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'20 लाख के बिल भुगतान में मांगी 3 लाख रिश्वत':बातचीत में 1.30 लाख पर आया मामला, शिकायत पर निगरानी ने दर्ज किया केस




सरकारी निर्माण कार्यों में सामग्री की आपूर्ति करने वाले एक कारोबारी के करीब 20 लाख रुपये के बिल भुगतान में रिश्वत का मामला सामने आया है। गुरुआ प्रखंड में पंचायत सरकार भवन के निर्माण के लिए छड़, सीमेंट, गिट्टी और बालू की आपूर्ति करने वाले कारोबारी ने प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी पर बिल भुगतान के एवज में तीन लाख रुपये मांगने का आरोप लगाया है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की सत्यापन रिपोर्ट में रिश्वत की मांग से जुड़ी बातचीत का ऑडियो रिकॉर्ड किए जाने का उल्लेख है। सत्यापन के दौरान कथित रिश्वत की रकम घटकर 1.30 लाख रुपये तक पहुंच गई। इस मामले में डीपीआरओ अविनाश कुमार के खिलाफ निगरानी ब्यूरो के पटना कार्यालय में केस दर्ज कर लिया है। केस 3 अक्टूबर को दर्ज किया गया है। 20 लाख के बिल पर 15 प्रतिशत कमीशन की मांग निगरानी ब्यूरो की सत्यापन रिपोर्ट के अनुसार, गुरुआ प्रखंड के चई गांव निवासी रुस्तम राज गोलू आरकेजी कंस्ट्रक्शन ग्रुप के प्रोपराइटर हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में उनकी फर्म ने सिमारू पंचायत में पंचायत सरकार भवन के निर्माण के लिए करीब 20 लाख रुपये की सामग्री की आपूर्ति की थी। निर्माण कार्य पंचायत के मुखिया और पंचायत सेवक की देखरेख में कराया जा रहा था। सामग्री की आपूर्ति के बाद जब कारोबारी ने भुगतान के लिए पंचायत के मुखिया और पंचायत सेवक से संपर्क किया तो उन्हें बताया गया कि निर्माण कार्य की एमबी और बिल प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी गुरुआ को सौंप दिए गए हैं। भुगतान अब उन्हीं के स्तर से होना है। आरोप है कि इसके बाद कारोबारी की मुलाकात प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी अविनाश कुमार से हुई। उन्होंने बिल भुगतान के लिए कुल राशि का 15 प्रतिशत, यानी करीब तीन लाख रुपये देने की मांग की। कारोबारी ने इतनी बड़ी रकम एक साथ देने में असमर्थता जताई। इसके बाद अधिकारी ने जितना संभव हो, उतनी रकम देने की बात कही। बातचीत में 3 लाख से 1.30 लाख तक पहुंची रकम रिश्वत की मांग के आरोपों का सत्यापन करने के लिए निगरानी की टीम एक अक्टूबर को परिवादी के साथ गुरुआ प्रखंड कार्यालय पहुंची। रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यालय कक्ष में अधिकारी और कारोबारी के बीच हुई बातचीत को गुप्त रूप से रिकॉर्ड किया गया।
बातचीत में कारोबारी ने 15 प्रतिशत की मांग पूरी नहीं होने की बात कही। इस पर अधिकारी ने रकम कम-ज्यादा करने और दूसरे कामों में भी भुगतान की बात छेड़ी। कारोबारी ने अपनी परेशानी बताते हुए रकम कम करने का अनुरोध किया। बातचीत के दौरान अधिकारी ने 1.40 लाख रुपये देने की बात कही। इसके बाद कारोबारी ने 10 हजार रुपये कम करने का आग्रह किया। निगरानी की रिपोर्ट के अनुसार अंत में अधिकारी ने 1.30 लाख रुपये देने की बात कही। रकम देने के लिए सोमवार का समय तय होने और कार्यालय के एक कर्मचारी मनोज के माध्यम से पैसे पहुंचाने की चर्चा भी रिकॉर्डिंग में सामने आई है। निगरानी की रिपोर्ट में इस बातचीत को रिश्वत की मांग के सत्यापन का आधार बताया गया है। इसी आधार पर केस दर्ज किया गया है। केस दर्ज होते ही गुरुआ प्रखण्ड कार्यालय में हड़कम्प मचा है।



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