Headlines

'स्कूल-कॉलेज कोई जेल नहीं है, जहां सरकार पुलिस तैनात करे':छात्राएं बोलीं- CM का ऐलान एक मजाक; रिपोर्ट में दावा- हर साल 1700 लड़कियों से रेप




15 अगस्त 2026; मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पहले ये बयान पढ़िए- “सरकार महिलाओं के लिए लगातार काम कर रही है। देश में सबसे अधिक महिला पुलिस बल बिहार में है। बिहार के स्कूल-कॉलेजों में ‘पुलिस दीदी’ की तैनाती की जाएगी। इसकी शुरुआत रक्षाबंधन से होगी। पुलिस दीदी छात्रों की सुरक्षा के लिए स्कूटी के साथ तैनात रहेंगी।” सरकार के अनुसार, बिहार में कुल 2,500 टीमें बनाई जानी हैं। फिलहाल 1,005 टीमें काम कर रही हैं। ‘पुलिस दीदी’ स्कूल-कॉलेज के समय और हॉटस्पॉट वाले बाजारों में भीड़भाड़ के हिसाब से तैनात की जाएंगी। सरकार के इस फैसले के बाद पटना के कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राओं के बीच भी चर्चा शुरू हो गई। कुछ छात्राओं ने मुख्यमंत्री के फैसले पर खुशी जताई, तो कुछ ने इसे 50-50 का फैसला बताया। कुछ छात्राओं का कहना है कि मुख्यमंत्री का यह ऐलान अपने आप में एक मजाक है। एक छात्रा ने कहा, “स्कूल-कॉलेज कोई जेल नहीं है, जहां सरकार पुलिस या सिक्योरिटी गार्ड तैनात करे। सरकार को सबसे पहले रेप पीड़िताओं को इंसाफ दिलाने पर ध्यान देना चाहिए।” बता दें, बिहार पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में हर साल 1,300 से ज्यादा बालिग लड़कियों के साथ रेप के मामले दर्ज होते हैं। वहीं, एक साल में 1,700 से ज्यादा नाबालिग लड़कियों के साथ रेप के मामले सामने आते हैं। पढ़िए मुख्यमंत्री के फैसले पर पटना की छात्राओं ने क्या कुछ कहा… सबसे पहले रेप विक्टिम को इंसाफ दिलाए सरकार पटना के एक कॉलेज में ग्रेजुएशन कर रहीं छात्रा अंजलि ने सीएम सम्राट के इस फैसले को 50-50 बताया। छात्रा ने कहा, “सीएम का यह फैसला सही है, लेकिन मुझे लगता है कि इन सब चीजों पर ध्यान देने से ज्यादा जरूरी है कि पहले रेप पीड़िताओं को इंसाफ दिलाया जाए। हाल ही में नीट छात्रा के साथ जो घटना हुई, उसके आरोपी को अभी तक पकड़ा नहीं गया है। उस आरोपी को पकड़ने की जगह उसे बचाया जा रहा है। ऐसा क्यों हो रहा है, इसका उनके पास कोई जवाब नहीं है। मुख्यमंत्री को पुलिस दीदी की तैनाती वहां करनी चाहिए, जहां छेड़खानी और रेप जैसी घटनाएं ज्यादा होती हैं। मुख्यमंत्री को अपने फैसले पर गौर करना चाहिए।” वहीं, सुनीता कुमारी ने कहा, कॉलेज में पुलिस की तैनाती हो या न हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। कोई मामला होता है तो पुलिस समय पर पहुंचती नहीं है। फिलहाल हमारे कैंपस में पुलिस रहती है, लेकिन इसका कोई फायदा देखने को नहीं मिला है। सरकार को सुरक्षा को लेकर कुछ और कदम उठाने चाहिए। मुख्यमंत्री का यह फैसला छात्राओं के लिए अच्छा डिसीजन छात्रा खुशी ने मुख्यमंत्री के इस फैसले को अच्छा बताया है। खुशी ने कहा, “मुख्यमंत्री ने जो फैसला लिया है, वह लड़कियों के लिए बहुत अच्छा डिसीजन