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17 मिनट पहले
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‘स्कूल के लिए आवाज उठाने पर मेरे पापा को मार डाला। अफसोस है कि मैं उन्हें कभी गले नहीं लगा पाया, प्यार नहीं जता पाया। पापा ने सिखाया है, इसलिए अब हम स्कूलों की हालत सुधारकर रहेंगे। जहां अन्याय होगा, वहां अब्दुल खड़ा मिलेगा।’
25 साल के शेख अब्दुल हाफिज पिता को याद कर भावुक हो जाते हैं। आरोप है कि गांव के सरकारी स्कूल की हालत दिखाने पर भड़के BJP कार्यकर्ताओं ने अब्दुल और उनके पिता शेख मोहम्मद मफीक से मारपीट की। गंभीर चोटों के चलते 15 अगस्त को मफीक की मौत हो गई।
मामले में अब तक 11 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। अब्दुल कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) के सदस्य हैं और पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के करीशुंडा गांव में रहते हैं। आरोपी भी इसी गांव के हैं। घटना के बाद गांव में डर का माहौल है। ज्यादातर आरोपियों के घरों पर ताले हैं और उनके परिवार गांव छोड़ चुके हैं।

कीचड़भरे रास्ते से रिपोर्टिंग करने पहुंची भास्कर टीम।
अब्दुल का परिवार अब किस हालत में है? गांव के जिस सरकारी स्कूल से विवाद शुरू हुआ, उसकी क्या हालत है? और BJP का आरोपों पर क्या कहना है? यही जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ग्राउंड जीरो पर अब्दुल के गांव पहुंची।
सबसे पहले अब्दुल की बात
घटना के बाद 17 अगस्त को अब्दुल से मिलने CJP लीडर आशुतोष रांका भी गांव पहुंचे थे। अब्दुल का गांव करीशुंदा कोलकाता से लगभग 150 किलोमीटर दूर बांकुरा जिले में पड़ता है। गांव में अब्दुल के घर पहुंचने के लिए सड़क नहीं है। रास्ता कीचड़ से भरा हुआ है। पूरी बरसात यहां ऐसे ही हालात रहते हैं। गांव में पहुंचते ही हमें सबसे पहले भारी पुलिसबल दिखा।

आशुतोष रांका ने 18 अगस्त को कार्यकर्ता शेख अब्दुल हफीज के घर जाकर उनके परिवार से मुलाकात की थी।
अब्दुल के घर पर सुरक्षा के लिए पुलिस की तैनाती
अब्दुल के घर के बाहर भी 2 पुरुष पुलिसकर्मी और एक महिला पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। सुरक्षा कारणों से बिना एंट्री कराए और पुलिस से इजाजत लिए अब्दुल के घर नहीं जाने दिया जाता है। अब्दुल के घर में उनकी मां और 21 साल की बहन हैं, इसके अलावा दिल्ली से पहुंचे 12 CJP कार्यकर्ता भी रुके हुए हैं।

अब्दुल के घर के बाहर 3 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
पिता का जिक्र हुआ तो मां ने बच्चों को गले लगाया
घर वाले अब्दुल को रीक नाम से बुलाते हैं। बिना प्लास्टर वाले दो कमरे के घर में अब्दुल अपने पिता, मां और बहन के साथ रहते थे। बहन इसी साल नौकरी के लिए बाहर चली गई। अब पिता के जाने के बाद अब्दुल और उनकी मां ही घर में बचे हैं।
पिता के बारे में जिक्र होने पर ही अब्दुल की मां दोनों बच्चों को गले लगा लेती हैं। दोनों बच्चे भावुक हो जाते हैं, लेकिन मां अपने भाव चेहरे पर नहीं आने देती हैं। पिता थोक का सामान दुकानों पर पहुंचाते थे, उनकी कमाई से ही घर चलता था। अब्दुल अभी कोई रोजगार नहीं करते हैं। हालांकि कुछ समय कोलकाता में रहकर डिलीवरी बॉय का काम किया है।

