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गया- तीन दिवसीय इस्लामिक इस्तेमा, 8 जिलों के लोग जुटे:बंगाल-यूपी-महाराष्ट्र के उलमा करेंगे तकरीर, गरीब युवक-युवतियों का निकाह भी होगा




गया जी के बेलागंज प्रखंड के चाकंद थाना क्षेत्र स्थित बारा गांव में तीन दिवसीय इस्लामिक इस्तेमा का आयोजन किया जा रहा है। इसमें बिहार के आठ जिलों से हजारों लोगों के शामिल होने की संभावना है। गुरुवार से शुरू हुए इस आयोजन में अकीदतमंदों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। रविवार दोपहर तक चलने वाले इस समागम में देश के अलग-अलग राज्यों से इस्लामिक विद्वान और उलमा शामिल हो रहे हैं। बंगाल के मौलाना शफी साहब, उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के मौलाना महमूदुल हसन साहब और महाराष्ट्र के अकोला से प्रोफेसर फारूक साहब की तकरीर कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण होंगे। आठ जिलों से पहुंच रहे अकीदतमंद आयोजन को ‘उमूमी जोड़’ नाम दिया गया है। इसमें रोहतास, भभुआ (कैमूर), औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, अरवल, नवादा और बिहारशरीफ (नालंदा) से लोग पहुंच रहे हैं। बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए प्रशासन और पुलिस भी अलर्ट है। आयोजन स्थल और आसपास के इलाकों में सुरक्षा और विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंतजाम किए गए हैं। पैगंबर की तालीम और इंसानियत का संदेश आयोजन मंडल से जुड़े लोगों के मुताबिक, इस्तेमा का मुख्य उद्देश्य पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं और संदेशों को लोगों तक पहुंचाना है। इसके जरिए समाज में इंसानियत, मोहब्बत, आपसी सहयोग और भाईचारे की भावना मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। वक्ताओं की तकरीर में एक-दूसरे के प्रति सम्मान, सामाजिक जिम्मेदारी और अमन-चैन बनाए रखने का संदेश दिया जाएगा। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में गरीब युवक-युवतियों का निकाह भी कराया जाएगा। समिति के अनुसार, यह कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अनुमति को लेकर प्रशासन और आयोजकों के बीच हुई थी बातचीत इस्तेमा शुरू होने से एक दिन पहले तक आयोजकों ने जिला प्रशासन से अनुमति नहीं ली थी। इस पर प्रशासन ने आयोजकों से सवाल किया तो उन्होंने बताया कि वे अनुमति नहीं लेते, बल्कि कार्यक्रम की सूचना देकर आयोजन करते हैं। इस जवाब पर जिला प्रशासन ने नाराजगी जताई और तत्काल आयोजन स्थल से टेंट व अन्य सामान हटाने का आदेश दिया। इसके बाद आयोजन समिति ने प्रशासन की ओर से मांगी गई विस्तृत जानकारी लिखित दस्तावेजों और प्रमाणों के साथ उपलब्ध कराई। गुरुवार देर रात प्रशासन ने आयोजन की अनुमति दी। इसके बाद शुक्रवार से कार्यक्रम शुरू हुआ। तीन राज्यों के विद्वानों की तकरीर होगी प्रमुख आकर्षण आयोजन में शामिल होने वाले प्रमुख विद्वानों में बंगाल के मौलाना शफी साहब, बस्ती के मौलाना महमूदुल हसन साहब और महाराष्ट्र के अकोला के प्रोफेसर फारूक साहब शामिल हैं। उनकी तकरीर के जरिए धार्मिक शिक्षा के साथ सामाजिक एकता और सद्भाव का संदेश दिया जाएगा। आयोजन समिति ने लोगों से कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित बनाने में सहयोग की अपील की है। प्रशासन की ओर से भी बाहर से आने वाले लोगों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने की तैयारी की गई है।



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