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दरभंगा- मुरैठा में महाकवि विद्यापति की मूर्ति का सिर तोड़ा:असामाजिक तत्वों की तलाश में जुटी पुलिस, लोगों ने तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की




दरभंगा के जाले थाना क्षेत्र के मुरैठा गांव स्थित विद्यापति चौक पर मंगलवार की रात अज्ञात असामाजिक तत्वों ने महाकवि विद्यापति की प्रतिमा का सिर तोड़ दिया। बुधवार की सुबह लोगों की नजर प्रतिमा पर पड़ी तो मस्तक क्षतिग्रस्त था। घटनास्थल पर ईंट भी पड़ी मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रथमदृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि ईंट से प्रहार कर प्रतिमा का सिर तोड़ा गया है। हालांकि घटना को किसने और किस समय अंजाम दिया, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण विद्यापति चौक पर जुट गए। लोगों ने इसे बेहद दुखद और निंदनीय घटना बताते हुए पुलिस से मामले की गंभीरता से जांच कर दोषी को गिरफ्तार करने की मांग की। ग्रामीणों ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के लिए डॉग स्क्वायड टीम बुलाने की भी मांग की है। स्थानीय लोगों के अनुसार मंगलवार रात करीब 10 बजे तक विद्यापति की प्रतिमा पूरी तरह सुरक्षित थी। इसके बाद सुबह प्रतिमा का सिर टूटा मिला। एक ग्रामीण ने बताया कि सुबह जब लोग घरों से निकलकर चौक पहुंचे तो प्रतिमा क्षतिग्रस्त देखकर इसकी सूचना पुलिस को दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि घटना देर रात या तड़के उस समय की गई होगी, जब चौक पर कोई मौजूद नहीं था। ग्रामीणों ने कहा- किसी समुदाय पर नहीं लगाया जाए आरोप घटना के बाद ग्रामीणों ने सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की। गांव के बुजुर्गों ने कहा कि मुरैठा में सभी समुदाय के लोग आपसी भाईचारे के साथ रहते हैं। किसी समुदाय विशेष पर बिना जांच आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि दोषी कोई भी हो, निष्पक्ष जांच के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। गांव के मोहम्मद अंसार ने बताया कि वह मंगलवार रात करीब 10 बजे वहां से घर गए थे, तब प्रतिमा बिल्कुल ठीक थी। बुधवार सुबह करीब 4:30 बजे नमाज के लिए जाते समय भी उन्हें घटना की जानकारी नहीं थी। बाद में पता चला कि विद्यापति जी की प्रतिमा का सिर तोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को जांच कर यह पता लगाना चाहिए कि घटना को किसने अंजाम दिया और दोषी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। ग्रामीण ललित कुमार मिश्रा ने कहा कि महाकवि विद्यापति मिथिला की महान विभूति हैं और उनका नाम पूरी दुनिया में जाना जाता है। उनकी प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करना गंभीर और दुखद घटना है। मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी तक पहुंचना चाहिए। वहीं गोपाल मिश्रा ने कहा कि घटना बेहद गलत है। उन्होंने आशंका जताई कि किसी नशेड़ी व्यक्ति ने नशे की हालत में घटना को अंजाम दिया हो सकता है। उन्होंने पुलिस से आसपास के लोगों और घटनास्थल पर मिले साक्ष्यों के आधार पर जांच करने की मांग की। विद्यापति मिथिला की साहित्यिक पहचान के प्रमुख प्रतीक महाकवि विद्यापति (लगभग 14वीं–15वीं शताब्दी) मैथिली और संस्कृत के महान कवि, संगीतकार, लेखक, दरबारी और राजपुरोहित थे। उन्हें ‘मैथिल कवि कोकिल’ के नाम से जाना जाता है। उनकी रचनाओं में प्रेम, भक्ति, शृंगार और आध्यात्मिक भावों का सुंदर समन्वय मिलता है। वे भगवान शिव के उपासक थे और उनकी रचनाओं में प्रेम, भक्ति तथा आध्यात्मिक भावों की प्रमुखता मिलती है।मैथिली साहित्य और मिथिला की सांस्कृतिक परंपरा पर उनका गहरा प्रभाव माना जाता है। विद्यापति का संबंध वर्तमान मधुबनी जिले के बिस्फी में हुआ था।वे तिरहुत और मिथिला के तत्कालीन राजदरबारों से जुड़े रहे। ओइनवार वंश के शासकों के संरक्षण में उन्होंने कई महत्वपूर्ण रचनाएं कीं।उनकी चर्चित कृतियों में ‘कीर्तिलता’ और ‘कीर्तिपताका’ शामिल हैं। उन्होंने मैथिली के साथ संस्कृत में भी साहित्य की रचना की। उनकी प्रेम और भक्ति से जुड़ी पदावली आज भी मिथिला के लोकजीवन और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भगवान शिव के भक्त माने जाते थे महाकवि विद्यापति विद्यापति भगवान शिव के अनन्य भक्त माने जाते हैं। मिथिला में उनसे जुड़ी ‘उगना’ की कथा अत्यंत लोकप्रिय है। लोकमान्यता के अनुसार उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव स्वयं ‘उगना’ नामक सेवक का रूप धारण कर उनके साथ रहने लगे थे। एक बार रास्ते में विद्यापति को तेज प्यास लगी। कथा के अनुसार उगना ने अपनी जटाओं से गंगाजल निकालकर उन्हें पिलाया। इसके बाद विद्यापति को उगना के वास्तविक स्वरूप का आभास हुआ। लोककथा के अनुसार भगवान शिव ने विद्यापति से अपना रहस्य किसी को नहीं बताने की शर्त रखी थी। बाद में एक प्रसंग में विद्यापति की पत्नी ने उगना को क्रोध में जलती लकड़ी से मारने का प्रयास किया। विद्यापति ने उगना को बचाते हुए उन्हें ‘भगवान शिव’ कहकर पुकार दिया। वचन टूटने के कारण उगना अंतर्ध्यान हो गए। मिथिला में यह कथा आज भी विद्यापति की शिवभक्ति और भगवान शिव के प्रति उनकी आस्था के प्रतीक के रूप में सुनाई जाती है। ऐसे में विद्यापति की प्रतिमा क्षतिग्रस्त किए जाने की घटना से स्थानीय लोगों में विशेष आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रतिमा का सम्मानपूर्वक जीर्णोद्धार कराने तथा विद्यापति चौक पर पर्याप्त रोशनी और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।



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