयों के लिए सुरक्षा दायरा अनिवार्य होने के कारण नए लैंड-यूज़ प्रस्ताव में संयंत्र के चारों ओर 200 मीटर चौड़ा ग्रीन बफर जोन बनाने और अपशिष्ट जल के सुरक्षित निस्तारण की सिफारिश की गई है। बावन बूटी साड़ी और मोरातालाब लेदर क्लस्टर के पुनरुद्धार की तैयारी जिले के पारंपरिक हुनर और स्थानीय शिल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती देने के लिए विशेष योजनाएं प्रारूप में शामिल की गई हैं। बसवान बिगहा की सदियों पुरानी बावन बूटी हथकरघा कला, जिसे 52 विशिष्ट आकृतियों, बौद्ध रूपांकनों और पद्मश्री सम्मान के साथ जीआई टैग प्राप्त है, को आधुनिक बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। एक साड़ी को तैयार करने में लगने वाले लंबे समय, सीमित आमदनी और मशीनी वस्त्रों से मिल रही प्रतिस्पर्धा को देखते हुए यहां ‘हैंडलूम विलेज’, बुनकर कौशल व डिजाइन केंद्र, कॉमन फैसिलिटी सेंटर तथा 52 बूटी क्राफ्ट म्यूजियम स्थापित करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही मोरातालाब में जूता-चप्पल निर्माण की मौजूदा 35 इकाइयों और उनसे जुड़े 140 कारीगरों के वार्षिक 2.52 करोड़ रुपये के कारोबार को नई गति देने के लिए अत्याधुनिक लेदर व फुटवियर पार्क, तकनीकी उन्नयन और ‘बिहारशरीफ फुटवियर क्लस्टर’ ब्रांडिंग का खाका खींचा गया है। सूफी व जैन सर्किट के जरिए वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर उभरेगा शहर बिहारशरीफ की बहुधर्मी विरासत और आध्यात्मिक पहचान को उभारने के लिए मास्टर प्लान में पर्यटन विकास को प्राथमिकता दी गई है। शहर ऐतिहासिक रूप से सूफी संतों की पवित्र तपोभूमि रहा है, जहां बड़ी दरगाह और पीर पहाड़ी पर स्थित हजरत सैयद इब्राहिम मलिक बया का मकबरा आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। पीर पहाड़ी तक सुगम पहुंच मार्ग, सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था, पर्यटक विश्राम गृह और स्वच्छता सुविधाओं के अभाव को दूर करने के लिए इसे ‘प्रसाद’ और ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ जैसी केंद्रीय योजनाओं से जोड़ने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा पीर पहाड़ी की चोटी पर स्थित ऐतिहासिक मकबरे की सुरक्षा के लिए 100 मीटर का निषिद्ध क्षेत्र और 200 मीटर का विनियमित क्षेत्र तय किया गया है। वहीं मात्र 12 किलोमीटर दूर स्थित भगवान महावीर की पावन निर्वाण स्थली पावापुरी जलमंदिर के महत्व को देखते हुए बिहारशरीफ को जैन सर्किट के मुख्य प्रवेश द्वार और आतिथ्य केंद्र के रूप में विकसित करने पर सहमति बनी है। वर्ष 2047 तक पर्यटकों की संख्या 19.42 लाख पहुंचने का अनुमान दस्तावेज़ के अनुसार शहर के प्रमुख दर्शनीय स्थलों पर आने वाले पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। वर्ष 2024 में बड़ी दरगाह, मोरा तालाब, मनीराम अखाड़ा और पीर पहाड़ी पर कुल 6 लाख 67 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे, जिसके वर्ष 2047 तक बढ़कर 19 लाख 42 हजार तक पहुंचने का अनुमान है। इस भारी प्रवाह को संभालने के लिए शहर को ‘द सिटी ऑफ लिविंग फेथ्स’ की थीम पर विकसित करते हुए बिहारशरीफ संग्रहालय, मनीराम अखाड़ा, पीर पहाड़ी, बड़ी दरगाह, वज्र विद्या फुलाहारी थ्रांगु बौद्ध मठ और मोरा तालाब वाटरफ्रंट को जोड़कर एक संपूर्ण हेरिटेज कॉरिडोर की रूपरेखा तैयार की गई है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था, स्वरोजगार और सांस्कृतिक पर्यटन को अभूतपूर्व विस्तार मिलेगा।
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'द सिटी ऑफ लिविंग फेथ्स' बनेगा बिहारशरीफ:सूफी, जैन सर्किट से संवरेगा शहर; पीर पहाड़ी, पावापुरी रूट पर होगा फोकस
