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मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कांग्रेस का मार्च:सीवान में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए




सीवान में गुरुवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) को लेकर हल्ला बोल प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने पटेल चौक से जेपी चौक तक मार्च निकाला। इस दौरान हाथों में पार्टी के झंडे-बैनर लिए कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की। झमाझम बारिश के बावजूद कार्यकर्ता जेपी चौक पहुंचे और वहां प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ और ‘ज्ञानेश कुमार गद्दी छोड़ो’ समेत कई रोषपूर्ण नारे लगाए। रिपोर्ट के बाद बहस और तेज हुई कांग्रेस नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई और जेल भेजने की मांग की। सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुशील कुमार ने कहा कि पत्रकार रितिका चोपड़ा की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों पर चर्चा तेज हुई है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लंबे समय से जिन मुद्दों को उठा रहे हैं, उन पर अब सामने आई रिपोर्ट के बाद बहस और तेज हुई है। भारतीय निर्वाचन आयोग के तीन सदस्यीय पैनल में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दो अन्य चुनाव आयुक्त होते हैं। चुनाव आयोग कार्यालय के घेराव का कार्यक्रम प्रस्तावित रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14बार आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। जिलाध्यक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की मांग दोहराई। उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं को प्रभावित करने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता ने बताया कि 25 सितंबर को पटना समेत सभी राज्य मुख्यालयों में चुनाव आयोग कार्यालय के घेराव का कार्यक्रम प्रस्तावित है। महत्वपूर्ण निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए – चुनाव आयोग वहीं 28सितंबर को शहीद भगत सिंह की जयंती के अवसर पर सभी जिलों में डीएम कार्यालयों के घेराव की बात कही गई। जिला उपाध्यक्ष ने भाजपा पर संवैधानिक संस्थाओं को प्रभावित करने का आरोप लगाया।उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी। हालांकि, चुनाव आयोग ने सामने आई रिपोर्ट पर कहा है कि अलग-अलग सदस्यों की टिप्पणियां सामान्य विचार-विमर्श की प्रक्रिया का हिस्सा हैं और आयोग के महत्वपूर्ण निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।



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