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17 दिन का पितृपक्ष मेला, 15 दिन से सम्मान समारोह:गयाजी में हर दूसरे दिन आयोजन; प्रभारी मंत्री बोले- मगध का गौरव पीढ़ियों तक पहुंचना हमारी जिम्मेदारी




पितृपक्ष मेला-2026 के समापन के बाद गयाजी की उस सामूहिक ताकत को सम्मानित किया गया, जिसने देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं व पिंडदानियों के लिए बेहतर व्यवस्था बनाने में योगदान दिया। हरिदास सेमिनरी के प्रेक्षागृह में आयोजित अखंड मगध गौरव महोत्सव सह पितृपक्ष मेला सम्मान समारोह में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और समाज के प्रबुद्ध लोगों ने मगध की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम की संयुक्त अध्यक्षता बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार और कृषि मंत्री सह गया के प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने की। 17 दिन का पितृपक्ष मेला, 15 दिन से आयोजित हो रहा सम्मान समारोह 17 दिवसीय पितृपक्ष मेला के समापन के एक पखवाड़े से अधिक का समय बीत चुका है। इस बीच हर दूसरे दिन शहर या फिर बोधगया में सम्मान समारोह का सिलसिला प्रशासन या फिर सन्गठन की ओर से धड़ले आयोजित हो रहा है। इसकी शुरुआत जिला पुलिस की ओर से की गई थी। उसके बाद से सम्मान समारोह की बाढ़ सी शहर में आई हुई है। पितृपक्ष की सफलता में पूरे गया समाज की भूमिका कार्यक्रम की शुरुआत डीएम शशांक शुभंकर के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि अखंड मगध गौरव महोत्सव जिले के लिए गौरवपूर्ण अवसर है। पितृपक्ष मेला-2026 का सफल और सुव्यवस्थित आयोजन किसी एक विभाग की उपलब्धि नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास, समर्पण और जनभागीदारी का परिणाम है। डीएम ने कहा कि गया के नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न संस्थाओं ने मेले को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। इनके सहयोग से देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं और पिंडदानियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकीं। श्रद्धालु गया से सुखद अनुभूति लेकर लौटे हैं। मेले को लेकर लगातार सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। यह जिला प्रशासन के साथ पूरे गया समाज के लिए गर्व की बात है। उन्होंने आयोजन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से योगदान देने वालों की जमकर तारीफ की। मगध का गौरव, आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प समारोह को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री सह गया के प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मगध की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मगध का गौरवशाली इतिहास उसकी पहचान है। इसे सहेजना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अखंड मगध गौरव महोत्सव महज एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं है। यह अपनी जड़ों को पहचानने, इतिहास को याद करने और समृद्ध विरासत से नई पीढ़ी को परिचित कराने का संकल्प है। अपने संबोधन में उन्होंने मगध की गौरवगाथा को पंक्तियों में भी व्यक्त किया—
‘न झुका है मगध का मस्तक, न मिटा है इसका मान, इतिहास की हर धड़कन में बसता है मगध महान।’



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