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आईआईएम में 'इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन बुद्धोनॉमिक्स 2026' का होगा आयोजन:शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों से मांगे गए शोध पत्र, 10 अक्टूबर तक रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं




भारतीय प्रबंध संस्थान बोधगया में ‘इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन बुद्धोनॉमिक्स 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आईआईएम बोधगया, नालंदा विश्वविद्यालय और श्रीलंका के कोलंबो विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होगा। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘समृद्धि, भावी पीढ़ी और शांति के लिए साझेदारी’ रखा गया है। यह आयोजन मुख्य रूप से इस बात पर मंथन करेगा कि यदि समृद्धि और शांति को एक साथ साधा जाए तो भविष्य में प्रबंधन, उद्यम और शासन का स्वरूप कैसा होना चाहिए। शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों से मांगे गए शोध पत्र आयोजकों की ओर से दुनिया भर के शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और व्यवसायियों से बौद्ध विचार और उसकी समकालीन प्रासंगिकता पर ‘अंतःविषय दृष्टिकोण’ आमंत्रित किए गए हैं। सम्मेलन के लिए एक्सटेंडेड एब्सट्रैक्ट और पूर्ण शोध पत्र जमा करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसकी अंतिम तिथि 15 सितंबर निर्धारित की गई है। 10 अक्टूबर तक रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं चयनित शोधकर्ताओं को 1 अक्टूबर तक स्वीकृति की सूचना दे दी जाएगी, जिसके बाद पंजीकरण प्रक्रिया 1 से 10 अक्टूबर के बीच चलेगी। प्रतिभागी वैश्विक आर्थिक व्यवस्था की पुनर्कल्पना, टिकाऊ और सचेत विकास, शांति व भू-राजनीतिक सद्भाव, और व्यापार में माइंडफुलनेस जैसे छह विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर अपने मूल शोध पत्र, वर्किंग पेपर और केस स्टडीज प्रस्तुत कर सकते हैं। नवंबर में होगा मुख्य आयोजन और नीतिगत संवाद मुख्य सम्मेलन का आयोजन 20 और 21 नवंबर को आईआईएम बोधगया के परिसर में किया जाएगा, जहां दुनिया भर से आए विद्वानों द्वारा शोध पत्रों की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इससे पूर्व 19 नवंबर को माइंडफुलनेस और बौद्ध दर्शन पर एक विशेष प्री-कॉन्फ्रेंस कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी। इसके अलावा, 22 नवंबर का दिन नीतिगत चर्चा, बहस और संवाद के लिए समर्पित रहेगा। इस पूरे आयोजन को आईआईएम बोधगया की निदेशक प्रो. विनीता एस. सहाय और नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी का संरक्षण प्राप्त है। इस वैश्विक पहल का उद्देश्य विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप बौद्ध दर्शन के माध्यम से वैश्विक अर्थव्यवस्था और शांति के नए रास्ते तलाशना है।



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