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कोलकाता5 मिनट पहले
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कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने गुरुवार को ममता बनर्जी को दोबारा कांग्रेस में शामिल होने का न्योता दिया। कोलकाता में मीडिया से चर्चा के बीच उन्होंने ममता से कहा कि उन्हें बचे हुए TMC विधायकों और सांसदों के साथ कांग्रेस में शामिल हो जाना चाहिए।
चौधरी ने कहा कि कांग्रेस, बंगाल में ममता बनर्जी का नेतृत्व स्वीकार करने और उनके साथ काम करने को तैयार है। उन्होंने कांग्रेस हाईकमान से भी इस दिशा में कदम उठाने की अपील की।
उन्होंने ममता बनर्जी से 6 अक्टूबर के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव जैसी पहल करते हुए रेजीनगर में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने को कहा।
चौधरी ने बताया कि TMC के विधानसभा और संसदीय दलों में अलग-अलग बगावत हो चुकी है। इसलिए अब पार्टी के लिए अलग संगठन बनाए रखने की जरूरत नहीं है।
ममता से कांग्रेस में लौटने की अपील
पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा- “विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC में ज्यादा कुछ नहीं बचा है।”
ममता बनर्जी ने करीब तीन दशक पहले कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस बनाई थी। चौधरी ने कहा, “हम ममता बनर्जी से सभी बचे हुए विधायकों और सांसदों के साथ कांग्रेस में शामिल होने की अपील करेंगे।”
उन्होंने कहा, “मैं कांग्रेस हाईकमान से भी अपील करूंगा कि उन्हें पार्टी में वापस आने दिया जाए। हम बंगाल में उनके नेतृत्व को स्वीकार करेंगे और उनके साथ काम करेंगे।”
चौधरी ने TMC के एक गुट की ओर से नंदीग्राम में कांग्रेस को हाल में दिए समर्थन का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को रेजीनगर में भी ऐसा ही कदम उठाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “दोस्ताना पहल के तौर पर, जैसे उन्होंने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन किया, वैसे ही रेजीनगर में भी कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देना चाहिए।”
नंदीग्राम में कांग्रेस को समर्थन
नंदीग्राम में ममता बनर्जी के गुट के उम्मीदवार ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद चुनाव मैदान से नाम वापस ले लिया था।
गुट के पास उम्मीदवार नहीं बचने के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया था।
यह घटनाक्रम चुनाव आयोग की ओर से प्रतिद्वंद्वी TMC गुटों को नए नाम और चुनाव चिह्न आवंटित करने के कुछ घंटे बाद हुआ। दोनों गुटों के बीच मूल पार्टी पहचान को लेकर विवाद चल रहा है।
TMC में विधानसभा और संसद के स्तर पर बगावत
2026 के विधानसभा चुनाव में 294 सदस्यीय विधानसभा में TMC को 80 सीटें मिली थीं। इन चुनावों में BJP सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।
चुनाव नतीजों के कुछ ही हफ्तों बाद TMC विधायक दल में भी बंटवारा हो गया। 58 बागी विधायकों ने निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाने का समर्थन किया।
विधानसभा अध्यक्ष ने इस प्रतिद्वंद्वी गुट को मान्यता दे दी। इसके बाद TMC के संसदीय दल में भी बगावत शुरू हो गई।
बागी सांसदों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती दी। विधानसभा के बागी अलग विधायी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
वहीं, बागी सांसदों का समूह कम चर्चित NCPI के करीब चला गया है। इस समूह ने केंद्र में BJP के नेतृत्व वाले NDA को समर्थन दिया है।
