नई दिल्ली3 मिनट पहले
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टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग यानी DCR प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप लॉन्च किया है। इससे अब इमारतों को डिजिटल कनेक्टिविटी की रेटिंग मिलेगी।
इस रेटिंग के जरिए लोग किसी भी प्रॉपर्टी को खरीदने या किराए पर लेने से पहले वहां के मोबाइल नेटवर्क और डिजिटल सुविधाओं का स्तर जांच सकेंगे। ट्राई के इस कदम से अब लोगों को घर या ऑफिस के अंदर कमजोर नेटवर्क और कॉल ड्रॉप जैसी परेशानियों से राहत मिल सकती है।
डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग की 5 बड़ी बातें
- सबके लिए पारदर्शी और एक समान नियम: ट्राई का यह नया प्लेटफॉर्म इमारतों में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क की स्थिति जांचने के लिए एक आसान, साफ-सुथरा और सबके लिए एक समान नियम प्रदान करता है। इससे उपभोक्ताओं को सही और भरोसेमंद जानकारी मिल सकेगी।
- घर बैठे करें रेटिंग की जांच और QR कोड से वेरिफिकेशन: इस प्लेटफॉर्म पर पब्लिक सर्च पेज मौजूद है। यहां कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रॉपर्टी या लोकेशन के नाम से उसकी कनेक्टिविटी रेटिंग देख सकता है। साथ ही दिए गए QR कोड और डिजिटल सर्टिफिकेट के जरिए उसकी सच्चाई भी जांच सकता है।
- मोबाइल एप से होगी घर के अंदर की टेस्टिंग: नेटवर्क की ऑन-साइट जांच के लिए एक खास DCRA मोबाइल एप बनाया गया है। इस एप के जरिए ऑथराइज्ड एजेंसियां इमारतों के अंदर जाकर नेटवर्क की मजबूती और इंटरनेट स्पीड की सटीक टेस्टिंग कर सकेंगी।
- इन 4 सुविधाओं के आधार पर रेटिंग मिलेगी: DCR सिस्टम के तहत इमारतों को फाइबर ऑप्टिक रेडीनेस, मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता, इन-बिल्डिंग सॉल्यूशंस और वाई-फाई इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर रेटिंग दी जाएगी।
- बिल्डर्स पर बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का दबाव: यह पहल केवल खरीदारों की मदद ही नहीं करेगी, बल्कि प्रॉपर्टी डेवलपर्स और बिल्डर्स को भी शुरुआत से ही मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए प्रेरित करेगी।
प्रॉपर्टी मैनेजर्स के लिए सिंगल इंटरफेस
ट्राई के बयान के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म प्रॉपर्टी मैनेजर्स, रजिस्टर्ड डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग एजेंसी और ग्राहकों को एक सिंगल इंटरफेस पर लाता है।
सरकारी, कमर्शियल, पब्लिक और प्राइवेट कैटेगरीज की बनी हुई और अंडर कंस्ट्रक्शन इमारतों के लिए प्रॉपर्टी मैनेजर्स अपनी संपत्तियों को रजिस्टर कर रेटिंग एप्लीकेशन का स्टेटस ट्रैक कर सकते हैं।
डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने के लिए ट्राई की ऑफिशियल वेबसाइट- https://dcrp.trai.gov.in, https://dcrp.trai.gov.in पर भी जा सकते हैं।
क्या है इन-बिल्डिंग सॉल्यूशन (IBS)?
बड़ी या बहुमंजिला इमारतों, बेसमेंट और लिफ्ट जैसी जगहों पर मोबाइल टावर के सिग्नल अक्सर अंदर तक नहीं पहुंच पाते हैं। इससे निपटने के लिए इमारत के अंदर ही छोटे एंटेना और केबल्स का नेटवर्क बिछाया जाता है, जिसे इन-बिल्डिंग सॉल्यूशन (IBS) कहते हैं। DCR रेटिंग यह तय करेगी कि बिल्डर ने ऐसी तकनीक इमारत में इंस्टॉल की है या नहीं।
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