![]()
अररिया जिले के रानीगंज में पदस्थापित फायर फाइटर प्रदीप कुमार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद शुक्रवार को उनके पैतृक गांव श्रीचन्दपुर में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अपने लाल को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और अग्निशमन विभाग के अधिकारी व कर्मी पहुंचे। तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही परिजनों की चीत्कार से माहौल गमगीन हो गया। अंतिम संस्कार से पहले अग्निशमन विभाग के विभिन्न जिलों से पहुंचे अधिकारियों और कर्मियों ने प्रदीप को श्रद्धांजलि दी। बेगूसराय के जिला अग्निशमन पदाधिकारी अतुल कुमार ने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किया और गार्ड ऑफ ऑनर देकर सलामी दी। उन्होंने शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया। साथ ही प्रदीप की पत्नी और बेटे को तिरंगा भेंट कर विभाग की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। इस दौरान बिहार अग्निशमन सेवा बिहार पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सुमित कुमार, बेगूसराय के सहायक जिला अग्निशमन पदाधिकारी रंजन कुमार सिंह एवं रविन्द्र कुमार, प्रधान अग्निक अमरेंद्र कुमार, सब ऑफिसर पवन कुमार, अररिया के सब ऑफिसर चंदन शर्मा, प्रधान अग्निक प्रकाश कुमार, खगड़िया के प्रधान अग्निक अमलेश कुमार सहित बड़ी संख्या में अग्निशमन कर्मी मौजूद रहे। सड़क किनारे गड्ढे में मिला था शव जानकारी के अनुसार, बुधवार रात करीब 9 बजे प्रदीप कुमार खाना खाने के लिए होटल जाने की बात कहकर निकले थे। इसके बाद वे वापस नहीं लौटे। काफी देर तक उनके नहीं आने पर साथियों ने तलाश शुरू की। इस दौरान थाना से कुछ ही दूरी पर सड़क किनारे बने गड्ढे में उनका शव मिला। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, होटल जाने या वहां से लौटने के दौरान सड़क पार करते समय किसी अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी थी। टक्कर के बाद वे अनियंत्रित होकर सड़क किनारे गड्ढे में जा गिरे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और अग्निशमन विभाग में हलचल मच गई। गुरुवार अहले सुबह परिजनों को घटना की सूचना दी गई। इसके बाद रानीगंज पहुंचकर विभागीय अधिकारियों की देखरेख में शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पार्थिव शरीर को जिला मुख्यालय ले जाया गया, जहां विभाग की ओर से सलामी दी गई। इसके बाद पुलिस वाहन से शव को पैतृक गांव भेजा गया। संघर्षों के बीच हासिल की थी सरकारी नौकरी ग्रामीणों और परिजनों के अनुसार, प्रदीप कुमार का जीवन संघर्षों से भरा रहा। उनके पिता साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर किसान-मजदूर थे। वे खेती-बाड़ी और मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। प्रदीप बचपन से ही मेधावी और मेहनती थे। पढ़ाई के साथ वे खेती में भी पिता का हाथ बंटाते थे। मेहनत और संघर्ष के दम पर उन्होंने 28 जुलाई 2015 को अग्निशमन विभाग में फायर फाइटर के पद पर योगदान दिया। बिहटा में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद 2016 में उनकी पहली पदस्थापना नवादा में हुई। फरवरी 2020 में उनका तबादला बक्सर और 2024 में गया किया गया। नवंबर 2024 से वे अररिया जिले में पदस्थापित थे और वर्तमान में रानीगंज थाना में सेवा दे रहे थे। पत्नी, दो बेटे और एक बेटी को छोड़ गए पीछे प्रदीप कुमार अपने पीछे पत्नी, दो छोटे बेटे और एक बेटी को छोड़ गए हैं। साधारण मजदूर परिवार से निकलकर सरकारी सेवा तक पहुंचने वाले प्रदीप की असमय मौत से परिवार और गांव में शोक है। शुक्रवार को पैतृक आवास से उनका पार्थिव शरीर गंगा घाट ले जाया गया, जहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
Source link
राजकीय सम्मान के साथ फायर फाइटर प्रदीप का अंतिम संस्कार:अररिया में पोस्टेड थे; तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर बेगूसराय के पैतृक गांव पहुंचा
