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Sheikh Hasina Extradition Case | India Bangladesh Diplomatic Statement


ढाका29 मिनट पहले

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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (फाइल फोटो)

बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भारत ने कहा कि उन्हें पनाह देना भारत की मजबूरी थी। यह बात भारत के बांग्लादेश में हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने शनिवार को कही है।

दिनेश त्रिवेदी बे ऑफ बंगाल कन्वर्सेशन 2026 कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान एक छात्र ने हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भी सवाल पूछा।

जवाब में त्रिवेदी ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया जारी है। हसीना को बांग्लादेश कब भेजा जाएगा, इसकी समयसीमा नहीं बताई जा सकती।

सत्ता से हटने के बाद वे 5 अगस्त 2024 को भारत आई थीं। बीते दो साल से हसीना भारत में रह रहींं हैं।

बे ऑफ बंगाल कन्वर्सेशन 2026 कार्यक्रम में दिनेश त्रिवेदी।

बे ऑफ बंगाल कन्वर्सेशन 2026 कार्यक्रम में दिनेश त्रिवेदी।

भारत हसीना को आने नहीं देता तो स्थिति खराब हो सकती थी

हसीना के भारत आने देने के फैसले पर भी त्रिवेदी ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2024 को जब हसीना ने ढाका छोड़ा, तब वह अभी भी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थीं और वहां हालात तेजी से बदल रहे थे।

त्रिवेदी ने कहा कि उस समय भारत के पास हसीना को दिल्ली में उतरने की अनुमति देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। अगर भारत उन्हें उतरने की अनुमति नहीं देता तो स्थिति खराब हो सकती थी।

हसीना को भारतीय सेना नहीं लाई थी

त्रिवेदी ने यह भी स्पष्ट किया कि हसीना को भारत भारतीय वायुसेना या भारतीय सेना नहीं लाई थी।

5 अगस्त को उन्हें पहले बांग्लादेश के सैन्य हेलिकॉप्टर से उनके आवास के पास से निकाला गया। इसके बाद वह बांग्लादेश एयरफोर्स के विमान से भारत पहुंचीं।

5 अगस्त 2024 को हिंसक प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना हेलिकॉप्टर से दिल्ली आ गईं थीं।

5 अगस्त 2024 को हिंसक प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना हेलिकॉप्टर से दिल्ली आ गईं थीं।

भारत-बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण संधि है

भारत और बांग्लादेश ने 2013 में प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें कुछ परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को दूसरे देश को सौंपने से इनकार करने के प्रावधान हैं। इनमें राजनीतिक प्रकृति के अपराध से जुड़े मामले भी शामिल हैं।

हसीना पर बांग्लादेश में 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और मौतों से जुड़े गंभीर आरोप हैं। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार उन्हें वापस लाकर कानूनी कार्रवाई करना चाहती है।

बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने नवंबर 2025 में हसीना और उनके तत्कालीन गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को मौत की सजा सुनाई थी। 15 सितंबर 2026 को हसीना सरकार के कुछ पूर्व सहयोगियों को भी सजा सुनाई गई।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की जांच के मुताबिक, जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन के दौरान करीब 1,400 लोगों की मौत हुई थी।

हसीना ने कहा- दिसंबर में लौटूंगी

हसीना ने 5 अगस्त 2026 को कहा था कि वह दिसंबर तक बांग्लादेश लौटेंगी। CNN-News18 को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वह कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें सुरक्षा, वकील तक पहुंच, अपना बचाव करने का अधिकार, स्वतंत्र न्यायपालिका और निष्पक्ष सुनवाई चाहिए।

उन्होंने BNP के साथ किसी भी बैकचैनल बातचीत से इनकार किया था और कहा था कि भारत अब भी उनका दोस्त है।

बांग्लादेश लंबे समय से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है।

बांग्लादेश लंबे समय से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है।

भारत बोला- बांग्लादेश अपने फैसले खुद ले

शेख हसीना का भारत में रहना दोनों देशों के बीच एक संवेदनशील मुद्दा है। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार भारत से हसीना को वापस भेजने की मांग करती रही है। वह यह भी चाहती है कि हसीना भारत से बांग्लादेश की राजनीति में दखल न दें।

भारत ने कहा है कि बांग्लादेश एक आजाद देश है। उसे यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वह किस देश के साथ कैसे रिश्ते रखेगा।

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