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नई दिल्ली3 मिनट पहले
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चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर मीडिया इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट पर अपना पक्ष रखा है। आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि कई सदस्यों वाले संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय और सुझाव आना सामान्य है।
आयोग ने कहा कि SIR समेत पिछले एक साल में लिए गए सभी अंतिम फैसले सदस्यों की सर्वसम्मति से हुए हैं। दूसरी तरफ, BJP ने भी कहा कि चुनाव आयुक्तों के बीच अलग-अलग राय होना स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी है।
दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। इनमें फॉर्म-6 में बदलाव, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने-हटाने और वोटर डेटा से मुद्दे शामिल थे।

रिपोर्ट के दावे और उस पर चुनाव आयोग का जवाब
1. 14 आपत्तियों पर रिपोर्ट और EC की सफाई
रिपोर्ट: चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में कहा गया कि इनमें से चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गई थीं।
EC का जवाब: चुनाव आयोग ने कहा कि लिखित नोट, टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच-व्यवस्था सामान्य और लगातार चलने वाली प्रक्रिया हैं। इनका मकसद पारदर्शिता, कानूनी अनुपालन और चुनावी प्रक्रिया को मजबूत करना है। आयोग ने कहा कि उसके सभी काम कानून और आयोग के निर्देशों के अनुसार हुए हैं।
2. वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने-हटाने पर सवाल
रिपोर्ट: दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने और दोबारा शामिल करने की प्रक्रिया से भी जुड़ी थीं। पश्चिम बंगाल में वोटर डिलीशन से जुड़ी अपीलों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
EC का जवाब: आयोग ने कहा कि वोटरों के रजिस्ट्रेशन और नाम हटाने का काम इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) और डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर (DEO) जैसे वैधानिक अधिकारी कानून के तहत करते हैं।
3. वोटर डेटाबेस के केंद्रीकरण पर सवाल
रिपोर्ट: संधू और जोशी ने वोटर डेटाबेस तक पहुंच को धीरे-धीरे दिल्ली में केंद्रीकृत किए जाने पर सवाल उठाए। जोशी ने यह सुनिश्चित करने के लिए ऑडिट का सुझाव दिया था कि वोटर रिकॉर्ड में बदलाव केवल अधिकृत अधिकारी ही कर सकें।
EC का जवाब: चुनाव आयोग ने कहा कि उसके ECINet जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं। अनधिकृत बदलाव और छेड़छाड़ रोकने के लिए IT सिक्योरिटी चेक और ऑडिट कंट्रोल लागू हैं।
4. नए वोटरों से जुड़े कदमों को ‘अनधिकृत और गैरकानूनी’ बताने का मामला
रिपोर्ट: इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्तों ने नए वोटरों से जुड़े कुछ कदमों को ‘अनधिकृत और गैरकानूनी’ बताया था।
EC का जवाब: चुनाव आयोग ने कहा कि उसके सभी काम कानून और आयोग के निर्देशों के अनुरूप हुए हैं। आयोग के मुताबिक, ड्राफ्ट स्तर पर उठाए गए ऑपरेशनल सवाल और सुझाव सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
5. Form-6 में बदलाव पर आपत्ति
रिपोर्ट: दोनों चुनाव आयुक्तों ने नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में बदलाव पर आपत्ति जताई थी। विवेक जोशी ने कहा था कि चुनाव नियमों में बदलाव किए बिना Form-6 में इस तरह बदलाव नहीं किया जा सकता। बाद में संधू ने भी इस पर आपत्ति दर्ज की।
EC का जवाब: आयोग की प्रेस रिलीज में Form-6 का सीधे नाम नहीं लिया गया। हालांकि, आयोग ने कहा कि उसके सभी आधिकारिक आदेश और फैसले तय कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं और पिछले एक साल में लिए गए फैसले पूरी आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से हुए हैं।
6. गोवा में 97 वोटरों का मामला
रिपोर्ट: गोवा के एक मामले में 97 ऐसे वोटर, जिन्हें इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स ने पात्र माना था, सॉफ्टवेयर की समस्या के कारण अंतिम वोटर लिस्ट में नहीं जुड़ सके। रिपोर्ट में इसे डेटा सिस्टम के केंद्रीकरण से जुड़ी चिंता के उदाहरण के तौर पर बताया गया।
EC का जवाब: चुनाव आयोग की प्रेस रिलीज में गोवा के इन 97 वोटरों के मामले पर अलग से कोई जवाब नहीं दिया गया।
EC बोला- पिछले एक साल में करीब 40 नई पहल
चुनाव आयोग ने कहा कि पिछले एक साल में उसने करीब 40 नई पहल शुरू कीं और कई चुनावी सुधार किए। इनमें मतदाता सूची के रिवीजन और SIR से जुड़े काम भी शामिल हैं। आयोग के मुताबिक, इन सभी फैसलों को पूरी आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी मिली।
EC ने यह भी कहा कि इस दौरान बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में बड़े चुनाव और चुनाव से जुड़े कई काम किए गए।
BJP बोली- अलग राय लोकतंत्र का हिस्सा
BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने चुनाव आयोग के भीतर अलग-अलग राय सामने आने को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि अगर आयोग के सदस्य आपस में विचार-विमर्श नहीं करेंगे तो विपक्ष उन पर सरकार की हां में हां मिलाने का आरोप लगाएगा।
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर कार्रवाई की मांग की
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस ने विवाद को ‘ज्ञानेशगेट’ नाम दिया। राहुल गांधी ने BJP, RSS और चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया।
TMC प्रमुख ममता बनर्जी ने CEC को हटाने और SIR से पहले वाली वोटर लिस्ट के आधार पर पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव कराने की मांग की। AAP नेता अरविंद केजरीवाल ने भी CEC की गिरफ्तारी की मांग की। ये विपक्षी नेताओं की ओर से लगाए गए आरोप और की गई मांगें हैं।
कानून में क्या प्रावधान है?
CEC और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 के मुताबिक, आयोग का कामकाज जहां तक संभव हो, सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए। अगर सदस्यों की राय अलग हो, तो मामला बहुमत की राय के आधार पर तय किया जाता है।