बिना प्लास्टर वाले दो कमरे के घर में अब्दुल के घर में तिरंगा भी लगा हुआ दिखा।
जंतर-मंतर से लौटने पर भी मारपीट हुई
अब्दुल बताते हैं कि वे शुरूआत से ही CJP के आंदोलन से जुड़े हुए हैं। जंतर-मंतर पर हुए CJP प्रोटेस्ट में भी वे पहुंचे थे। 26 जुलाई तक वे प्रोटेस्ट में थे, 27 को ट्रेन पकड़कर घर वापस आए। इसके बाद गांव के कुछ लोग इसे लेकर नाखुश थे।
वे आरोप लगाते हैं कि गांव के कुछ BJP वालों ने मम्मी को फोन करके डराया कि आपका बेटा ‘पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन’ के साथ जुड़ा हुआ है और पाकिस्तान से लेनदेन करता है। मम्मी ने उन्हें समझाया कि वह ऐसा कुछ नहीं करता। अब्दुल बताते हैं कि 28 जुलाई के आस-पास सबसे पहले उनके साथ मारपीट की गई।
वे आगे बताते हैं, ‘बीजेपी कार्यकर्ताओं ने मुझे घेरा और धक्का-मुक्की करने लगे। उन्होंने कहा- तू दिल्ली गया था? फिर वो मेरी स्कूटी तोड़ने और मुझे मारने की धमकी देने लगे। गांव वालों ने बीच-बचाव किया और उन्हें शांत किया। इसके बाद मेरा पुराना फोन छीन लिया गया, जिसमें बहुत सारे सबूत थे।’
अब्दुल पुलिस पर आरोप लगाते हैं कि पहली बार मारपीट की शिकायत को लेकर वे इंडस पुलिस स्टेशन भी गए, लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। 13 अगस्त वाले दिन भी यही आरोपी थे, जिन्होंने परिवार पर हमला किया।

