Headlines

कॉमनवेल्थ मेडलिस्ट झंडु के भाई बख्तियारपुर स्टेशन से लापता:सब्जी की दुकान बंद रखने को लेकर पत्नी से कहासुनी हुई थी, देर रात मोबाइल छोड़ निकले




ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले पैरा पावरलिफ्टर झंडु कुमार के बड़े भाई संतोष पासवान संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए हैं। गुरुवार देर रात वे हरनौत स्थित अपने घर से एक ऑटो के जरिए बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे। इसके बाद से उनका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है। परिजन अनहोनी की आशंका से परेशान होकर स्टेशन और आसपास के इलाकों में उनकी तलाश कर रहे हैं, लेकिन संतोष का शुक्रवार दोपहर बाद तक कुछ पता नहीं चल पाया। संतोष के भाई कुंदन कुमार ने बताया कि परिवार का आलू-प्याज और सब्जी का कारोबार है। संतोष पिछले चार-पांच दिनों से दुकान नहीं खोल रहे थे और दिनभर घर पर रहते थे। इसी बात को लेकर गुरुवार को घर में उनका पत्नी के साथ विवाद और कहासुनी हो गई थी। पारिवारिक तनातनी और गुस्से के माहौल में संतोष रात करीब 9 बजे घर से निकल गए। जल्दबाजी और गुस्से में वह अपना मोबाइल फोन भी घर पर ही छोड़ गए, जिसके चलते उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। मां-पिता हरनौत बाजार में सड़क किनारे आलू-प्याज बेचकर घर चलाते हैं। पूरा परिवार एक किराए के कमरे में रहता है। झंडु के सब्जी के दुकान की 2 तस्वीरें देर रात तक नहीं लौटे तो परिवार ने खोजबीन शुरू की कुंदन के अनुसार, संतोष जब काफी देर तक घर नहीं लौटे तो परिजनों ने उनकी खोजबीन शुरू की। तलाश के दौरान हरनौत के ही एक स्थानीय ऑटो ड्राइवर ने बताया कि संतोष उसी के ऑटो में बैठकर बख्तियारपुर गए थे। ड्राइवर ने उन्हें रात में बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन के ठीक नीचे सड़क किनारे छोड़ा था। इसके बाद वे स्टेशन के भीतर गए या कहीं और निकल गए। शुक्रवार सुबह परिजन स्टेशन परिसर के सीसीटीवी कैमरों को खंगलवाना शुरू किया, लेकिन दोपहर बाद तक उनका कुछ पता नहीं चल पाया। परिवार के कुछ लोग संतोष की तस्वीर लेकर मार्केट और अन्य इलाकों में उन्हें ढूंढने की कोशिश में जुटे हुए हैं। संतोष के छोटे भाई झंडु ने कॉमनवेल्थ में जीता था ब्रॉन्ज मेडल लापता संतोष पासवान के छोटे भाई झंडु कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स की हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में 190 किलोग्राम वजन उठाकर देश के लिए कांस्य पदक जीता था। झंडु का परिवार बेहद साधारण पृष्ठभूमि से रहा है और वे खुद भी सब्जी बेचने और ई-रिक्शा चलाने का काम कर चुके हैं। झंडू हरनौत के सबनौह डीह गांव के रहने वाले हैं। परिवार में 65 साल की मां कमला देवी, 77 साल के पिता रामानंद पासवान के अलावा 28 साल के झंडु, 44 साल के संतोष और 29 साल के कुंदन हैं। झंडु की तीन बहनें भी हैं। झंंडु सबसे छोटे हैं और दिव्यांग हैं। 4 साल की उम्र में झंडू को पोलियो मारा था। कमर के नीचे का एक साइड का अंग काम करना बंद कर दिया था। झंडू कुमार की 3 खास बातें- 1. सब्जियां बेचने और ई-रिक्शा चलाने से कॉमनवेल्थ मेडल तक का सफर बिहार के नालंदा जिले के हरनौत में झंडू कुमार बचपन से पोलियो से प्रभावित थे। परिवार की मदद के लिए उन्होंने सड़क किनारे पिता के साथ आलू-प्याज बेचे और कोविड के दौरान ई-रिक्शा चलाकर रोजी-रोटी कमाई। अब वही खिलाड़ी कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए मेडल जीत चुका है। 