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नालंदा में एक नया कैफे खुला है। जिसकी किसी तरह की ब्रांडिंग नहीं हुई है, लेकिन फिर भी युवा इस कैफे की ओर खींचे चले आ रहे हैं। वो इस लिए क्योंकि इसका नाम सबसे अलग ‘कॉकरोच कैफे’ है। यहां कोई भी डिश 99 रुपए से ऊपर नहीं है। कैफे के संचालक कनिष्क राज ने अजीबोगरीब नाम रखने का कारण बताया है। वे कहते हैं कि इंस्ट्रग्राम पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से जुड़ी एक रील देखी थी, इसी के बाद मुझे ये नाम रखने का आइडिया आया। कैफे की ओपनिंग 27 जुलाई को हिलसा में हुई थी। ‘कॉकरोच कैफे’ युवाओं की पसंद क्यों बना रहा है, क्यों रखा ऐसा नाम, क्या है इसमें खास, कितना पॉकेट फ्रेंडली, पढ़ें रिपोर्ट… कैफे की कुछ तस्वीरें… ‘युवा अपने दम पर बहुत कुछ भी कर सकते’ कैफे के मालिक कनिष्क राज हिलसा के रहने वाले हैं। कनिष्क बताते हैं कि कैफे को मुख्य रूप से बैचलर्स-छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। अक्सर देखा जाता है कि छात्र और युवा अच्छे कैफे में जाना तो चाहते हैं, लेकिन वहां की कीतम ऊंची होती है। इसलिए कैफे को पूरी तरह से ‘पॉकेट फ्रेंडली’ बनाया है। यहां मिलने वाले खाने-पीने के हर आइटम की कीमत 99 रुपए या उससे कम की है। कोई भी डिश 99 रुपए से ऊपर की नहीं है। कम कीमत पर यहां ब्रेड पकौड़ा, चाय, भेल पूरी, मैगी, पास्ता, सैंडविच सहित विभिन्न प्रकार के आइटम उपलब्ध है। शाम ढलते ही यह कैफे पूरी तरह से गुलजार हो जाता है। चार-पांच दोस्तों के ग्रुप यहां चाय की चुस्कियां लेने, गपशप करने और इंस्टाग्राम के लिए रील्स बनाने के लिए विशेष रूप से पहुंचते हैं। 24 घंटे युवाओं के खुला रहता कैफे युवाओं की बदलती जीवनशैली को देखते हुए यह कैफे 24 घंटे और सातों दिन (24/7) खुला रहता है। रात में पढ़ने वाले छात्र या देर रात दोस्तों के साथ समय बिताने की चाह रखने वाले युवा किसी भी वक्त यहां आ सकते हैं। नाम भले ही कॉकरोच है, लेकिन संचालक का सबसे ज्यादा जोर स्वच्छता और हाइजीन पर है। ग्राहकों को परोसा जाने वाला भोजन पूरी तरह से स्वच्छ और उच्च गुणवत्ता वाला होता है। कैफे में 10 लोगों की एक टीम भी काम कर रही है। ब्लैक थीम और इंटीरियर बना सेल्फी प्वाइंट कैफे के नाम को लेकर सोशल मीडिया पर लोग खूब मजे ले रहे हैं। कई लोग मजाकिया अंदाज में पोस्ट शेयर करते हुए लिख रहे हैं कि अब तो अगर खाने में गलती से कोई कीड़ा या कॉकरोच मिल भी जाए, तो कस्टमर शिकायत भी नहीं कर सकता। हालांकि जब कोई कस्टमर कैफे में जाते हैं, तो वहां का नजारा उसे हैरान कर देता है। अंदर का माहौल बेहद साफ-सुथरा और आकर्षक है। कैफे के प्रवेश द्वार से लेकर अंदर तक अपनाई गई ब्लैक थीम ग्राहकों को पहली नजर में ही भा जाती है। टिन की छत से लटकती पीली लाइटें एक बहुत ही सुकून देती है। दीवारों को नीले-हरे रंग से रंगा गया है। ग्राहकों के बैठने के लिए काले रंग के सोफे लगाए गए हैं, जिन पर रखी लाल रंग की गद्दी और सामने सजी कांच की टेबल कैफे के लुक को बेहद प्रीमियम बनाती है। जो ग्राहकों का सेल्फी प्वाइंट भी बन गया है। कैफे मालिक कनिष्क के पिता कारोबारी और मां टीचर हैं कनिष्क राज एक व्यावसायिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता रामावतार प्रसाद इलाके के जाने-माने व्यवसायी हैं, जबकि मां सोना कुमारी पेशे से एक शिक्षिका हैं। परिवार का पहले से ही होटल का व्यवसाय रहा है, लेकिन कनिष्क ने कैफे खोलने से पहले कपड़े का ‘रिलायंस मार्ट’ भी चलाया था। अपने व्यावसायिक अनुभव का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने मार्केटिंग का यह बोल्ड तरीका अपनाया। कनिष्क का स्पष्ट कहना है कि आज के युवाओं को कुछ अलग और हटकर चाहिए। बाजार में ‘रॉयल कैफे’, ‘स्टार कैफे’ या ‘किंग्स डाइन’ जैसे नाम वाले सैकड़ों कैफे आसानी से मिल जाएंगे, जो भीड़ में कहीं खो जाते हैं। लेकिन ‘कॉकरोच कैफे’ पूरे इलाके में सिर्फ एक ही है और इसका नाम सुनते ही लोगों के कान खड़े हो जाते हैं। कनिष्क समझते हैं कि अजीबोगरीब नाम सुनकर लोग एक बार कैफे में जरूर कदम रखेंगे, लेकिन उन्हें बार-बार वापस लाने का काम कैफे की क्वालिटी, स्वाद और वहां का व्यवहार ही करेगा। सोशल मीडिया के इस दौर में कनिष्क की यह रणनीति पूरी तरह से सफल होती दिख रही है। मार्केटिंग के विशेषज्ञ भी ‘बोल्ड और स्मार्ट मार्केटिंग’ का नाम दे रहे हैं।
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न ब्रांडिंग, न विज्ञापन… नाम से फेमस हुआ 'कॉकरोच कैफे':इंस्टाग्राम पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' की रील देखकर आया आइडिया, 99 रुपए के अंदर सभी डिश
