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Bangladesh Mecca Defence Pact Strategy; India Vs Islamic NATO | Pakistan Saudi Turkey


18 दिन पहले सऊदी, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच मक्का में एक डिफेंस एग्रीमेंट हुआ। इसमें NATO की तरह करार है कि तीनों में से किसी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। अब इसमें कुछ और इस्लामिक देशों के शामिल होने की अटकलें लग रही हैं। इनमें सबसे बड़ा

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क्या वाकई ‘इस्लामिक NATO’ जॉइन करेगा बांग्लादेश, ये भारत के लिए कितना बड़ा खतरा और सरकार कैसे काउंटर करेगी; आज के एक्सप्लेनर में जानेंगे…

सवाल-1: मक्का एग्रीमेंट में बांग्लादेश के शामिल होने की चर्चा क्यों उठी?

जवाबः कोई औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन बांग्लादेश के दो मंत्रियों ने बयानों से चर्चा शुरू हुई…

  • बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर 21 अगस्त को बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री बने। उसी रोज उन्होंने कहा, ‘सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के फ्रेमवर्क में शामिल होने को लेकर बांग्लादेश का रुख पॉजिटिव है। ये फैसला बांग्लादेश अपने हितों को ध्यान में रखकर लेगा।’
  • 21 अगस्त को ही दूसरी विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने भी कहा, ‘हमारा किसी भी पैक्ट में शामिल होना इस बात से तय होगा कि इससे बांग्लादेश के हित सुरक्षित रहेंगे या नहीं।
  • हुमायूं कबीर ने कहा, ‘बांग्लादेश की अब अपनी पहचान है। मिडिल ईस्ट और इसके हिस्सेदार इस्लामिक देश बांग्लादेश की लीडरशिप को मक्का पैक्ट में शामिल होने का न्योता दे रहे हैं।
  • हुमायूं कबीर ने ये भी बताया कि पीएम तारिक रहमान को सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने राजधानी रियाद आने का न्योता दिया है।

सवाल-2: तो बांग्लादेश मक्का पैक्ट में शामिल होगा या नहीं?

जवाब: सीनियर डिफेंस जर्नलिस्ट मनोज जोशी कहते हैं, ‘अगर ये सुन्नी देशों के बीच का पैक्ट है, तो बांग्लादेश भी इसमें शामिल हो सकता है। अगर इसका मकसद मिडिल ईस्ट की रीजनल सिक्योरिटी है, तो इसमें बांग्लादेश की कोई खास अहमियत नहीं है।’

स्ट्रैटेजिक एनालिस्ट ब्रह्म चेलानी भी कहते हैं, ‘ये पैक्ट 4 सुन्नी देशों का गठबंधन बन सकता है। सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी, BNP के इस्लामिक ताकतों के साथ गहरे रिश्ते रहे हैं। रहमान की विदेश नीति उनकी पार्टी की उसी पुरानी स्ट्रैटेजी की तरफ जाती दिख रही है।’

दरअसल, बांग्लादेश में इस वक्त BNP की सरकार है, जो अपने कट्टर सुन्नी इस्लामिक रुख के लिए जानी जाती है। बीते कुछ समय से ये कट्टर रुख बढ़ रहा है, इसके कुछ संकेत हैं…

  • हुमायूं कबीर ने समझौते के बारे में बयान देते हुए कहा कि मक्का बांग्लादेश के लोगों के दिल में बसा हुआ है।
  • बांग्लादेश के मौजूदा सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान ने मई 2026 में हज से लौटने के बाद दाढ़ी बढ़ा ली है। वो इस्लामिक संदेश देते हैं।
  • वाकर-उज-जमान ने सेना की चार यूनिट्स के नाम इस्लाम के 4 खलीफाओं के नाम पर रखे हैं।