2. ई-रिक्शा बेचकर नेशनल चैंपियनशिप खेलने गए, वहीं से बदली किस्मत 2023 में नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने अपना ई-रिक्शा तक बेच दिया। पहली बार में कोई सफल लिफ्ट नहीं लगा सके, लेकिन उनकी प्रतिभा पर पैरालिंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट राजिंदर सिंह राहेलू की नजर पड़ी। इसके बाद SAI सेंटर में ट्रेनिंग मिली और करियर नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया। 3. निराशा को ताकत बनाया, अब लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक पर नजर 2017 में पैरा एथलेटिक्स से शुरुआत करने वाले जंडू ने बाद में पावरलिफ्टिंग को चुना। नेशनल रिकॉर्ड बनाया, वर्ल्ड कप और एशियन-ओशिनिया चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज जीता। झंडु की सफलता पर पीएम मोदी ने दी थी बधाई झंडु की सफलता पर पीएम मोदी ने X पर लिखा था- झंडू कुमार का शानदार प्रदर्शन। उन्होंने पुरुषों के हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए मेडल का खाता खोला है। उन्हें बधाई। उनकी यह उपलब्धि उनकी जबरदस्त ताकत, अटूट संकल्प और बरसों की अनुशासित मेहनत का बेहतरीन उदाहरण है। हर चुनौती का सामना करते हुए और इंटरनेशनल मंच पर शानदार प्रदर्शन करके, उन्होंने पूरे देश का मान बढ़ाया है और अनगिनत भारतीयों को प्रेरित किया है। परिवार में जश्न का माहौल झंडू कुमार की इस गौरवशाली सफलता पर उनके पैतृक आवास पर खुशियों का सैलाब उमड़ पड़ा है। ग्रामीण और शुभचिंतक लगातार उनके घर पहुंचकर बधाई दे रहे हैं। हालांकि, इस चमकते हुए मेडल के पीछे संघर्ष और रातों के लंबे इंतजार कहानी भी है। झंडू के पिता रामानंद पासवान ने अत्यंत गर्व और भावुकता के साथ बताया कि वे रातभर सो नहीं पाए। मोबाइल स्क्रीन पर टकटकी लगाए अपने बेटे की हर एक गतिविधि और प्रतियोगिता के लाइव परिणाम को देख रहे थे। बेटे की जीत पर उन्हें अपार और अकल्पनीय खुशी महसूस हो रही है। भाई कुंदन कुमार ने बताया कि तनाव और रोमांच के बीच उनका दिल धुकुर-धुकुर कर रहा था। मोबाइल में बैटरी भी मात्र 19 प्रतिशत ही बची थी, लेकिन उनके भाई ने मेडल जीत ही लिया। उन्होंने भगवान से प्रार्थना करते हुए कहा कि देश को एक होनहार बेटा मिला है। अन्य दिव्यांग युवा भी इसी मुकाम को हासिल करें। केंद्रीय खेल मंत्री ने झंडु को दी थी 10 लाख की सम्मान राशि ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाले पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार को केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने 10 लाख की सम्मान राशि प्रदान की थी। ये सम्मान समारोह नई दिल्ली स्थित केंद्रीय मंत्री के कार्यालय में आयोजित किया गया था। सम्मान समारोह के दौरान डॉ. मांडविया ने कहा कि झंडू कुमार की यह उपलब्धि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस सोच का परिणाम बताया, जिसके तहत पैरा खेलों को मुख्यधारा में लाकर पैरा खिलाड़ियों को अन्य खिलाड़ियों के समान प्राथमिकता, सहयोग और अवसर दिए जा रहे हैं। केंद्रीय खेल मंत्री ने झंडू कुमार के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उनसे आगामी एशियाई पैरा खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव और बढ़ाने का आग्रह किया था। इस पर झंडू कुमार ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि वह पूरी मेहनत और समर्पण के साथ एशियाई खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने का पूरा प्रयास करेंगे।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *