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गांधी जयंती के अवसर पर बक्सर केंद्रीय कारा और मुक्त कारागार से सात बुजुर्ग कैदियों को रिहा किया गया। राज्य सरकार के फैसले के तहत सभी को परिहार का लाभ दिया गया। रिहा होने वाले बंदियों की उम्र 73 से 93 वर्ष के बीच है। जेल से बाहर निकलते समय किसी के हाथ में गीता थी, तो किसी के गले में माला। लंबे समय बाद परिवार के बीच लौटने की खुशी कई चेहरों पर दिखी। परिजनों के लिए भी यह दिन वर्षों के इंतजार के बाद अपने बुजुर्गों से मिलने का रहा। व्हीलचेयर पर बाहर आए रामाश्रय, परिजनों को देखकर रो पड़े रिहा होने वालों में 80 वर्षीय रामाश्रय कोईरी भी शामिल थे। वह व्हीलचेयर पर जेल से बाहर निकले। बाहर इंतजार कर रहे परिजनों को देखते ही वह भावुक हो गए और खुद को रोक नहीं पाए। परिजनों से लंबे समय बाद मिलन के इस पल ने माहौल को भावुक कर दिया। जेल से बाहर निकलते समय सभी रिहा बंदियों को गीता दी गई और माला पहनाकर विदा किया गया। बंदियों ने सरकार के फैसले के लिए धन्यवाद जताया। 17 साल बाद दादा को देखकर पोती की आंखों में आए आंसू रिहा होने वालों में 84 वर्षीय हरिवंश राम भी थे। वह अपहरण के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। करीब 17 साल बाद जब उनकी पोती संगीता कुमारी ने उन्हें देखा तो उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े। वहीं, शिवानी भी अपने नाना को पहली बार देखकर बेहद खुश नजर आई। लंबे समय बाद परिवार के बुजुर्ग की घर वापसी ने पूरे परिवार को भावुक कर दिया। केंद्रीय और मुक्त कारागार से हुई रिहाई केंद्रीय कारा, बक्सर से हरिवंश राम (84), रामवृक्ष कोईरी (93), रामाश्रय कोईरी (80) और सत्यनारायण राम (83) को रिहा किया गया। वहीं, मुक्त कारागार, बक्सर से विश्वनाथ यादव (73), हंसराज राम उर्फ हंसराज चमार (81) और बलराम सिंह (78) को कारामुक्त किया गया। गांधी जयंती पर हुई इन सात बुजुर्ग बंदियों की रिहाई ने उन्हें वर्षों बाद परिवार के बीच लौटने का अवसर दिया। किसी के हाथ में गीता और गले में माला थी, तो किसी परिवार की आंखों में वर्षों बाद अपने बुजुर्ग को सामने पाकर खुशी के आंसू थे।
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बक्सर जेल से 7 बुजुर्ग कैदी रिहा:व्हीलचेयर पर निकले, रो पड़े, 17 साल बाद दादा को देख पोती के छलके आंसू
