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Kanya Sankranti 2026 | Sun Transit Virgo Puja Snan Daan Punya Vidhi


21 मिनट पहले

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17 सितंबर, गुरुवार को सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेगा। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को कन्या संक्रांति कहते हैं। संक्रांति पर सूर्य पूजा, स्नान, दान-पुण्य और पितरों से जुड़े धर्म-कर्म करने की परंपरा है।

ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, सूर्य देव जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तो उसे संक्रांति कहते हैं। सूर्य साल में 12 बार राशि बदलते हैं, इसलिए एक वर्ष में कुल 12 संक्रांतियां आती हैं। शास्त्रों में संक्रांति को भी पर्व की तरह महत्व दिया गया है। यही वजह है कि इस दिन बड़ी संख्या में लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और दान-पुण्य कार्य करते हैं।

संक्रांति पर कर सकते हैं ये शुभ काम

अभी बारिश का समय है, ऐसे में किसी सार्वजनिक जगह पर छायादार पेड़ का पौधा लगाना भी शुभ माना जाता है। पीपल को पितरों से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए इस दिन पीपल का पौधा लगाकर उसकी नियमित देखभाल करने से कुंडली के पितृ दोषों का प्रभाव कम किया जा सकता है। भगवान विष्णु के भक्त श्रीकृष्ण, श्रीराम के मंदिरों में तुलसी का पौधा लगा सकते हैं। शिव भक्त शिव मंदिर में बिल्व यानी बेल का पौधा लगा सकते हैं। पौधा लगाने के साथ उसकी देखभाल की जिम्मेदारी लेना भी जरूरी है।

संक्रांति पर दान करने का विशेष महत्व है। अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद लोगों को कपड़े, भोजन, जूते-चप्पल, छाता और दवाइयां जैसी जरूरी चीजें दान की जा सकती हैं। दान करते समय इस बात का ध्यान रखें कि सामान वास्तव में जरूरतमंद व्यक्ति के काम आए।

इस दिन गौसेवा भी की जा सकती है। किसी गौशाला में धन, हरा चारा या अनाज का दान करें।

हर व्यक्ति के लिए संक्रांति पर गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा जैसी पवित्र नदियों तक पहुंचना संभव नहीं होता। ऐसे में घर पर स्नान करते समय पानी में थोड़ा गंगाजल और काले तिल मिला सकते हैं।

स्नान के समय मन में पवित्र नदियों और तीर्थों का ध्यान करें। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति भाव से इस तरह स्नान करने से तीर्थ स्नान के समान पुण्य लाभ घर पर ही मिल सकता है।

सूर्य को ऐसे चढ़ाएं जल

कन्या संक्रांति पर सूर्य पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद तांबे के लोटे में पानी भरें। इसमें लाल फूल और थोड़े चावल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।

अर्घ्य देते समय ॐ सूर्याय नम: मंत्र का जप किया जा सकता है। सूर्य देव को गुड़ प्रिय माना जाता है, इसलिए इस दिन गुड़ का दान करना भी शुभ माना जाता है। तांबे के बर्तन का दान भी किया जा सकता है।

अभी बारिश का समय है, अगर बादलों की वजह से सुबह सूर्य दिखाई न दें, तो पूर्व दिशा की ओर मुंह करके सूर्य देव का ध्यान करते हुए अर्घ्य दिया जा सकता है।

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नौ ग्रहों का राजा सूर्य 17 सितंबर की रात बजे सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेगा। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को ज्योतिष में कन्या संक्रांति कहते हैं। सूर्य लगभग एक महीने तक कन्या राशि में ही रहेगा और 18 अक्टूबर को तुला राशि में प्रवेश करेगा। राशिफल पढ़ने के लिए क्लिक करें

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