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IDBI Bank Divestment | Fairfax to Buy 60 Percent Stake for 52877 Crore


17 मिनट पहले

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केंद्रीय कैबिनेट ने आज 14 अक्टूबर को IDBI बैंक के नए खरीदार के नाम पर मुहर लगा दी है। इस फैसले के तहत केंद्र सरकार और LIC मिलकर बैंक में अपनी 60.72% हिस्सेदारी कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स की कंपनी ‘फेयरफैक्स’ को बेचेंगे।

यह सौदा ₹52,877 करोड़ में तय हुआ है। 2022 में टाटा ग्रुप को एअर इंडिया बेचे जाने के बाद, यह केंद्र सरकार का सबसे बड़ा विनिवेश है। रकम के लिहाज से यह एअर इंडिया की ₹18 हजार करोड़ की डील से भी लगभग तीन गुना बड़ा सौदा है।

सरकार और LIC के पास रहेगी 34% हिस्सेदारी

IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने के बाद भी बैंक में सरकार के पास 15% और LIC के पास 19% शेयर रहेंगे। यानी कुल हिस्सेदारी 34% बनी रहेगी।

IDBI बैंक में हिस्सेदारी

शेयरहोल्डर अभी हिस्सेदारी डील के बाद
फेयरफैक्स 0% 60.72% (नया प्रमोटर)
LIC 49.24% 19.00%
केंद्र सरकार 45.48% 15.00%
पब्लिक/अन्य 5.28% 5.28%

अनुमान से ₹5 ज्यादा बोली, इसलिए डील मंजूर

सरकार ने बैंक के एक शेयर की सही कीमत यानी फेयर वैल्यू तय करने के लिए दो स्वतंत्र एजेंसियों की मदद ली थी। इन एजेंसियों ने कैलकुलेशन के बाद बताया कि IDBI बैंक के एक शेयर की तय कीमत ₹75.99 होनी चाहिए।

कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स ने सरकार के तय किए गए इस बेस प्राइस से ज्यादा यानी ₹81 प्रति शेयर के हिसाब से बोली लगाई। चूंकि फेयरफैक्स की बोली सरकार के तय अनुमान से प्रति शेयर ₹5.01 ज्यादा थी, इसलिए सरकार ने इसे स्वीकार कर लिया।

IDBI बैंक को बेचने की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी

इसकी शुरुआत सबसे पहले 7 अक्टूबर 2022 को हुई थी, जब सरकार ने बैंक को खरीदने के इच्छुक खरीदारों से आवेदन मंगाए थे।

शुरुआत में 5 बड़ी कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई। सरकार ने जब सभी के दस्तावेजों और नियमों की जांच की, तो इनमें से 4 कंपनियां ही योग्य पाई गईं।

इसके बाद आखिरी दौर में दो कंपनियों ने अपने तकनीकी कागजात और बोली जमा की। सबसे बेहतर बोली लगाकर कनाडाई कंपनी ने यह डील अपने नाम कर ली।

डील से जुड़े 2 अहम सवालों के जवाब

सवाल 1: फेयरफैक्स फाइनेंशियल कौन है?

जवाब: फेयरफैक्स फाइनेंशियल कनाडा बेस्ड फाइनेंशियल होल्डिंग कंपनी है। इसके प्रमुख भारतीय मूल के कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स हैं। इन्हें ‘कनाडा का वॉरेन बफेट’ भी कहा जाता है।

सवाल 2: सामान्य ग्राहकों और अकाउंट होल्डर्स पर क्या असर पड़ेगा?

जवाब: बैंक के रोजमर्रा के कामकाज, FD, लोन, पासबुक और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं पर ग्राहकों के लिए कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। आपकी FD, लिए गए लोन, बैंक पासबुक और मोबाइल-नेट बैंकिंग सेवाएं पहले की तरह ही चलती रहेंगी।

कंपनी का नया मालिक आने से बैंक में ज्यादा पैसा लगेगा, जिससे आने वाले समय में ग्राहकों को नई तकनीक और बेहतर बैंकिंग सुविधाएं मिलेंगी।



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