अब्दुल ने बताया कि कुछ BJP वालों ने मम्मी को फोन करके डराया कि आपका बेटा ‘पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन’ के साथ जुड़ा हुआ है, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है।
‘आरोपी बीजेपी के कार्यकर्ता, स्कूल के हालात दिखाने पर भड़के’
अब्दुल बताते हैं कि ‘स्कूल ठीक करो’ आंदोलन के चलते 13 अगस्त की सुबह वे अपने पुराने प्राइमरी स्कूल पहुंचे थे। यहां टीचर्स के प्रभारी काशीनाथ दे से स्कूल की समस्याओं को दिखाने के लिए परमिशन मांगी। उन्होंने अब्दुल का नाम और पता पूछ लिया।
अब्दुल आरोप लगाते हैं;-
उसी दिन रात 8 बजे बीजेपी के गुंडे घर आ गए। लाइट कट गई और उन्होंने अंधेरे में मुझे थप्पड़, लात और घूंसे मारना शुरू कर दिया। एक आदमी तेज धार वाला सलिया लेकर आया, लेकिन अंधेरे में मैं बच गया। पापा को भी बहुत बुरी तरह पीटा। हमने बचकर पुलिस बुलाई लेकिन वे पुलिस के सामने भी नहीं माने।
अब्दुल आगे बताते हैं कि पिता को ज्यादा चोटें आईं थीं। अस्पताल में भी आरोपियों ने पिता के साथ मारपीट की। पुलिस के सामने ही मारने की धमकी दी। फिर 14 अगस्त को सुबह 10-11 बजे के बीच तीन गुंडे घर आकर समझौते के लिए दवाब बनाने लगे। वे चाहते थे कि हम फेसबुक पर लाइव आकर माफी मांगें। लेकिन हमने झुकने से मना कर दिया।
अब्दुल बोले- 15 अगस्त को देश आजादी का जश्न मना रहा था, हम मातम
अब्दुल 15 अगस्त के घटनाक्रम को याद कर भावुक हो जाते हैं। वे बताते हैं कि 14 अगस्त को हालात देखते हुए खुद गांव छोड़कर कोलकाता चले गए, पिता और मां ने साथ आने से मना कर दिया। 15 अगस्त की सुबह पापा की हालत बिगड़ तो मां कुछ गांववालों के साथ उन्हें हॉस्पिटल ले गईं।
‘रास्ते में करीब 2-2:30 बजे पापा ने मेरी मम्मी का हाथ पकड़ा और बंगाली में बोले- ‘रुनू, आमी मने होय आर बांचबो ना, आमाके माफ कोरे दिश’ (रुनू, मुझे लगता है मैं अब और नहीं बचूंगा, मुझे माफ कर देना)। उन्होंने कहा कि मैं अब कुछ नहीं कर सकता। और मेरे पापा चले गए।’
अब्दुल का पुलिस पर आरोप है कि पहले उनकी FIR तक नहीं लिखी गई। 16 अगस्त को जब घटना वायरल हुई, तब FIR हुई है। अब अब्दुल की मांग है कि उन्हें किसी तरह का मुआवजा नहीं चाहिए, बस उनके पिता के नाम से राज्य सरकार एक विश्वस्तरीय स्कूल बनवाए।
अब सरकारी स्कूल का हाल अब्दुल का आरोप है कि घटना के बाद सरकारी स्कूल में पुताई से लेकर मरम्मत का काम आनन-फानन में कराया गया है। अब्दुल के घर से 200 मीटर की दूरी पर ही करीशुंदा का प्राइमरी स्कूल है। हम खुद स्कूल पहुंचे। यहां दीवारों पर पेंट नया ही दिख रहा था।
ग्रामीणों ने कैमरे पर न बोलने की शर्त पर बताया कि सकूल में कुछ दिनों पहले ही पेंट कराया गया है। पहले सीलिंग से पानी गिरता था। स्कूल के बच्चों ने भी हमें बताया कि प्लास्तर भी हाल ही में हुआ है। स्कूल के अंदर भी पुताई की खुशबू आ रही थी। जमीन पर भी पुताई के बाद के निखान थे।
6 कमरों और 2 टॉयलेट के अलावा स्कूल में एक स्मार्टक्लास वाला मॉनिटर भी लगा था। स्कूल में आनंद मंडल, अभिजीत दलाई, चांदीचरण घोषाल शिक्षक हैं और काशीनाथ दे शिक्षकों के प्रभारी हैं। मिड डे मील बनाने के लिए 4 महिलाएं भी स्कूल में आती हैं।
हमें शिक्षक आनंद मंडल ने बताया कि प्रशासन के आदेश हैं कि स्कूल का कोई भी शिक्षक मीडिया से बात नहीं करेगा। हालांकि उन्होंने दावा किया कि स्कूल की मरम्मत 8 से 10 महीने पहले ही की गई थी।
शिक्षकों के प्रभारी काशीनाथ दे घटना के बाद कुछ दिनों तक छुट्टी पर चले गए थे। वे 20 अगस्त से ही वापस स्कूल आए हैं। वे दावा हैं कि अब्दुल और उनकी बहन भी यहीं से पढ़े हैं। अब्दुल 13 अगस्त को स्कूल में बहन के किसी कागज के काम से आया था। मारपीट के आरोपियों को अब्दुल की खबर देने के आरोपों पर काशीनाथ कहते हैं कि स्कूल से किसी ने कोई बाहर के व्यक्ति को अब्दुल के बारे में नहीं बताया।

