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नेपाल के प्रसिद्ध गढ़ी माई मंदिर में विजयादशमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। सुबह से ही भक्त कतारबद्ध होकर मां के दर्शन और पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मंदिर परिसर में भारत और नेपाल, दोनों देशों से आए श्रद्धालु दिखाई दे रहे हैं। बिहार के पूर्वी चंपारण यानी मोतिहारी समेत अलग-अलग जिलों से लोग यहां मां का आशीर्वाद लेने पहुंचे हैं। पंजाब और अन्य इलाकों से आए भक्त भी परिवार के साथ पूजा करने पहुंचे हैं। श्रद्धालुओं के बीच गढ़ी माई मंदिर को लेकर गहरी आस्था है। भक्तों का मानना है कि सच्चे मन से मां के दरबार में मांगी गई मुराद पूरी होती है। कोई परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना कर रहा है, तो कोई अपनी मनोकामना लेकर मां के दरबार में पहुंचा है। कई श्रद्धालु ऐसे भी हैं, जो हर साल यहां दर्शन करने आते हैं। भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित यह मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं और हर पांच साल पर लगने वाले बड़े मेले के लिए भी जाना जाता है। मेले के दौरान नेपाल के अलावा भारत और दूसरे देशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पहले मंदिर से जुड़ी तस्वीरें देखिए… ‘प्राचीन धार्मिक स्थल पहुंचकर खुशी मिली’ नवरात्र के दौरान गढ़ी माई मंदिर में नौ दिनों तक पूजा-अर्चना की जाती है। महाष्टमी से लेकर विजयादशमी तक यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है। विजयादशमी के दिन भी भक्त मां के दर्शन करने, पूजा कराने और अपनी मनोकामनाएं रखने के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में परिवार के साथ आए श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते नजर आते हैं। कोई बच्चों के साथ मां के दर्शन करने पहुंचा है, तो कोई अपने परिवार की खुशहाली की कामना कर रहा है। दूर-दराज से आए लोगों के लिए मंदिर तक पहुंचना केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था से जुड़ा अनुभव भी है। मोतिहारी से आए वासुदेव सिंह ने बताया कि वे मां के दर्शन करने पहुंचे हैं। उनके मुताबिक, यहां की मान्यता के कारण श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं। उन्होंने कहा कि मां की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, इसी विश्वास के साथ वे भी दर्शन करने आए हैं। पंजाब के लुधियाना से आए करण शर्मा ने भी मंदिर में दर्शन के बाद खुशी जताई। उन्होंने कहा कि परिवार के साथ यहां आकर उन्हें अच्छा लगा। उनके मुताबिक, यह प्राचीन धार्मिक स्थल है और भक्त सच्चे मन से यहां आकर अपनी मनोकामना रखते हैं। मोतिहारी से लेकर पंजाब तक के भक्त पहुंचे गढ़ी माई मंदिर की खासियत यह है कि यहां केवल नेपाल के स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि भारत के कई राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। बिहार के पूर्वी चंपारण और आसपास के इलाकों से आने वाले भक्तों के लिए यह मंदिर विशेष धार्मिक महत्व रखता है। सीमा पार होने के बावजूद मां के प्रति आस्था उन्हें यहां खींच लाती है। मंदिर में मिले श्रद्धालुओं ने बताया कि वे परिवार और परिचितों के साथ दर्शन करने आए हैं। कुछ लोग अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद मां के दरबार में धन्यवाद देने पहुंचते हैं, जबकि कुछ अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए पूजा-अर्चना करते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि मां के दर्शन से मन को शांति मिलती है। परिवार के साथ धार्मिक स्थल पर आने से उन्हें सकारात्मक अनुभव होता है। यही वजह है कि नवरात्र और विजयादशमी जैसे अवसरों पर मंदिर में भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। गढ़ी माई मंदिर की प्रसिद्धि का एक बड़ा कारण यहां हर पांच साल पर आयोजित होने वाला मेला भी है। इस मेले में लाखों लोगों के पहुंचने की मान्यता है। उस दौरान मंदिर और आसपास के इलाके में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। हालांकि, सामान्य दिनों और नवरात्र के दौरान भी यहां भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। पुजारी बोले- सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होने