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राहुल गांधी ने गुरुवार को महाराष्ट्र के कोल्हापुर के गोकुल दूध सहकारी चुनाव को लेकर BJP पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस समर्थित पैनल की जीत के बाद BJP ने बोर्ड में बहुमत बदलने के लिए नियम बदले। राहुल ने इसे दूध उत्पादकों के वोटों की चोरी बताया। 19 अक्टूबर को हुए चुनाव में कांग्रेस समर्थित पैनल ने 25 में से 13 सीटें जीती थीं। BJP समर्थित महायुति गठबंधन को 12 सीटें मिली थीं। महाराष्ट्र कैबिनेट ने चार सरकारी निदेशकों को वोटिंग अधिकारों के साथ नामित करने का प्रस्ताव मंजूर किया है। कांग्रेस का आरोप है कि इससे चुनावी नतीजा बदल सकता है। राहुल गांधी ने X पर लिखा, “गोकुल में दूध उत्पादकों ने BJP को हरा दिया। इसलिए BJP ने चुनाव के बाद नियम बदल दिए। चार निदेशक जोड़कर संख्या 12 से 16 कर दी और बहुमत छीन लिया।” उन्होंने इसे “दूध उत्पादकों के वोटों की चोरी” और “जनादेश में मिलावट” बताया। राहुल ने कहा कि सत्ता बचाने के लिए BJP हर जगह किसी भी हद तक जा रही है। राहुल गांधी ने कहा, “जो लोग दूध उत्पादकों के वोट चुराते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि किसान भूलते नहीं हैं।” महाराष्ट्र सरकार पर पवन खेड़ा का आरोप कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी प्रस्तावित बदलावों को लेकर महाराष्ट्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने दूध उत्पादकों के चुनावी जनादेश को कमजोर करने की कोशिश का आरोप लगाया। खेड़ा ने बुधवार को X पर कहा कि महाराष्ट्र सरकार गोकुल मिल्क फेडरेशन में दूध उत्पादकों के लोकतांत्रिक जनादेश को खुले तौर पर कमजोर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निर्वाचित बोर्ड की संरचना बदलने के लिए विधायी बदलावों का इस्तेमाल कर रही है। 19 अक्टूबर के चुनाव में कांग्रेस समर्थित पैनल ने 25 में से 13 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था। खेड़ा ने कहा कि महायुति समर्थित निदेशकों ने बैठक से अनुपस्थित रहकर अध्यक्ष का चुनाव रुकवा दिया था। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने 10 नवंबर को नए चुनाव का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि निर्वाचित बोर्ड को काम करने देने के बजाय राज्य कैबिनेट ने चार सरकारी निदेशकों को नामित करने का प्रस्ताव मंजूर किया है। इन निदेशकों को वोटिंग अधिकार भी दिए जाएंगे। खेड़ा के मुताबिक, इससे चुनाव का गणित बदल सकता है और दूध उत्पादकों का जनादेश पलट सकता है। सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात प्रस्तावित कदम पर सवाल उठाते हुए खेड़ा ने कहा, “बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार चुनाव के बाद केवल इसलिए नियम बदल सकती है, क्योंकि उसे नतीजा पसंद नहीं आया?” उन्होंने कहा, “हम लोकतांत्रिक जनादेश और सहकारी संस्थाओं की स्वायत्तता बचाने के लिए इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं।” कांग्रेस समर्थित पैनल को मिली थी जीत यह विवाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सतेज पाटील के नेतृत्व वाले कांग्रेस समर्थित राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी आघाड़ी की जीत के बाद शुरू हुआ। इस पैनल ने कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के चुनाव में 25 में से 13 सीटें जीतीं। इस संघ को आम तौर पर गोकुल डेयरी के नाम से जाना जाता है। BJP समर्थित महायुति गठबंधन में BJP, शिवसेना और NCP शामिल हैं। इस गठबंधन ने 12 सीटें जीतीं। नतीजे आधिकारिक तौर पर 19 अक्टूबर 2026 को घोषित किए गए थे। इससे महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन को झटका लगा था। यह चुनाव सहकारी दूध उत्पादक संघ के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का नियंत्रण तय करने के लिए हुआ था। यह संघ लोकप्रिय गोकुल डेयरी ब्रांड के तहत काम करता है।
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राहुल गांधी का गोकुल डेयरी चुनाव में वोट-चोरी का आरोप:कहा- BJP ने बहुमत पाने के लिए चुनाव के बाद नियम बदले