है। कॉलेज आने-जाने के दौरान कई लड़कियों को गलत कमेंट सुनने पड़ते हैं। कुछ लड़कियां बोल्ड होती हैं, जो तुरंत जवाब दे देती हैं, लेकिन कई लड़कियां किसी लफड़े में नहीं पड़ना चाहतीं, इसलिए चुप रह जाती हैं। लड़कियां खुद कुछ नहीं बोलेंगी, लेकिन पुलिस दीदी के जरिए कार्रवाई करवाने की हिम्मत दिखा सकती हैं।” सम्राट चौधरी का यह अनाउंसमेंट अपने आप में एक मजाक प्रीति पासवान ने कहा, “सम्राट चौधरी का यह अनाउंसमेंट अपने आप में एक मजाक है। ऐसा इसलिए, क्योंकि कॉलेज में हर चीज के लिए अपना सेल और थाना है। सरकार के हर अनाउंसमेंट के पीछे कोई न कोई कारण होता है। इसके पीछे मुझे यही लग रहा है कि छात्र आंदोलनों पर निगरानी रखकर पुलिस के जरिए सरकार को सूचित किया जाएगा। इससे छात्रों पर दमन कर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जाएगी। यह ‘पुलिस दीदी’ सरकार की एक साजिश है। अगर एक सेकंड की भी देरी हो जाए, तो वहां असुरक्षा की स्थिति पैदा हो सकती है। सरकार को महिलाओं को मजबूत बनाना चाहिए। पुलिस की तैनाती करके सरकार छात्राओं को कमजोर कर रही है।” स्कूल-कॉलेज कोई जेल नहीं, जहां पुलिस की तैनाती हो छात्रा सबा आफरीन ने कहा, “अगर पूरे बिहार की बात की जाए, तो महिलाओं के लिए कहीं भी सुरक्षा नहीं है। जब सम्राट चौधरी ने गृह मंत्री का कार्यभार संभाला था, तभी उन्होंने कहा था कि अब बिहार महिलाओं के लिए सुरक्षित हो जाएगा। मगर तभी से हम देख रहे हैं कि महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले और बढ़ गए हैं। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह छात्राओं की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित करे।” लड़कों के गलत कमेंट से माइंड डिस्टर्ब हो जाता कॉलेज में पढ़ाई कर रहीं छात्रा आदिशा ने कहा, “मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का यह फैसला बहुत अच्छा है। कॉलेज में पुलिस दीदी की तैनाती होने से कई लड़कियों में कॉन्फिडेंस आएगा। वे अपनी इनसिक्योरिटी सबके सामने रख पाएंगी। अभी कोई भी कुछ भी कमेंट करके चला जाता है, ऐसे में माइंड डिस्टर्ब हो जाता है। इसका असर पढ़ाई पर भी पड़ता है।” हमारे माता-पिता हमें लेकर चिंता में रहते हैं। वे हमारे पास नहीं होते, इसलिए हम अपने पेरेंट्स से भी कुछ कह नहीं पाते, ताकि वे परेशान न हों। पुलिस दीदी के रहने से कम से कम हम अपने मन का डर उनके सामने जाहिर कर सकेंगे। कैसे काम करेंगी पुलिस दीदी यह टीम थाना स्तर पर काम करेगी। एक महिला अफसर के साथ महिला जवान स्कूटी से चलेगी। हर थाना इलाके के हॉट स्पॉट चुने गए हैं। जिसमें महिला कॉलेज, गर्ल्स स्कूल, हॉस्टल और बाजार समेत वैसे जगह जहां लड़कियों और महिलाओं का आना-जाना सबसे अधिक होता है। टीम हर वक्त ERSS-112 से कनेक्ट रहेगी। किसी इमरजेंसी में अधिक फोर्स की जरूत पड़ने पर उन्हें बुला सकती हैं। इसका मुख्य उद्देश्य लड़कियों और महिलाओं को सुरक्षित माहौल देना है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *