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DMCH की व्यवस्था की खुली पोल:5 RO प्लांट के बावजूद पानी की किल्लत, इमरजेंसी में स्लाइन-सैनिटाइजर नहीं मिला




दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) में रविवार को विधानसभा की शून्यकाल अध्ययन समिति के तीन सदस्यीय दल के निरीक्षण के दौरान अस्पताल की व्यवस्थाओं में गंभीर कमियां सामने आईं। मरीजों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं से लेकर दवा, पेयजल और सफाई व्यवस्था तक में लापरवाही की शिकायत समिति के सदस्यों को मिली। सर्जिकल भवन की इमरजेंसी से लेकर क्रिटिकल केयर यूनिट और सर्जिकल वार्ड तक निरीक्षण के दौरान मरीजों और उनके स्वजनों ने समस्याओं को लेकर खुलकर शिकायत की। सबसे गंभीर मामला पेयजल व्यवस्था का सामने आया। भीषण गर्मी के बीच मरीजों और उनके स्वजनों ने समिति को बताया कि अस्पताल में पर्याप्त पीने का पानी उपलब्ध नहीं है। मजबूरी में उन्हें बाहर से पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। समिति के सदस्यों ने जब अस्पताल परिसर में पेयजल व्यवस्था की वास्तविक स्थिति देखी तो बेसिन के पास लगा नल ही खराब मिला। इससे अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्था और निगरानी पर सवाल खड़े हो गए। पांच आरओ प्लांट, फिर भी मरीजों को नहीं मिल रहा पानी
डीएमसीएच के सर्जिकल भवन की छत पर मरीजों और उनके स्वजनों के लिए पांच आरओ प्लांट लगाए गए हैं। इनकी देखरेख के लिए कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति भी की गई है। इसके बावजूद मरीजों को पीने का पानी उपलब्ध नहीं होना समिति के लिए गंभीर विषय रहा। समिति के सदस्यों ने यह जानने की कोशिश की कि जब अस्पताल में पेयजल की व्यवस्था के लिए आरओ प्लांट लगाए गए हैं और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय है तो मरीजों को पानी क्यों नहीं मिल रहा है। मरीजों ने बताया कि अस्पताल में इलाज कराने के दौरान दवा और अन्य जरूरी सामान के साथ पानी की व्यवस्था भी उनके लिए परेशानी का कारण बन गई है। अस्पताल जैसे स्थान पर, जहां दूर-दराज से आने वाले मरीज कई-कई दिनों तक भर्ती रहते हैं, वहां पेयजल के लिए बाहर निर्भर रहना उनके लिए अतिरिक्त परेशानी और खर्च का कारण बन रहा है। इमरजेंसी में एनएस 100 एमएल स्लाइन और सैनिटाइजर नहीं मिला समिति ने निरीक्षण की शुरुआत सर्जिकल भवन स्थित इमरजेंसी ट्राईज एरिया से की। यहां मरीजों को दी जा रही सुविधाओं और इमरजेंसी दवा भंडार में उपलब्ध दवाओं की जानकारी ली गई। निरीक्षण के दौरान एनएस 100 एमएल स्लाइन और सैनिटाइजर उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी मरीजों की ओर से शिकायत की गई। समिति के सदस्यों ने अस्पताल प्रबंधन से दवाओं की उपलब्धता और मरीजों को सरकारी स्तर पर मिलने वाली सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। इमरजेंसी जैसी संवेदनशील जगह पर जरूरी सामग्री उपलब्ध नहीं होने की शिकायत को समिति ने गंभीरता से लिया। टॉयलेट तक में पानी नहीं, गंदगी पर जताई नाराजगी सर्जिकल वार्ड में मरीजों और उनके स्वजनों से बातचीत के दौरान पेयजल की समस्या दोबारा सामने आई। मरीजों ने बताया कि वार्ड में भी पर्याप्त पानी नहीं मिलता है। वहीं, वहां मौजूद नर्सों ने समिति को बताया कि कई बार टॉयलेट तक में पानी उपलब्ध नहीं रहता। इससे मरीजों के साथ-साथ स्वास्थ्यकर्मियों को भी परेशानी होती है। वार्ड में सफाई व्यवस्था की स्थिति देखकर भी समिति के सदस्य नाराज हुए। अस्पताल में मरीजों के इलाज के साथ स्वच्छ और संक्रमणमुक्त वातावरण बनाए रखना जरूरी है, लेकिन निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई में कमी दिखाई दी। समिति ने अस्पताल प्रबंधन से सफाई व्यवस्था को बेहतर करने और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा। जीविका के माध्यम से हो रही सफाई, समिति ने पूछा- निगरानी कौन करता है? सफाई व्यवस्था को लेकर जब समिति ने डीएमसीएच के उपाधीक्षक डॉ. अमित कुमार झा से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि अस्पताल में जीविका के माध्यम से सफाई कराई जाती है। इस पर समिति के सदस्यों ने सवाल उठाया कि जब सफाई की जिम्मेदारी एजेंसी के माध्यम से दी गई है तो काम की नियमित निगरानी कौन करता है और व्यवस्था में कमी मिलने पर जिम्मेदारी किसकी तय होती है। समिति ने स्पष्ट किया कि केवल एजेंसी को काम सौंप देने से अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। अस्पताल परिसर, वार्ड, टॉयलेट और मरीजों के आसपास की साफ-सफाई की नियमित जांच और निगरानी जरूरी है। इमरजेंसी से क्रिटिकल केयर यूनिट तक लिया जायजा विधानसभा के सभापति सह मधुबनी विधायक माधव आनंद के नेतृत्व में पहुंची समिति में वाल्मीकिनगर विधायक सुरेंद्र कुमार और पारू विधायक शंकर प्रसाद शामिल थे। टीम ने सर्जिकल भवन स्थित इमरजेंसी ट्राईज एरिया, सर्जिकल क्रिटिकल केयर यूनिट, मेडिसिन क्रिटिकल केयर यूनिट, इमरजेंसी दवा भंडार और सर्जिकल वार्ड का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान समिति ने मरीजों से सीधे बातचीत कर अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी ली। समिति के सदस्यों ने मरीजों से पूछा कि उन्हें दवा समय पर मिल रही है या नहीं, पानी की व्यवस्था कैसी है और वार्ड की साफ-सफाई नियमित रूप से होती है या नहीं। मरीजों और उनके स्वजनों ने कई समस्याएं सीधे समिति के सामने रखीं। इस दौरान डीएमसीएच के उपाधीक्षक डॉ. अमित कुमार झा भी मौजूद रहे। समिति के सदस्यों ने उन्हें मौके पर ही आवश्यक सुधार के निर्देश दिए। उपाधीक्षक को तत्काल व्यवस्था सुधारने की हिदायत निरीक्षण के दौरान सामने आई पेयजल, दवा और सफाई संबंधी कमियों पर समिति ने उपाधीक्षक को व्यवस्था तत्काल दुरुस्त कराने की हिदायत दी। सदस्यों ने कहा कि अस्पताल में आने वाले मरीज पहले से बीमारी और आर्थिक परेशानी से जूझ रहे होते हैं। ऐसे में उन्हें पानी, दवा और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान नहीं होना चाहिए। समिति ने उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। खासकर पांच आरओ प्लांट होने के बावजूद मरीजों को पानी नहीं मिलना इस बात का संकेत है कि संसाधन उपलब्ध कराने के बाद उनकी नियमित निगरानी नहीं हो रही है। ‘मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर’ निरीक्षण के बाद समिति के सभापति माधव आनंद ने कहा कि मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर हैं। इसके बावजूद डीएमसीएच में निरीक्षण के दौरान कई ऐसी कमियां सामने आईं, जिन्हें दूर करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि समस्याएं सामने आ रही हैं तो निश्चित रूप से व्यवस्था में कमी है। इन कमियों को दूर कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि समिति केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सामने आई समस्याओं को संबंधित स्तर तक पहुंचाकर उनके समाधान की दिशा में कार्रवाई सुनिश्चित कराने का प्रयास करेगी। मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और मुख्य सचिव को जाएगी रिपोर्ट माधव आनंद ने बताया कि डीएमसीएच में किए गए निरीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, मुख्य सचिव और स्वास्थ्य सचिव को सौंपी जाएगी। रिपोर्ट में अस्पताल में निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों और मरीजों की शिकायतों का उल्लेख किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मरीजों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना अस्पताल प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके साथ ही अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों की नियमित निगरानी भी जरूरी है, ताकि संसाधन मौजूद रहने के बावजूद मरीज उनका लाभ लेने से वंचित न रहें। आधुनिक सुविधाओं के बीच बुनियादी व्यवस्था पर सवाल डीएमसीएच में लगातार नए भवनों, क्रिटिकल केयर यूनिट और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। ऐसे समय में पांच आरओ प्लांट उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को पीने के पानी के लिए बाहर से पानी खरीदना पड़े, इमरजेंसी में आवश्यक सामग्री की कमी सामने आए और वार्ड में टॉयलेट तक में पानी उपलब्ध नहीं हो, तो यह अस्पताल की व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। शून्यकाल अध्ययन समिति के निरीक्षण ने डीएमसीएच में संसाधनों की उपलब्धता और उनके वास्तविक उपयोग के बीच अंतर को सामने ला दिया है। अब महत्वपूर्ण यह होगा कि निरीक्षण में सामने आई कमियों पर अस्पताल प्रबंधन कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और मरीजों को पानी, दवा, सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं नियमित रूप से उपलब्ध कराने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।



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