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स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र:5 बातें ध्यान रखेंगे, तो धन, पद, प्रतिष्ठा और सुख-सुविधाओं के आकर्षणों से बच सकते हैं


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  • Avdheshanand Giri Maharaj Life Lesson. Knowledge Reveals The Truth; We Should Not Chase Comforts; If You Keep These Five Things In Mind, You Can Resist The Temptations Of Wealth, Power, Prestige, And Material Comforts.

हरिद्वार2 घंटे पहले

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जब हमारे पास सत्य पर आधारित विचार होते हैं, तब हम जीवन की वास्तविकता को सही ढंग से समझने लगते हैं। यह विचार हमें भ्रम, अज्ञान और बाहरी आकर्षणों से दूर रखते हैं।

1. स्वाध्याय से विवेक की प्राप्ति होती है। स्वाध्याय का अर्थ केवल शास्त्रों को पढ़ना नहीं, बल्कि उनके अर्थ को समझकर अपने जीवन में उतारना है। जब हम नियमित स्वाध्याय करते हैं, तब हमारे भीतर उचित और अनुचित, सत्य और असत्य, स्थायी और अस्थायी के बीच अंतर करने की क्षमता विकसित होती है।

2. हमारी प्रज्ञा और मेधा का विकास होता है। प्रज्ञा का अर्थ है गहरी अंतर्दृष्टि और मेधा का अर्थ है समझने, विचार करने और ज्ञान को धारण करने की क्षमता। जब ये दोनों विकसित होती हैं, तब हम केवल जानकारी के आधार पर नहीं, बल्कि सत्य की समझ के आधार पर निर्णय लेते हैं।

3. जब सत्य हमारी बुद्धि में दृढ़ता से स्थापित हो जाता है, तब हमारी सोच और दृष्टिकोण बदल जाते हैं। हम बाहरी परिस्थितियों से प्रभावित होकर अपने सिद्धांतों को नहीं छोड़ते, बल्कि विवेक के आधार पर अपने आचरण को निर्धारित करते हैं।

4. बाहरी आकर्षणों का प्रभाव समाप्त होना धन, पद, प्रतिष्ठा, सुख-सुविधाएं और भौतिक आकर्षण तभी हमें विचलित करते हैं, जब हमारा मन उनसे अत्यधिक जुड़ा होता है। सत्य का बोध होने पर हम इन पदार्थों का उपयोग तो करते हैं, लेकिन उनके मोह में बंधकर अपनी शांति नहीं खोते।

5. जिस प्रकार समुद्र या नदी में खींची गई लकीर जल के प्रवाह में तुरंत मिट जाती है, उसी प्रकार समझदार व्यक्ति के मन पर संसार के आकर्षण स्थायी प्रभाव नहीं छोड़ पाते। यही सच्चे ज्ञान की पहचान है।

आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि का जीवन सूत्र जानने के लिए ऊपर दिए गए फोटो पर क्लिक करें।

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