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पेपरलेस रजिस्ट्रेशन के विरोध में चौथे दिन हड़ताल:लखीसराय में रजिस्ट्री कार्यालय में कामकाज ठप, कहा-'पुरानी व्यवस्था बहाल हो'




लखीसराय में पेपरलेस जमीन निबंधन व्यवस्था के विरोध में दस्तावेज नवीस (कातिब), स्टांप विक्रेता और मुंशियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुक्रवार को चौथे दिन भी जारी रही। इस कारण जिला निबंधन कार्यालय में कामकाज पूरी तरह ठप रहा और रजिस्ट्री कराने आए लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा। स्टांप विक्रेताओं के सामने रोजगार का संकट हड़तालियों ने जिला निबंधन कार्यालय के सामने प्रदर्शन करते हुए सरकार से पुरानी निबंधन व्यवस्था बहाल करने की मांग की। उनका कहना है कि नई पेपरलेस प्रणाली से कातिबों, दस्तावेज लेखकों, मुंशियों और स्टांप विक्रेताओं के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। दस्तावेज नवीस महासंघ की जिला शाखा के सचिव परमानंद प्रसाद सिन्हा ने बताया कि वर्षों से रजिस्ट्री कार्यालयों में काम कर रहे सैकड़ों परिवारों की आजीविका इस व्यवस्था से प्रभावित होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि नई प्रणाली लागू करने से पहले सरकार ने इससे जुड़े लोगों की समस्याओं और सुझावों पर विचार नहीं किया। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को परेशानी होगी प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से दस्तावेज तैयार करने वाले कातिबों की भूमिका लगभग समाप्त हो जाएगी। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को तकनीकी जानकारी के अभाव में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हड़तालियों ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने तीन अगस्त से पेपरलेस जमीन निबंधन व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत अधिकांश प्रक्रियाएं ऑनलाइन कर दी गई हैं। लखीसराय में 1 भी जमीन की रजिस्ट्री नहीं हुई नई व्यवस्था लागू होने के बाद से अब तक लखीसराय में एक भी जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकी है। हड़ताल के कारण जिला निबंधन कार्यालय में सन्नाटा पसरा है और आम लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शन में महासंघ के उपसचिव अरुण कुमार सिन्हा, कोषाध्यक्ष गोपाल कुमार, अर्जुन सिंह, मनोज सिंह, कृष्णनंदन सिन्हा, विनोद कुमार सिन्हा, दीपक कुमार सिन्हा, नरेश प्रसाद सिन्हा, सुरेंद्र यादव, पंकज कुमार, भोपाल यादव, शंभु कुमार सिन्हा, राजीव कुमार और रंजीत कुमार सिन्हा सहित बड़ी संख्या में कातिब, स्टांप विक्रेता और मुंशी शामिल थे।



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