विधानसभा और संसद में एक साथ हुए इस टूट ने मामले को व्यापक बना दिया है। अब यह विवाद TMC की राजनीतिक पहचान, नेतृत्व और भविष्य को लेकर है।
अधीर के बयान पर TMC की प्रतिक्रिया
चौधरी ने ममता बनर्जी के कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन के साथ हालिया जुड़ाव को भी अपनी अपील से जोड़ा।
उन्होंने कहा, “जब उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन में सहारा लिया है, तो उन्हें पार्टी में शामिल हो जाना चाहिए। बंगाल में हम कांग्रेस में आपके नेतृत्व में काम करेंगे।”
चौधरी ने ममता बनर्जी से “अपना बोझ पीछे छोड़कर” कांग्रेस में आने को कहा। इसे उनके भतीजे और TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की ओर इशारा माना गया।
हालांकि, TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा कि पार्टी ऐसे प्रस्ताव पर तभी विचार करेगी, जब कांग्रेस नेतृत्व की ओर से औपचारिक प्रस्ताव आएगा।
रॉय ने कहा, “चौधरी ने वही कहा, जो उन्हें लगा। हमें इस पर कुछ नहीं कहना है। TMC अब एक अलग पार्टी है।”
उन्होंने कहा, “अगर कांग्रेस आधिकारिक प्रस्ताव लेकर आती है, तो हम पार्टी में इस पर चर्चा करेंगे। TMC INDIA गठबंधन का पूरी तरह हिस्सा है।”
चौधरी की “बोझ” वाली टिप्पणी पर रॉय ने कहा कि अभिषेक बनर्जी के बिना पार्टी को लेकर कोई फैसला नहीं हो सकता।
रॉय ने कहा, “वह हमारे नेता और राष्ट्रीय महासचिव हैं।”
रॉय के बयान से चौधरी के निजी प्रस्ताव और कांग्रेस नेतृत्व की ओर से संभावित औपचारिक पहल के बीच अंतर साफ हुआ। उन्होंने यह भी दोहराया कि TMC INDIA गठबंधन की अलग पार्टी है।
BJP ने कांग्रेस-TMC बातचीत पर निशाना साधा
BJP ने कांग्रेस और TMC के बीच हुई इस बातचीत को लेकर कहा कि तृणमूल कांग्रेस का राजनीतिक उद्देश्य खत्म हो चुका है।
BJP के पश्चिम बंगाल प्रवक्ता देबजीत सरकार ने कहा, “TMC का जन्म CPI(M) से लड़ने के लिए कांग्रेस से अलग होकर हुआ था। TMC इसी मुद्दे के आधार पर सत्ता में आई थी।”
उन्होंने कहा, “अब जब TMC खुद सत्ता से बाहर है, तो उसके पास कोई दूसरा उद्देश्य नहीं बचा है।”
सरकार ने कहा, “वे कांग्रेस में शामिल होंगे या नहीं, यह उनका फैसला है। हम कांग्रेस, TMC और CPI(M) से लड़ने के लिए तैयार हैं।”
कांग्रेस से अलग होकर बनी थी TMC
चौधरी के प्रस्ताव के पीछे TMC का राजनीतिक इतिहास भी जुड़ा है। ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर TMC बनाई थी।
इसके बाद TMC ने कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट, दोनों को चुनौती देते हुए अपनी राजनीतिक पहचान बनाई। 2011 में पार्टी ने लेफ्ट फ्रंट का 34 साल पुराना शासन खत्म किया था।
TMC 15 साल तक सत्ता में रही। 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद BJP सरकार चला रही है।
TMC आंतरिक विभाजन का सामना कर रही है। वहीं, कांग्रेस बंगाल में अपनी राजनीतिक जगह वापस पाने की कोशिश कर रही है।
संभावित विलय सिर्फ दो विपक्षी दलों के बीच चुनावी समझौता नहीं होगा। इससे यह सवाल फिर उठेगा कि सत्ता गंवाने और विधानसभा-संसदीय दलों में टूट के बाद TMC अपनी अलग संगठनात्मक पहचान बचा पाएगी या नहीं।
ममता बनर्जी के लिए चौधरी का प्रस्ताव राजनीतिक रूप से असामान्य समय में आया है। कांग्रेस छोड़कर TMC बनाने वाली नेता को अब कांग्रेस में लौटने का न्योता दिया जा रहा है।
कांग्रेस ने बंगाल में उनके नेतृत्व में काम करने की पेशकश की है। ममता बनर्जी के कांग्रेस छोड़कर TMC बनाने के 28 साल बाद चौधरी ने अब इसके उलट राजनीतिक सफर का प्रस्ताव रखा है।
इस प्रस्ताव के तहत कांग्रेस और TMC के बचे हुए संगठन एक ही राजनीतिक छतरी के नीचे आ सकते हैं।

