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सावन के दसवें दिन शनिवार(8 जुलाई 2026) को सुल्तानगंज से देवघर जाने वाला कच्ची कांवरिया पथ पूरी तरह भगवामय नजर आया। “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा मार्ग गूंज उठा। शिवभक्त उत्तर वाहिनी गंगा से पवित्र जल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम रवाना हो रहे हैं। 30 जुलाई को श्रावणी मेले के उद्घाटन के बाद से अब तक सुल्तानगंज से 18 लाख से ज्यादा शिवभक्त जल लेकर देवघर के लिए रवाना हो चुके हैं। जिला प्रशासन की ओर से स्थापित दो पीपुल काउंटिंग मशीनों के आंकड़ों के अनुसार शुक्रवार सुबह से रात तक कुल 3 लाख 99 हजार 456 कांवरियों ने उत्तर वाहिनी गंगा से जल भरा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से व्यापक इंताजम किया है। मेलास्थल पर पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती जिलाधिकारी अलंकृता पांडे ने बताया कि श्रावणी मेला के दौरान प्रशासन की ओर से मेला क्षेत्र, नमामि गंगे घाट, अजगैबीनाथ मंदिर परिसर, प्रमुख मार्गों और कांवड़ पथ पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखा गया है। अलग-अलग स्थानों पर प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती की गई है, जो लगातार भीड़ की निगरानी कर रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चिकित्सा शिविर, एंबुलेंस, पेयजल, शौचालय, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और सहायता केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग, डायवर्जन और पुलिस बल की तैनाती की गई है।
अलर्ट मोड में आपदा प्रबंधन की टीम वहीं, किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन की टीमों को भी अलर्ट मोड में रखा गया है। प्रशासन का दावा है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं व्यवस्थित तरीके से गंगाजल भरने और आगे की यात्रा करने में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं। 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा सुल्तानगंज के नमामि गंगे और अजगैबीनाथ घाट से कांवरियों का जत्था हर पल जल भरकर निकल रहा है। सबका लक्ष्य एक है… 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा के बाद बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक। यहां आस्था, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम दिख रहा है। कांवरियों में महिला, पुरुष, बच्चे यानी हर उम्र के लोग शामिल है। सबका एक ही नाम है… बम। श्रद्धालुओं की सुगम, सुरक्षित और सुव्यवस्थित यात्रा के लिए बिहार और झारखंड सरकार और संबंधित जिला प्रशासनों ने अभूतपूर्व और चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं। सुल्तानगंज से देवघर कांवरिया पथ पर बालू 105 किलोमीटर लंबे इस दुर्गम और कच्चे कांवरिया पथ को शिवभक्तों की सुविधा के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। नंगे पांव चलने वाले कांवरियों के पैरों में छाले न पड़ें, इसके लिए लगभग 85 किमी लंबे कच्चे रास्ते पर बारीक और महीन बालू बिछाई गई है। इसके अलावा, उमस और तीखी धूप से राहत दिलाने के लिए पूरे रास्ते में नियमित अंतराल पर वाटर स्प्रिंकलर (पानी की फुहारें) लगाए गए हैं। पानी के टैंकरों से लगातार छिड़काव किया जा रहा है। शाम और रात के वक्त शिवभक्तों को कोई दिक्कत न हो इसके लिए कांवरियों के लिए पूरे पथ पर हाई-मास्ट लाइटें और एलईडी स्ट्रिप्स लगाई गई हैं। मुख्य पड़ावों और प्रवेश द्वारों पर आकर्षक तोरण द्वार और भक्ति संगीत के लिए साउंड सिस्टम लगाए गए हैं। सीसीटीवी, एआई कैमरे, ड्रोन से कांवरियों की सुरक्षा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भागलपुर, बांका और देवघर पुलिस-प्रशासन ने स्पेशल तैयारी की है। सुल्तानगंज घाट से लेकर बाबा धाम तक 500 से अधिक सीसीटीवी और एआई कैमरों के जरिए वॉच टावर और कंट्रोल रूम से 24/7 निगरानी रखी जा रही है। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों से भीड़ के घनत्व को मापा जा रहा है। इसके अलावा, कांवरिया पथ पर बिहार पुलिस, झारखंड पुलिस, होमगार्ड, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और एटीएस (ATS) की टीमें तैनात हैं। सादे लिबास में भी महिला व पुरुष पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। पूरे रूट पर हर 2 से 3 किलोमीटर पर अस्थायी मेडिकल रिलीफ सेंटर (MRC) बनाए गए हैं। आपात स्थिति के लिए बाइक एम्बुलेंस, 108 एम्बुलेंस और जीवनरक्षक दवाओं के साथ डॉक्टरों की टीमें तैनात हैं।
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सुल्तानगंज से अब तक 18 लाख श्रद्धालु देवघर रवाना:'बोल बम' के जयघोष से गूंज उठा कांवरिया पथ; सुरक्षा के कड़े इंतजाम, अलर्ट मोड में जल संसंधान विभाग
