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विधान परिषद चुनाव के नतीजे आने के बाद शनिवार को बड़ा उलटफेर हुआ। तिरहुत स्नातक से 2 बार निर्दलीय चुनाव जीतने वाले बंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक से निर्दलयी चुनाव जीतने वाले राहुल राज ने शनिवार को बीजेपी की सदस्यता ले ली थी। उन्होंने बिहार बीजेपी के प्रदेश प्रभारी की मौजूदगी में सदस्यता ग्राहण की। चुनाव जीतने के बाद ही उन्होंने इस बात के संकेत दे दिए थे। हालांकि, बंशीधर ने देर रात वीडियो जारी कर कहा कि वो सीएम सीएम से मिलने गए थे, वो बीजेपी में शामिल नहीं हुए हैं। दोनों नेता जिस सीट से जीते हैं, वहां NDA की तरफ से JDU के कैंडिडेट चुनाव लड़ रहे थे। राहुल राज ने JDU के आनंद पुष्कर को चुनाव हराया है तो बंशीधर ब्रजवासी ने अभिषेक झा को हराया है। इनकी जॉइनिंग के बाद अब 8 सीटों में 4 सीटें बीजेपी के हिस्से हो गई है। वहीं JDU मात्र एक सीट पर सिमट गई है। बीजेपी में शामिल होने के बाद शनिवार को बंशीधर ने कहा था कि सीएम हमेशा छोटा भाई की तरह मानते हैं। मैं चुनाव जीता तो उन्होंने मुझसे बात की। उन्होंने कहा कि शिक्षक हित में किसी के साथ जाना होगा तो जाएंगे। इसलिए बीजेपी की सदस्यता ली है। शिक्षक आंदोलन से मिली बंशीधर की पहचान बंशीधर ब्रजवासी ने शिक्षकों की मांगों को लेकर कई आंदोलनों में भूमिका निभाई। वे परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ, बिहार के प्रदेश अध्यक्ष बने। नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन और राज्यकर्मी का दर्जा दिलाने जैसी मांगों को लेकर उन्होंने आवाज उठाई। शिक्षकों के बीच सक्रियता के कारण उनकी पहचान बिहार के शिक्षक संगठनों में मजबूत हुई। धीरे-धीरे वे शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर मुखर नेता के रूप में सामने आए।
निर्दलीय लड़कर जेडीयू उम्मीदवार को हराया तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में बंशीधर ब्रजवासी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे। उन्होंने जेडीयू के अभिषेक झा को हराकर जीत दर्ज की। इस परिणाम ने चुनाव में उनकी व्यक्तिगत पकड़ और शिक्षक वर्ग के बीच उनकी पहचान को चर्चा में ला दिया। अब भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका और पार्टी में जिम्मेदारी को लेकर नजरें रहेंगी। राहुल राज पहली बार चुनाव लड़े और जीते सारण शिक्षक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी डॉ. राहुल राज ने जेडीयू के आनंद पुष्कर को हराया है। वह पहली बार MLC चुनाव लड़े और जीते हैं। राजपूत जाति से आने वाले राहुल पीएचडी होल्डर और वीआईपी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। राहुल राज स्कूल-कॉलेज चलाते हैं। इसके साथ ही दूसरे कारोबार भी संभालते हैं। उनके पिता का नाम विपिन सिंह है। सारण जिले के रिविलगंज प्रखंड के मुकरेड़ा गांव के रहने वाले राहुल बीजेपी प्रदेश कार्य समिति के सदस्य के साथ-साथ रिविलगंज ब्लॉक प्रमुख भी हैं।
जीत के बाद राहुल राज ने सोशल मीडिया पर किया था पोस्ट यह जीत आप सभी समर्पित साथियों, समर्थकों और मतदाताओं के विश्वास की जीत है। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद (MLC) चुनाव में मिली इस ऐतिहासिक जीत के लिए मैं आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। आप सभी ने दिन-रात मेहनत की, हर परिस्थिति में मेरा साथ दिया और अपने विश्वास, स्नेह एवं समर्पण से इस जीत को संभव बनाया। यह जीत केवल मेरी नहीं, बल्कि आप सभी की जीत है। सारण से चंपारण तक के सभी सम्मानित गुरुजनों का विश्वास, स्नेह और आशीर्वाद मेरी सबसे बड़ी ताकत है। शिक्षक सम्मान, अधिकार और स्वाभिमान की रक्षा के लिए मेरा संघर्ष सदैव जारी रहेगा। आप सभी मेरी ताकत हैं, मेरा विश्वास हैं और मेरी सबसे बड़ी पूंजी हैं। राहुल राज ने शिक्षकों की मांगों लेकर सीएम से की मुलाकात बीजेपी में शामिल होने के बाद राहुल राज से सोशल मीडिया पर लिखा- बड़े भाई राजीव प्रताप रूढी जी के मार्गदर्शन में शिक्षकों की ज्वलंत समस्याओं और लंबित मांगों को लेकर सीएम सम्राट चौधरी से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने सकारात्मक आश्वासन देते हुए कहा कि शिक्षकों की जायज मांगों पर विचार कर उनके समाधान की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हमारा प्रयास और हमारी प्रतिबद्धता व्यक्तिगत नहीं, बल्कि शिक्षक समाज के सम्मान, अधिकार और हितों के लिए है। शिक्षकों की अपेक्षाओं पर खड़ा उतरना ही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जदयू ने इशारों में बीजेपी पर साधा निशाना अभिषेक झा ने कहा- NDA के चक्रव्यूह में फंस गया अभिषेक झा ने सोशल मीडियो पर पोस्ट किया था। उन्होंने चुनाव में साथ देने वाले मतदाताओं और समर्थकों का आभार जताते हुए अपनी हार को महाभारत के अभिमन्यु के प्रसंग से जोड़ा। उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या अपने ही राजनीतिक परिवार NDA के भीतर रचे गए चक्रव्यूह में अभिमन्यु की तरह अकेले पड़ गए थे? उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत पीड़ा और आत्ममंथन का विषय बताया। उन्होंने यह भी कहा था कि वह किसी के प्रति कटुता या द्वेष नहीं रखना चाहते और समय के साथ सच्चाई सामने आएगी। चुनाव में सहयोगी दलों का ह्दय साफ नहीं था: देवेश चंद्र ठाकुर JDU सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने कहा था कि NDA के बहुत सारे माननीय लोग हैं, जो सहयोगी दलों के हैं। उनका हृदय साफ नहीं था अभिषेक झा से किसी की दुश्मनी नहीं थी। समय सबको दिखाता है, समय सबको मौका देता है। ऐसी बात लोग नहीं भूलते हैं। इन लोगों ने जिंदगी भर मदद लिया है और बाद में हम लोगों को धोखा दिया है भाजपा पार्टी के कोई लोग बता दें कि हम लोगों ने एक भी शब्द कहीं पर निकला है। चुनाव में कभी भी एक शब्द नहीं हम लोगों ने निकाला है।
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पहले बीजेपी की सदस्याता ली, फिर पलटे वंशीधर:कहा- केवल सीएम से मिलने गया था; सारण शिक्षक सीट से निर्दलीय जीते राहुल राज फिर पार्टी में लौटे