घटना के बाद सरकारी स्कूल में पुताई से लेकर मरम्मत का काम आनन-फानन में कराया गया है।
अब्दुल के घर रुके CJP कार्यकर्ता बोले- वो अकेला नहीं, हम साथ हैं
अब्दुल के घर पुलिस के अलावा 12 CJP कार्यकर्ता भी रुके हैं। आशुतोष रांका भी अब्दुल के घर गए थे। उन्होंने बीजेपी विधायक निर्मल कुमार धारा और उनके सहयोगियों पर हत्या का आरोप लगाया है। हमने अब्दुल के घर रुके CJP वालों से बात की।
इन्हीं में से एक निसार आलम बताते हैं कि 17 अगस्त को CJP के 22-23 कार्यकर्ता यहां आए थे। फिलहाल काफी लोग यहां रुके हैं। जुनैद भाई भी यहीं रुके हैं और खाने-पीने का पूरा इंतजाम देख रहे हैं। हमारी लीडरशिप ने सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया है। अगर ये 27 अगस्त तक हमारी मांगें मान लेते हैं तो ठीक है, वरना हम डटे रहेंगे।
जंतर-मंतर पर खाना लेकर पहुंचने वाले जुनैद भी अब्दुल के घर ही रुके हैं। जुनैद के खिलाफ जंतर-मंतर के बाद FIR होने पर काफी विवाद हुआ था। जुनैद कहते हैं कि अब्दुल या उसके पिता की क्या गलती थी? वह सिर्फ अपने उस स्कूल में, जहां वह पढ़ा था, वहां की बातों को दिखाने और दूसरों को बताने के लिए परमिशन लेने गया था। अगर देश की पाठशालाएं ही सही नहीं होंगी तो देश कैसे आगे बढ़ेगा।
आरोपियों के घरों पर ताले लटक रहे
FIR में मुख्य रूप से 5 लोगों को नामजद किया गया था, जिनमें शेख आजाद, श्रीकांत माझी, रोहित माझी, अष्टम माझी और प्रशांत माझी (रुइदास) शामिल हैं। इसके अलावा, FIR में 8 से 10 अन्य अज्ञात लोगों का भी जिक्र है, जिन पर घर में घुसकर हमला करने का आरोप है।
अभी तक पुलिस ने 11 लोगों को अरेस्ट किया है। गांव में लोग इस केस पर बात करने से बचते हैं। हमें कुछ लोगों से बात करने पर दो आरोपियों के घर मिले। शेख आजाद और पिंटू माझी के घर हम पहुंचे। दोनों के घरों पर ताले लटक रहे थे। पड़ोसियों ने बताया कि इसके परिवार 17 अगस्त के आसपास गांव से चले गए।
फिलहाल इस केस की जांच इंडस थाने के SI अयान चंद महतो कर रहे हैं। इसे थाने के SI अरुप घोष ने हमें बताया कि FIR में नामजद सभी 5 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। असल में शिकायत लेकर कोई थाने नहीं आया था, बल्कि 13 तारीख की रात घटना की जानकारी मिलने पर मैंने खुद कॉल किया था। इसके बाद से ही लगातार सुरक्षाकर्मियों की अब्दुल के घर के बाहर 24 घंटे शिफ्ट में ड्यूटी चल रही है।

बांकुरा के DM बोले- सरकारी स्कूल को लेकर कोई शिकायत नहीं
गांव के हालातों पर हमने बांकुरा के डीएम अनिल दास गुप्ता से भी बात की। उन्होंने बताया कि गांव में सरकारी स्कूल को लेकर कोई बड़ी समस्या नहीं है। वहां का इंफ्रास्ट्रक्चर अच्छा है। स्कूल में 150 के करीब बच्चे और चार शिक्षक हैं। वहां पहले से ही दो टॉयलेट हैं और लड़कियों के टॉयलेट के लिए टेंडर भी पास हो चुका है, जिस पर काम चल रहा है। इसके अलावा, स्कूल में स्मार्ट क्लासरूम भी बनाए जा रहे हैं।
सुरक्षा को लेकर DM अनिल ने बताया कि आने वाले समय में वहां किसी तरह की हिंसा या अशांति न हो, इसके लिए हम लोग सभी के संपर्क में हैं। हमारे बीडीओ (BDO) और ओसी (OC) लगातार वहां के लोगों के साथ बातचीत कर रहे हैं। मैं खुद भी एसपी साहब के साथ इस मामले पर लगातार बात कर रहा हूं।
BJP विधायक निर्मल धारा के साथ आरोपियों की फोटो वायरल

2021 से यहां विधायक बीजेपी के निर्मल धारा ही हैं। (फाइल फोटो)
करीशुंदा गांव इंडस विधानसभा में आता हैं। 2021 से यहां विधायक बीजेपी के निर्मल धारा ही हैं। वे जब 2025 विधानसभा चुनावों में गांव में आए थे। तो उनके स्वागत और बीजेपी के कार्यक्रम में आरोपी शेख आजाद और प्रशांत माझी शामिल थे। इसके अलावा भी बाकी आरोपी विधायक निर्मल धारा के करीबी ही बताए जाते हैं। हालांकि, घटना के बाद से निर्मल धारा चुप्पी साधे हुए हैं। हमने उनसे बात करने के लिए कॉल किया। इसका उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया। इसके बाद हमने उन्हें मैसेज किया है। लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।

