ब्राजीलिया16 मिनट पहले
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ब्राजील में 80 साल के लूला दा सिल्वा ने चौथी बार राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है। वे पहले दौर की वोटिंग में फ्लावियो बोल्सोनारो से पिछड़ गए थे, लेकिन दूसरे दौर में बाजी पलट दी।
1989 में ब्राजील में सीधे राष्ट्रपति चुनाव शुरू होने के बाद पहली बार ऐसा हुआ है, जब पहले राउंड में दूसरे नंबर पर रहने वाला उम्मीदवार आखिर में राष्ट्रपति बना।
वहीं फ्लावियो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। बोल्सोनारो परिवार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का करीबी माना जाता है। पहने चरण में उन्हें 47% वोट मिले थे।

लूला दा सिल्वा राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में वोट डालने के बाद मतदान केंद्र से बाहर निकलते हुए। तस्वीर 25 अक्टूबर 2026 की है।
जेल गए, चुनाव हारे, फिर सत्ता में लौटे लूला
लूला 2003 से 2011 तक ब्राजील के राष्ट्रपति रह चुके हैं। दो बार लगातार राष्ट्रपति रहने के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। 2022 में उन्होंने फ्लावियो के पिता जायर बोल्सोनारो को हराकर फिर से सत्ता हासिल की।
लूला का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 2018 में भ्रष्टाचार के मामले में उन्हें जेल जाना पड़ा था। बाद में उनकी सजा रद्द कर दी गई। इसके बाद वे 2022 का चुनाव लड़ सके और राष्ट्रपति बने।
पहले राउंड में पिछड़ने के बाद लूला कैसे जीते?
- पहले राउंड में जो उम्मीदवार हार गए, उनके समर्थकों को दूसरे राउंड में लूला या फ्लावियो में से किसी एक को वोट देना था। इससे जीत का पूरा हिसाब बदल सकता था।
- चुनाव से पहले हुए सर्वे में 49% महिलाओं ने लूला का समर्थन किया, जबकि फ्लावियो को 40% महिलाओं का समर्थन मिला था।
- सर्वे में 52% कैथोलिक वोटरों ने लूला का समर्थन किया, जबकि फ्लावियो को 42% का समर्थन मिला था।
- लूला ने कहा कि ब्राजील को अपने फैसले खुद लेने चाहिए। उन्होंने अमेरिका के दबाव के बीच देश की आजादी बनाए रखने पर जोर दिया। इससे भी मतदाता प्रभावित हुए।
संसद में विरोधी दल मजबूत
राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद भी लूला के लिए सरकार चलाना आसान नहीं होगा। ब्राजील की संसद में दक्षिणपंथी दल मजबूत हैं। जायर बोल्सोनारो की लिबरल पार्टी और उसके सहयोगियों को निचले सदन में 280 से ज्यादा और सीनेट में 50 तक सीटें मिलने का अनुमान है।
ऐसे में लूला को अपने फैसले लागू कराने के लिए दूसरी पार्टियों का साथ लेना होगा। सरकारी खर्च और गरीबों को मिलने वाली मदद जैसे मुद्दों पर संसद में टकराव हो सकता है।
माना जा रहा है कि विरोधी दलों के मजबूत होने से लूला के लिए चुनावी वादे पूरे करना मुश्किल हो सकता है।
लूला ने गरीबों और मजदूरों को राहत देने का वादा किया था
चुनाव प्रचार में लूला ने गरीबों और कम आमदनी वाले परिवारों की मदद करने पर जोर दिया। उन्होंने कई वादे किए हैं:
सरकारी मदद में बढ़ोतरी: गरीबों के लिए चलाई जा रही प्रमुख योजना की राशि 15% बढ़ाने का वादा।
मुफ्त सफर: शनिवार और रविवार को देशभर में सार्वजनिक परिवहन मुफ्त करने की योजना। इसे लागू करने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होगी।
गरीबी और बेरोजगारी घटाना: गरीब परिवारों की हालत सुधारना और रोजगार बढ़ाना। मजदरों की जिंदगी बेहतर बनाना।
बढ़ता कर्ज और महंगाई बढ़ाएंगे परेशानी
लूला का नया कार्यकाल आर्थिक दबाव के बीच शुरू होगा। देश में ब्याज दरें ऊंची हैं, सरकारी कर्ज बढ़ रहा है और आम लोगों पर भी कर्ज का बोझ बढ़ा है।
ब्राजील सरकार के अनुमान के मुताबिक, अगले साल आर्थिक विकास दर 2.3% रह सकती है। वहीं, सरकारी कर्ज देश की कुल अर्थव्यवस्था यानी जीडीपी के 82% से ऊपर पहुंच गया है।
गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, लूला की सरकार के लिए अगले कार्यकाल में सरकारी खर्च को काबू करना आसान नहीं होगा।
लोगों पर बढ़ते कर्ज को देखते हुए लूला ने चुनाव प्रचार के दौरान कर्ज से राहत देने की योजना पेश की थी। ऑनलाइन सट्टेबाजी पर अस्थायी रोक लगाने का कदम भी उठाया गया।
दूसरी ओर, संसद में मजबूत दक्षिणपंथी दल कारोबारियों के पक्ष में आर्थिक सुधारों की मांग कर सकते हैं। इससे सरकारी खर्च और गरीबों को मिलने वाली मदद को लेकर टकराव हो सकता है।
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