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दिल्ली की जज का रेप पीड़ित बच्ची को स्पेशल लेटर:लिखा- तुम्हारा बचपन लौटा नहीं सकते, लेकिन साहस याद रखेंगे, दोषी कभी आजाद नहीं होगा




दिल्ली के ट्रायल कोर्ट की जज रजनी रंगा ने 10 साल की रेप पीड़ित बच्ची के लिए फैसला सुनाने के बाद एक खास लेटर लिखा। इसमें उन्होंने बच्ची को भरोसा दिलाया कि उसकी बात कोर्ट ने सुनी है और जिस इंसान ने उसे नुकसान पहुंचाया, वह अब कभी जेल से बाहर नहीं आ पाएगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने अब इस लेटर को बच्ची या उसके परिवार तक पहुंचाने का आदेश दिया है। नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली DLSA को इसे प्रिंट कर दो हफ्ते के भीतर बच्ची तक पहुंचाने के साथ ₹10.50 लाख का मुआवजा देने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है। जज ने बच्ची को क्या लिखा ‘डियर चाइल्ड’ से शुरू हुआ लेटर ट्रायल कोर्ट की जज रजनी रंगा ने फैसले के अंत में सीधे बच्ची को संबोधित करते हुए लिखा कि जब उसने कहा था कि ‘अंकल को तब तक जेल में रखा जाए, जब तक वह बूढ़े न हो जाएं’, तब कोर्ट ने उसकी बात सुनी थी और उसकी मांग पर फैसला दिया है। ‘वह जेल में ही बूढ़ा होगा’ जज ने लिखा कि बच्ची जिसे ‘अंकल’ कहती थी, वह पूरी जिंदगी जेल में रहेगा। वह जेल में ही बूढ़ा होगा और वहीं उसकी जिंदगी खत्म होगी। वह बच्ची, उसकी छोटी बहन या किसी दूसरे बच्चे को दोबारा नुकसान नहीं पहुंचा सकेगा। ‘तुम सबसे बहादुर बच्ची हो’ जज ने बच्ची की हिम्मत की तारीफ करते हुए लिखा कि वह कोर्ट आई, उसने उस व्यक्ति की पहचान की जिसने उसे नुकसान पहुंचाया और सच बताया। उन्होंने कहा कि बच्ची चुप नहीं रही, बल्कि अपनी मां को भी बताया। उसकी इसी हिम्मत के कारण आरोपी किसी दूसरे बच्चे को नुकसान नहीं पहुंचा सकेगा। ‘अब अपनी जिंदगी जियो’ लेटर के आखिर में जज ने बच्ची से कहा कि अब वह अपनी जिंदगी जिए। स्कूल जाए, दोस्त बनाए, हंसे, खेले और सपने देखे। जज ने लिखा कि कोर्ट उसकी हिम्मत को हमेशा याद रखेगा। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के इस संदेश को ‘मैसेज ऑफ करेज’ यानी साहस का संदेश बताया। घटना के वक्त 7 साल की थी बच्ची यह घटना 23 जुलाई 2023 की है। उस समय बच्ची 7 साल की थी और अब उसकी उम्र 10 साल है। आरोपी सुमित शक्य के खिलाफ 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ गंभीर यौन अपराध और आपराधिक धमकी का मामला था। आरोपी को प्राकृतिक जीवन के बाकी समय तक जेल ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को POCSO के तहत आजीवन समय तक कठोर कारावास और ₹1 लाख जुर्माने की सजा दी। आपराधिक धमकी के मामले में 5 साल की कठोर कैद और ₹20 हजार जुर्माना लगाया गया। दोनों सजाएं साथ चलेंगी। बच्ची को ₹10.50 लाख मुआवजा ट्रायल कोर्ट ने बच्ची के लिए ₹10.50 लाख मुआवजा तय किया था। इसमें बच्ची और उसके परिवार को हुई परेशानी, अपराध की गंभीरता और उसके लंबे समय तक पड़ने वाले असर को ध्यान में रखा गया। हाईकोर्ट ने DLSA सचिव से मुआवजे के भुगतान की स्थिति पर रिपोर्ट भी मांगी है। हाईकोर्ट ने जमानत पर तत्काल राहत नहीं दी हाईकोर्ट ने आरोपी की सजा पर तत्काल रोक लगाने और उसे जमानत देने से इनकार किया। कोर्ट ने मामले में मौजूद सबूतों, जिसमें फोरेंसिक सबूत भी शामिल हैं, को देखते हुए इस स्तर पर सजा रोकने से इनकार किया। मामले में DLSA की रिपोर्ट पर अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी, जबकि अपील 20 जनवरी 2027 को सूचीबद्ध है।



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