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सिर्फ 7 साल की सरकारी नौकरी, लेकिन संपत्ति 10 करोड़ रुपए से ज्यादा। नौकरी जॉइन करने के एक साल के अंदर स्कॉर्पियो खरीदी, फिर जमीन और G+4 अपार्टमेंट में करोड़ों रुपए लगा दिए। किशनगंज की DPO रूबी कुमारी पर स्कूलों की जांच के नाम पर प्रिंसिपल और संचालकों से वसूली करने के गंभीर आरोप हैं। EOU की जांच में पति के साथ करोड़ों की बेनामी संपत्ति, संदिग्ध लोन और लेन-देन के सुराग मिले हैं। सवाल है, 72 लाख की सैलरी कमाने वाली मैडम के पास 10 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति कहां से आई और भ्रष्टाचार का उनका पूरा खेल कैसे चलता था? जानेंगे, संडे बिग स्टोरी में…। रूबी कुमारी की काली कमाई के 3 तरीके तरीका-1ः चेकिंग करती, टीचरों को धमकाकर पैसे वसूलती बात इसी साल के जून की है। उस वक्त स्कूलों में गर्मी की छुट्टी चल रही थी। मामला किशनगंज सब डिवीजन के तहत आने वाले एक सरकारी हाई स्कूल का है। स्कूल बंद था। स्टूडेंट्स नहीं थे। फिर भी मैडम जांच करने पहुंच गईं। स्कूल में मौजूद टीचर से कैश बुक दिखाने को कहा। जांच की। फिर अटेंडेंस रजिस्टर को चेक किया। वहां मौजूद हाई स्कूल के प्रिंसिपल और दो टीचर को हड़काया। कहा…बहुत गड़बड़ी है। रिपोर्ट बनाकर ऊपर भेजेंगे। इसके बाद वो बाहर निकल गईं। तब इनके साथ आया एक शख्स प्रिंसिपल के पास गया। कहा- ‘मैडम मानेगी नहीं। कुछ से कुछ लिख देगी। कुछ दे दीजिए, रिपोर्ट ठीक कर देगी। उस शख्स ने प्रिंसिपल से 20 हजार रुपए की डिमांड की। बात 15 हजार रुपए पर बनी। सूत्रों की मानें तो नौकरी पर कोई खतरा न हो इसे ध्यान में रखते हुए प्रिंसिपल ने 15 हजार रुपए दे भी दिए थे। तरीका-2ः प्राइवेट स्कूलों की चेकिंग, कमी बताकर वसूले पैसे यह मामला भी जून का ही है। किशनगंज में एक प्राइवेट स्कूल है। अचानक मैडम अपने खास लोगों के साथ जांच करने पहुंच गईं। प्राइवेट स्कूल में स्टूडेंट्स के लिए पीने के पानी का कैसा इंतजाम है? देखा। फिर टॉयलेट की जांच की। फिर आपत्ति जताते हुए स्कूल के मालिक से कहा था- स्टूडेंट्स की संख्या आपके यहां बहुत है। उस हिसाब से टॉयलेट की संख्या कम है और गंदगी भी बहुत है। पूरा कैंपस काफी छोटा है। यह सही नहीं है। आपके स्कूल का रजिस्ट्रेशन कैंसिल करवाया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, यहां पर भी मैडम के साथ आए उनके खास शख्स ने एंट्री मारी। स्कूल मालिक से कहा कि मैडम को कुछ दे दीजिए नहीं तो सच में वो रजिस्ट्रेशन कैंसिल करवा देगी। इसके बाद 25 हजार रुपए स्कूल मालिक से वसूला गया था। तरीका-3ः बोरा में चावल कम क्यों है? रूबी कुमारी स्कूलों में जांच करने के लिए अक्सर टिफिन टाइम या उसके बाद जाती थी। ये वो वक्त होता है, जब मिड डे मील का खाना खाने के बाद अक्सर स्टूडेंट्स घर चले जाते हैं। स्कूलों में उनकी संख्या कम हो जाती है। वैसे टाइम में पहुंच कर वो प्रिंसिपल और टीचर्स को हड़काती हैं। पूछती हैं कि बच्चों की संख्या कम क्यों है? बैग की गिनती करवाती हैं? यही नहीं, स्कूल से जुड़े स्टाफ्स की मानें तो रूबी कुमारी मिड डे मील के तहत मिले चावल के सिल पैक बोरे का वजन करवाती थी। तय वजन से कम चावल होने पर प्रिंसिपल को निशाने पर लेती थी। बोलती थी ये कम कैसे हुआ? जबकि, प्रिंसिपल अपना पक्ष रखते हुए समझाने की कोशिश करते थे कि सिल पैक बोरे से चावल कम कैसे होगा? वो तो विभाग से जैसे आता है, वैसे ही है। मगर, मैडम उनकी बात नहीं सुनती थी? रिपोर्ट बनाने के नाम पर काली कमाई अक्सर करती थीं। मैडम के साथ आए लोग मेंटली प्रेशर बनाते थे। बोलते थे कि मैडम लिए बगैर मानेंगी ही नहीं। दो लोगों के जरिए होती थी वसूली रूबी कुमारी के भ्रष्टाचार में दो लोग हर वक्त साथ दे रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, इसमें किशनगंज का ही एक ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (BRP) और दूसरा उनका प्राइवेट ड्राइवर है। जांच के नाम पर रूबी कुमारी जब भी किसी सरकारी या प्राइवेट स्कूल में गईं, तब ये दोनों उनके साथ अक्सर रहते थे। अवैध रूप से रुपयों की डिमांड करना और थोड़ा कम कर रुपयों की उगाही करने का काम यही दोनों कर रहे थे। प्रिंसिपल, टीचर्स और प्राइवेट स्कूलों के मालिकों पर ये दोनों मेंटली प्रेशर बनाते थे। नाम न छापने की शर्त पर एक टीचर ने बताया, ‘अगर जांच एजेंसी DPO के दोनों दलालों से पूछताछ करती है तो कई और भी असलियत उनके सामने आ जाएगी।’ कवर हो जाता था गाड़ी पर लगा बोर्ड EOU की जांच में एक अहम बात सामने आई है। रूबी कुमारी जिस स्कॉर्पियो से चला करती हैं, उसके आगे एक बोर्ड लगा है। जिस पर जिला प्रोग्राम पदाधिकारी लिखा है। पर जांच में यह बात सामने आई कि जांच के दौरान स्कूल पहुंचने से पहले उस बोर्ड को कवर कर दिया जाता था। उसे उनका ड्राइवर या उनके साथ रहने वाला BRP छिपा देता था। ताकि किसी को उनकी पहचान पता न चले। इसके बाद स्कूल में पहुंच कर वो अपने टारगेट को पूरा करते थे, फिर वहां से निकल जाते थे। इस तरह की बात किशनगंज के ग्रामीण इलाकों के कई स्कूलों से सामने आई है। अब रूबी कुमारी के बारे में जानिए रूबी कुमारी मूल रूप से कटिहार के ऑफिसर्स कॉलोनी की रहने वाली हैं। पति गौरव कुमार रेलवे में 2004 से ही नौकरी कर रहे हैं। पहले हो असिस्टेंट लोको पायलट थे। पर अब कटिहार स्टेशन पर TC हैं। अब तक 68 लाख रुपए सैलरी के तौर पर कमा चुके हैं। इनका दो बेटा भी है। इनकी पढ़ाई पर अब तक 5 लाख रुपए खर्च हुआ है। रूबी कुमारी पहले नियोजित टीचर थीं। 2018 में उन्होंने BPSC की 56-59वीं की परीक्षा दी थी। जो पास कर गई। इसके बाद 2019 में शिक्षा विभाग को जॉइन की। पहली पोस्टिंग पूर्णिया में हुई। फिर 2023 में वहां से कटिहार ट्रांसफर हुआ और जिला प्रोग्राम पदाधिकारी बनी। इसके बाद ही 2025 में किशनगंज में ट्रांसफर हुआ। महज 7 साल की नौकरी में यह तीसरी पोस्टिंग थी। जहां भ्रष्टाचार के मामले में इसके उपर कानूनी शिकंजा कस गया। एक साल के अंदर ही खरीद ली थी स्कॉर्पियो रूबी कुमार ने 11.50 लाख की स्कॉर्पियो खरीद रखी थी। इसी से वो डेली चला करती थी। लेकिन, सरकार से इसने इसकी जानकारी छिपा कर रखी। इसकी जगह अपने पास स्कूटी को बताया था। इसमें चौंकाने वाली बात है कि परमानेंट सरकारी नौकरी में आने के महज एक साल के अंदर ही इस लग्जरी गाड़ी को रूबी ने खरीद ली थी। तीन बैंक अकाउंट में मिले मात्र 16 हजार रुपए EOU जब रूबी कुमारी और उसके पति गौरव कुमार की पूरी कुंडली खंगाल रही थी तब उनके तीन बैंक अकाउंट का पता चला। इसमें कुल 16 हजार रुपए ही जमा हैं। एक अकाउंट गौरव का है और दो अकाउंट रूबी का। पति के SBI वाले अकाउंट में मात्र 4,500 रुपए ही जमा मिले। इसी तरह महिला DPO के SBI अकाउंट में 3,500 और सेंट्रल बैंक के अकाउंट में 8 हजार रुपए ही जमा मिले। अब सवाल उठ रहा है कि भ्रष्टाचार कर काली कमाई करने वाली करोड़पति जिला प्रोग्राम ऑफिसर ने प्रॉपर्टी में रुपए इन्वेस्ट करने के अलावा कहां-कहां खपाए? जांच एजेंसी तीनों ही अकाउंट में हुए हर ट्रांजक्शन की हिस्ट्री को खंगाल रही है। लोन लिया और एक साल के अंदर भर भी दिया आम तौर पर जब कोई शख्स बैंक से लोन लेता है तो वो तय सालों के तहत हर महीने उसकी EMI जमा करता जाता है। 2025 में रूबी ने भी 10 लाख रुपए का लोन एक बैंक से लिया था। और रूबी ने महज एक साल के अंदर लोन के पूरे रुपये वो भी ब्याज सहित जमा कर दिया। बैंक से लिया लोन क्लोज कर दिया। कैसे दिए 22.50 लाख रुपए पति गौरव कुमार के नाम पर रूबी ने कटिहार के पॉश इलाके में 30 लाख रुपए में 3,200 स्क्वायर फीट जमीन ली। जिसका बाजार भाव इससे कहीं अधिक है। इस पर 2024 से G+4 अपार्टमेंट बनाने का काम शुरू हुआ। अब तक 2 करोड़ 20 लाख रुपए खर्च किए। इसमें रूबी ने 55 लाख रुपए हाउस लोन और गौरव ने 24.47 लाख रुपया पर्सनल लोन बैंक से लिया। लेकिन, जांच के दरम्यान EOU को पता चला कि इसमें 22.50 लाख रुपया बैंक को जमा भी किया गया है। अब सवाल उठ रहा है कि ये रुपए कहां से आए?
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‘मैडम को पैसे दीजिए, वरना कुछ से कुछ लिख देगी’:टीचरों-प्राइवेट स्कूल वालों को धमकाते थे DPO रूबी के दलाल, जानिए कैसे चलती थी ‘वसूली कंपनी’