का विश्वास गढ़ी माई मंदिर के पुजारी शिव चौधरी के मुताबिक, मां के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। भक्त अपनी मनोकामना लेकर यहां आते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्र के दौरान भी मंदिर में मां की आराधना की जाती है। विजयादशमी पर भक्तों की आवाजाही के बीच पूजा-पाठ का सिलसिला जारी रहता है। पुजारी बताते हैं कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां उनकी प्रार्थना सुनती हैं। यही वजह है कि लोग दूर-दराज से यहां पहुंचते हैं। पांच साल पर लगने वाले मेले के दौरान भी मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। मंदिर की परंपराओं और इतिहास को लेकर स्थानीय लोगों में कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं। हालांकि, मंदिर की स्थापना और इससे जुड़ी प्राचीन कथाओं के बारे में पुजारी से बातचीत में सभी तथ्यों की स्पष्ट पुष्टि नहीं हो सकी। ऐसे में मंदिर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को लेकर किसी एक कथा को प्रमाणित इतिहास के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। हर पांच साल पर लगता है बड़ा मेला गढ़ी माई मंदिर की पहचान हर पांच साल पर लगने वाले बड़े मेले से भी जुड़ी है। इस दौरान नेपाल के अलग-अलग हिस्सों के अलावा भारत से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्तों के बीच यह मेला धार्मिक आस्था का बड़ा आयोजन माना जाता है। मेले के समय मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है। अलग-अलग क्षेत्रों से आए श्रद्धालु मां के दर्शन करते हैं और पूजा-अर्चना में शामिल होते हैं। इस आयोजन के कारण गढ़ी माई मंदिर की पहचान नेपाल के बाहर भी बनी हुई है। हालांकि, पांच साल पर लगने वाला बड़ा मेला और नवरात्र के दौरान होने वाली पूजा अलग-अलग अवसर हैं। नवरात्र में भी मंदिर में भक्त आते हैं, जबकि बड़े मेले के समय श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। परिवार के साथ दर्शन करने पहुंच रहे लोग मंदिर में कई श्रद्धालु परिवार के साथ पहुंचे। उनका कहना है कि मां के दर्शन से उन्हें मानसिक शांति मिलती है। कुछ भक्तों ने बताया कि वे हर साल यहां आने की कोशिश करते हैं। उनके लिए यह यात्रा धार्मिक परंपरा का हिस्सा बन चुकी है। एक श्रद्धालु ने बताया कि वे परिवार के साथ मां के दर्शन करने आए हैं। उनके मुताबिक, मंदिर में पूजा-अर्चना करने से उन्हें खुशी मिलती है और वे परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं। दूर से आए श्रद्धालुओं के लिए मंदिर तक पहुंचने में समय और दूरी लगती है, लेकिन मां के प्रति विश्वास उन्हें यहां आने के लिए प्रेरित करता है। बिहार के अलग-अलग इलाकों से आए भक्तों के साथ दूसरे राज्यों के श्रद्धालुओं की मौजूदगी मंदिर की व्यापक धार्मिक पहचान को दिखाती है। भारत-नेपाल के श्रद्धालुओं को जोड़ता है आस्था का यह केंद्र गढ़ी माई मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां की आस्था किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है। नेपाल में स्थित होने के बावजूद बिहार और भारत के दूसरे हिस्सों से लोग यहां पूजा करने पहुंचते हैं। भाषा, क्षेत्र और दूरी की सीमाओं के बीच मां के प्रति विश्वास लोगों को एक जगह जोड़ता है। विजयादशमी पर मंदिर में पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए पूजा-अर्चना और मां के दर्शन का विशेष महत्व है। कोई परिवार की खुशहाली मांग रहा है, कोई मनोकामना पूरी होने की उम्मीद लेकर आया है, तो कोई हर साल की धार्मिक परंपरा निभाने के लिए यहां पहुंचा है। नवरात्र के नौ दिनों की आराधना के बाद विजयादशमी के दिन भी गढ़ी माई मंदिर में भक्तों की आस्था बनी हुई है। दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु मां के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। यही विश्वास इस मंदिर को नेपाल के साथ-साथ बिहार और भारत के कई हिस्सों के लोगों के लिए भी एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र बनाता है।
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नेपाल गढ़ी माई मंदिर में विजयादशमी पर बिहारियों की भीड़:मोतिहारी से पंजाब तक पहुंचे भक्त; हर 5 साल पर लगता है बड़ा मेला
