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Lok Sabha Monsoon Session Bills Passing Trend


नई दिल्ली8 घंटे पहले

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मानसूत्र सत्र के दौरान लोकसभा में चल रही बहस- फाइल फोटो - Dainik Bhaskar

मानसूत्र सत्र के दौरान लोकसभा में चल रही बहस- फाइल फोटो

संसद में बिल पेश करने और उन्हें पास कराने की रफ्तार पिछले एक साल में बढ़ी है। 18वीं लोकसभा के गठन के बाद से अब तक पेश किए गए 64 बिलों में से 34 यानी 53% बिल उसी सत्र में दोनों सदनों से पास हो गए, जिसमें उन्हें पेश किया गया था। यह आंकड़ा PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च के सेशनवाइज डेटा से सामने आया है।

PRS के मुताबिक, 16वीं लोकसभा में 189 में से 63 यानी 33% बिल उसी सत्र में दोनों सदनों से पास हुए थे। 17वीं लोकसभा में यह आंकड़ा बढ़कर 62% हो गया। उस दौरान पेश किए गए 190 बिलों में से 117 उसी सत्र में पास हुए थे।

डेटा तैयार करने वाली संस्था PRS संसद और राज्य विधानसभाओं के कामकाज पर रिसर्च और निगरानी करने वाला स्वतंत्र, गैर-लाभकारी संगठन है।

पहले मानसून सत्र का डेटा ग्राफिक्स से समझिए

मानसून सत्र में सरकार के मूल एजेंडे में 5 नए बिल थे

हाल ही खत्म हुए मानसून सत्र के लिए सरकार के एजेंडे में 5 नए बिल पेश कर उन्हें पास कराने और 2 लंबित बिलों पर विचार कर उन्हें पास कराने की योजना थी। हालांकि, संसद से पास 11 बिलों में से 6 मूल एजेंडे में पेश करने के लिए शामिल नहीं थे।

सरकार के एजेंडे में विचार और पास कराने के लिए शामिल दो पेंडिंग बिलों में से कोई भी पास नहीं हुआ। ये विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) बिल 2025 और फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट (FCRA) बिल 2026 हैं।

VBSA बिल की जांच कर रही संसदीय समिति ने अभी तक अपनी रिपोर्ट पेश नहीं की है। वहीं, विपक्ष की ओर से बिल वापस लेने की मांग के बीच FCRA अमेंडमेंट बिल को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा गया है।

2024 से 2025 में बदला बिल पास होने का पैटर्न

PRS के रिकॉर्ड के मुताबिक, 18वीं लोकसभा की शुरुआत में उसी सत्र में बिल पास होने की रफ्तार कम थी। इसके मुताबिक बजट सत्र में पेश किए गए 10 में से 5 बिल दोनों सदनों से उसी सत्र में पास हुए।

इससे पहले, 2024 के बजट सत्र में पेश किए गए 11 में से एक भी बिल उसी सत्र में दोनों सदन से पास नहीं हुआ था। इसके बाद के शीतकालीन सत्र में पेश 4 बिल भी सत्र खत्म होने तक पेंडिंग रहे।

शीतकालीन सत्र 2024 में संसद से पास होने वाला एकमात्र बिल भारतीय वायुयान विधेयक 2024 था। इसे पिछले बजट सत्र में पेश किया गया था। 2025 से यह पैटर्न बदल गया।

PRS ने कम समय में बिल पास होने पर चिंता जताई

PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च पहले भी कह चुका है कि बिल पेश होने और पास होने के बीच कम समय रहने से सांसदों को प्रस्तावित कानून की जांच के लिए कम समय मिलता है। इससे संबंधित पक्षों के साथ सलाह-मशविरा करने के मौके भी कम हो जाते हैं।

मानसून सत्र में कई बिलों पर हुई चर्चा में लगा समय इस चिंता से जुड़ा है। PRS के मुताबिक, 9 बिल ऐसे पास हुए जिन पर उन्हें पेश करने वाले मंत्री के अलावा किसी सांसद ने बात नहीं की। 11 में से 7 बिल 5 मिनट या उससे कम समय में पास हो गए।

मानसून सत्र 2026 में दोनों सदन का कामकाज

इस साल का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चला। इसमें 19 बैठकें हुईं। NEET-UG पेपर लीक, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और अयोध्या में राम मंदिर को मिले दान की चोरी के मुद्दों पर बार-बार हंगामा हुआ।

PRS के मुताबिक, लोकसभा ने तय समय का केवल 15% और राज्यसभा ने 33% समय काम किया। लोकसभा में प्रश्नकाल तय समय का सिर्फ 1% और राज्यसभा में 12% चला।

पूरे सत्र में लोकसभा का प्रश्नकाल केवल 9 मिनट हुआ। 380 लिस्टेड सवालों में से सिर्फ 2 का मौखिक जवाब दिया गया।

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आखिरी दिन लोकसभा 1 मिनट-राज्यसभा 1 घंटे चली, संसद सत्र खत्म

संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। आखिरी दिन लोकसभा की कार्यवाही सिर्फ 1 मिनट चली, जबकि राज्यसभा करीब 1 घंटे चली। राज्यसभा में आखिरी दिन MMDR संशोधन बिल पास हुआ। मानसून सत्र में लोकसभा की 19 बैठकें हुईं। इस हिसाब से 19 बैठकों में करीब 114 घंटे कार्यवाही होनी थी, लेकिन यह करीब 17 घंटे 30 मिनट ही चली। यानी करीब 96 घंटे 30 मिनट कम कार्यवाही हुई। पढ़ें पूरी खबर…



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