पैक्ट में शामिल होने से बांग्लादेश को सऊदी अरब से विदेशी रोजगार, निवेश और तेल मिल सकता है। तुर्किये से डिफेंस टेक्नोलॉजी, हथियार और ट्रेनिंग मिल सकती है। पाकिस्तान इस्लामी मंचों पर राजनीतिक समर्थन दे सकता है।

हालांकि बांग्लादेश के पूर्व राजनयिक एम शाहिदुल इस्लाम लिखते हैं, ‘बांग्लादेश को अपने फैसले दूसरों को खुश करने के लिए नहीं लेने चाहिए। मक्का पैक्ट की लागत बहुत ज्यादा है, लेकिन फायदा स्पष्ट नहीं है। समझौते में शामिल दूसरे देश बांग्लादेश जैसे छोटे देश पर दबाव भी बना सकते हैं। बांग्लादेश को पूछना होगा कि क्या उसे भारत-पाकिस्तान या ईरान-सऊदी के संघर्ष से दूर रहने की आजादी होगी।’

सवाल-3: अगर बांग्लादेश मक्का-पैक्ट में शामिल हुआ, तो भारत के लिए क्या खतरा?

जवाब: दो बड़े खतरे हैं…

1. साउथ एशिया में भारत का प्रभाव, सिक्योरिटी, आर्थिक रिश्तों पर असर

  • ब्रह्म चेलानी कहते हैं, ‘पैक्ट में बांग्लादेश के शामिल होने से अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और भूमध्य सागर के इलाके में सिक्योरिटी से जुड़ा पूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर बदलेगा ।’
  • बांग्लादेश से भी भारत के राजनयिक और आर्थिक रिश्ते बदल जाएंगे।’
  • भारत की घेराबंदी बढ़ सकती है, क्योंकि तारिक रहमान चीन से भी रिश्ते बढ़ा रहे हैं। जून में चीन दौरे पर उन्होंने चीन को ‘सबसे कीमती और भरोसेमंद पार्टनर’ कहा था।
  • मक्का पैक्ट से पाकिस्तान-अमेरिका के रिश्ते भी बेहतर होंगे, क्योंकि ट्रम्प, इसको खिलाफ ईरान के खिलाफ बनने वाला गठबंधन मान रहे हैं और वो इसके समर्थन में हैं। इससे साउथ एशिया में भारत के लिए पाकिस्तान की चुनौती बढ़ेगी।’
  • तुर्किये भी यूरोप, मिडिल ईस्ट से लेकर साउथ एशिया तक भारत के मुकाबले प्रभाव बढ़ाना चाहता है। तुर्किये एशिया और यूरोप के बीच लैंड-ब्रिज का काम करता है।
  • भारत के ज्यादातर इस्लामिक देशों के साथ आर्थिक रिश्ते हैं। सऊदी अरब और UAE भारत के टॉप-5 ट्रेड पार्टनर्स में हैं। अब इन व्यापारिक रिश्तों पर असर पड़ सकता है।
पीएम नरेंद्र मोदी 15 मई को UAE की यात्रा पर गए थे। राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ उनकी मुलाकात की तस्वीर।

पीएम नरेंद्र मोदी 15 मई को UAE की यात्रा पर गए थे। राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ उनकी मुलाकात की तस्वीर।

2. पाकिस्तान से जंग हुई, तो मुश्किल बढ़ेगी

  • बांग्लादेश शामिल हुआ, तो सऊदी-पाकिस्तान-तुर्किये को साउथ एशिया में मजबूत पकड़ मिल जाएगी। इनकी पहुंच भारत के पूर्व तक हो जाएगी।
  • मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, तुर्किये ने पाकिस्तान को सैन्य मदद- खास तौर पर एडवांस्ड ड्रोन दिए और पाक के समर्थन में बयान भी दिए।
  • ब्रह्म चेलानी के मुताबिक, ‘पैक्ट के चलते आगे कोई जंग हो, तो भारत के लिए जवाबी कार्रवाई मुश्किल हो जाएगी। भारत, पाकिस्तान में कोई एक्शन ले, तो पाकिस्तान, भारत के खिलाफ ये पैक्ट लागू कर सकता है।’
  • ‘सऊदी का पैसा, तुर्किये की डिफेंस टेक्नोलॉजी, पाकिस्तान और बांग्लादेश की स्ट्रैटेजिक पोजिशन से चौतरफा इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार होता है। इससे उनको डिफेंस रिसर्च, खुफिया जानकारी शेयर करने में भी मदद आएगी।’
  • भारत से टकराव होने पर पाकिस्तान बांग्लादेशी सैन्य ठिकानों का भी इस्तेमाल कर सकता है।

सवाल-4: भारत इसे कैसे काउंटर करेगा?

जवाब: भारत को घेरने का इरादा तो दिखता है, लेकिन लंबे समय तक भारत जैसी इकॉनोमिक पावर का विरोध करना मुमकिन नहीं है। भारत 2 तरह की तैयारी कर सकता है…

1. सऊदी, तुर्किये जैसे देशों से रिश्ते बेहतर करना

  • भारत के पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुनायत कहते हैं, ‘हमें दूसरे देशों से आउटरीच पर जोर देना होगा। सऊदी से हमारे रिश्ते बहुत अच्छे हैं और हम तुर्किये से भी अच्छे रिश्ते बना सकते हैं।’
  • भारत ग्रीस और साइप्रस के साथ पार्टनरशिप बढ़ा रहा है, जिनसे तुर्किये का पुराना विवाद है।
  • डॉ. राजन कुमार कहते हैं, ‘मुस्लिम से भारत के अच्छे संबंध रहे हैं। भारत चाहेगा कि उसके करीबी इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देश, इस पैक्ट में न जाएं। इसके लिए कोशिश करनी चाहिए।’

2. अहम समुद्री रूट्स पर नेवी को मजबूत करना

  • सऊदी-पाकिस्तान, तुर्किये और बांग्लादेश अहम समुद्री रूट्स पर मौजूद हैं।
  • होर्मुज की तरह बॉस्फोरस और डार्डेनेल्स दो स्ट्रेट हैं, इन्हें तुर्किये स्ट्रेट कहते हैं। ये काला सागर से भूमध्य सागर जाने का इकलौता रास्ता है। तुर्किये का इन पर कंट्रोल है।
  • लाल सागर के किनारे बसा सऊदी अरब बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के नजदीक है। इस स्ट्रेट के रास्ते से दुनिया का करीब 10% समुद्री व्यापार है। सऊदी का एक तट पर्शियन गल्फ में भी है।
  • वहीं अरब सागर से पाकिस्तान की करीब एक हजार किमी लंबी कोस्टलाइन मिलती है। ग्वादर और कराची पोर्ट पाकिस्तान के अहम समुद्री ट्रेड स्पॉट हैं। जबकि बंगाल की खाड़ी, भारत के पूर्वी किनारे पर मौजूद है।
  • ब्रह्म चेलानी कहते हैं, ‘इन देशों की इस मजबूत मरीन पोजीशन को काउंटर करने के लिए हिंद महासागर में नेवी बढ़ाने पर काम करना होगा।’

3. मक्का पैक्ट का उद्देश्य साफ नहीं, भारत को कड़ी नजर रखनी चाहिए

  • मनोज जोशी कहते हैं, ‘मक्का पैक्ट का असली गोल ही क्लियर नहीं है। क्या इसका निशाना ईरान है या अमेरिका है? बांग्लादेश खुद 3 तरफ से भारत से घिरा हुआ है। इसलिए फिलहाल भारत के लिए बेहतर है कि वह सिर्फ स्थिति पर नजर बनाए रखे।’
  • बांग्लादेश के सवाल पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी कहा, ‘हम पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल मैं बस इतना ही कहूंगा।’

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