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बिहारशरीफ के एक निजी अस्पताल में हर्निया के ऑपरेशन के लिए भर्ती मरीज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए बिहार थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। वहीं, डॉक्टर ने परिजनों को 10 लाख रुपये के आर्थिक नुकसान का दावा करते हुए कानूनी नोटिस भेजा है। गुरुवार को मृतक के परिजनों और स्थानीय नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जिला प्रशासन से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और न्याय दिलाने की मांग की। साइकिल चलाकर अस्पताल पहुंचे थे मरीज मृतक के बेटे सौरभ कुमार सिन्हा, जो सोहसराय थाना क्षेत्र के सलेमपुर के निवासी हैं, ने बताया कि उनके 55 वर्षीय पिता संतोष कुमार सिन्हा को हर्निया की समस्या थी। 23 सितंबर को उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सौरभ के अनुसार, सभी मेडिकल जांच की रिपोर्ट सही आई थी और डॉक्टर ने 28 सितंबर को ऑपरेशन का समय दिया था। उन्होंने बताया कि उनके पिता पूरी तरह स्वस्थ थे। वह 15 दिन पहले ही वैष्णो देवी की यात्रा से लौटे थे। 28 सितंबर को खुद साइकिल चलाकर अस्पताल पहुंचे थे। सौरभ के मुताबिक, ऑपरेशन की फीस पहले 15 हजार रुपये तय हुई थी, जिसे डॉक्टर से बातचीत के बाद 12 हजार रुपये कर दिया गया। 28 सितंबर को फीस जमा करने के बाद उन्हें कमरा नंबर 109 में भर्ती कराया गया। परिजनों का आरोप- सुई लगने के 5 मिनट बाद मुंह से निकलने लगा झाग सौरभ और स्थानीय नेता अभिषेक पासवान ने आरोप लगाया कि भर्ती होने के बाद डॉक्टर के एक कर्मी ने बिना स्किन टेस्ट किए मरीज को एंटीबायोटिक का इंजेक्शन लगा दिया। सौरभ के अनुसार, इंजेक्शन लगने के बाद उनके पिता बेचैन हो गए और करीब पांच मिनट के भीतर उनके मुंह से झाग निकलने लगा। उन्होंने बताया कि कर्मी से पूछने पर उसने कहा कि कुछ नहीं हुआ है और मरीज नहीं मरेंगे। सौरभ ने आरोप लगाया कि उनकी बहन डॉक्टर को चेंबर से बुलाकर लाई। इसके बाद डॉक्टर करीब आधे घंटे तक उन्हें गुमराह करते रहे और फिर दूसरे निजी अस्पताल में रेफर कर दिया। परिजनों के मुताबिक, दूसरे अस्पताल पहुंचने पर उन्हें बताया गया कि मरीज की मौत करीब एक घंटे पहले ही हो चुकी थी। हालांकि, मौत के वास्तविक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। डॉक्टर और कर्मियों के फरार होने का आरोप, बाद में मिला कानूनी नोटिस परिजनों ने बताया कि वे घटना के बारे में पूछने के लिए वापस पहले अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टर और उनके कर्मी वहां नहीं मिले। इसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। परिजनों के अनुसार, पुलिस के बुलाने पर डॉक्टर पहुंचे, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि मरीज को कौन-सी सुई दी गई थी। सौरभ ने आरोप लगाया कि शुरुआत में उन्हें मामला सुलझाने का प्रलोभन दिया गया। जब वे नहीं माने और बिहार थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई, तो डॉक्टर की ओर से कानूनी नोटिस भेजा गया। नोटिस में परिजनों के कारण अस्पताल को 10 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान होने की बात कही गई है। एसआई कर रहे जांच, डीएसपी स्तर के अधिकारी से जांच की मांग प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिषेक पासवान ने पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चिकित्सीय लापरवाही से मौत के मामले की जांच डीएसपी स्तर के अधिकारी से कराई जानी चाहिए, लेकिन मामला एसआई अरुण कुमार यादव को सौंपा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में लापरवाही बरती जा रही है। परिजनों ने जिला प्रशासन और पुलिस से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। मानवाधिकार आयोग और स्वास्थ्य मंत्री से भी शिकायत परिजनों ने बताया कि उन्होंने मामले की शिकायत मानवाधिकार आयोग और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री से भी की है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के एक वकील के माध्यम से शिकायत किए जाने की बात कही गई है। उन्होंने एसपी हृदयकांत और जिला प्रशासन से डीएसपी स्तर के अधिकारी से जांच कराने की मांग की। साथ ही, डॉक्टर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज करने और उनका मेडिकल लाइसेंस रद्द करने की मांग की है। फिलहाल, ये सभी परिजनों की मांगें और आरोप हैं। डॉक्टर ने कहा- दवा रिएक्शन या हार्ट अटैक से बिगड़ सकती थी हालत डॉक्टर ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मरीज को एनेस्थीसिया नहीं दिया गया था। उनके अनुसार, सामान्य प्री-मेडिकेशन के तहत रेंटेक और जेंटामाइसिन देने के बाद मरीज के मुंह से झाग निकलने लगा था। डॉक्टर ने कहा कि ऐसी स्थिति दवा के रिएक्शन या हार्ट अटैक के कारण हो सकती है। मौत के वास्तविक कारण का पता पोस्टमॉर्टम से ही चल सकता है। उन्होंने बताया कि मरीज की हालत बिगड़ने पर प्रोटोकॉल के अनुसार इंट्यूबेट कर वेंटिलेटर सपोर्ट वाले अस्पताल में रेफर किया गया था। डॉक्टर ने धमकी देने और अस्पताल से फरार होने के आरोपों को भी खारिज किया। उनके मुताबिक, सोशल मीडिया पर छवि खराब किए जाने के कारण परिजनों को कानूनी नोटिस भेजा गया है। अब मामले में मौत के कारणों और इलाज के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण होगी।
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बिहारशरीफ में हर्निया ऑपरेशन से पहले मरीज की मौत:परिजनों ने लापरवाही की FIR कराई; डॉक्टर ने भेजा 10 लाख का नोटिस
