37 मिनट पहले
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25 सितंबर, आज अनंत चतुर्दशी पर गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन होगा। दिनभर में कभी भी विसर्जन कर सकते हैं। ग्रंथों के नियम कहते हैं सूर्यास्त से पहले ही प्रतिमाओं का विसर्जन होना चाहिए।
मिट्टी की छोटी प्रतिमा का विसर्जन घर में भी किया जा सकता है। इसके लिए साफ पानी से भरा बड़ा बर्तन लें। पूजा के बाद प्रतिमा उसमें रखें और मिट्टी को गलने दें। बाद में मिट्टी बागवानी में काम आ सकती है।
गणेश पुराण में मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजा करने और अनुष्ठान पूरा होने पर जल में विसर्जित करने का जिक्र है। हालांकि, मिट्टी और पानी का दोबारा इस्तेमाल तभी करें, जब प्रतिमा में पीओपी और केमिकल रंग न मिले हो।
पार्वती को हिमालय ने बताई थी मिट्टी के गणेश की पूजा गणेश पुराण के अनुसार पार्वती अपने पिता हिमालय से गणेश उपासना की विधि पूछती हैं। हिमालय उन्हें साफ, चिकनी और कंकड़ रहित मिट्टी से प्रतिमा बनाकर पूजने की विधि बताते हैं। मिट्टी से बनी इस प्रतिमा को पार्थिव गणेश कहते हैं। आगे व्रत के समापन पर प्रतिमा को छत्र, ध्वज और पताकाओं के साथ नदी-तालाब में विसर्जित करने और वाद्य-संगीत के साथ लौटने का जिक्र है।


पृथ्वी और जल सहित पांचों तत्वों का स्वरूप हैं गणेश बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र के प्रो. विनय कुमार पांडेय बताते हैं कि गणेशजी पूरी सृष्टि के आधार हैं। मिट्टी की प्रतिमा का जल में विलीन होना प्रकृति में लौटने के इसी भाव से जुड़ता है। गणपति अथर्वशीर्ष में गणेशजी को पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश का स्वरूप कहा गया है। इसमें पूरे जगत की उत्पत्ति, स्थिति और अंत में लीन होने का आधार भी गणेशजी को बताया है। गणेश पुराण की स्तुति में अग्नि, सूर्य, पृथ्वी, जल, समुद्र, चंद्रमा, आकाश, वायु, वृक्ष और जीवों की उत्पत्ति उनसे कही गई है।
उत्सव की याद को हरियाली में बदलें, दूर्वा और तुलसी का पौधा ही लगाना जरूरी नहीं विसर्जन के बाद इस्तेमाल लायक साफ मिट्टी में पौधा लगाकर गणेशोत्सव की याद सहेज सकते हैं। पेड़ लगाने का धार्मिक महत्व भी है। अग्नि पुराण में पेड़ और उद्यान लगाने को पुण्य देने वाला काम बताया गया है। पद्म पुराण के अनुसार फूलों से देवताओं, पत्तों से पितरों और छाया से अतिथियों की सेवा होती है। विसर्जन के बाद मिट्टी में सिर्फ दूर्वा और तुलसी का पौधा ही लगाना जरूरी नहीं है। गमले और बगीचे की जगह के हिसाब से कोई दूसरा पौधा भी लगा सकते हैं। पौधे की जरूरत के अनुसार दूसरी मिट्टी भी मिला सकते हैं।
प्रतिमा की विदाई के बाद भी जारी रखें अच्छे काम का संकल्प प्रो. पांडेय के मुताबिक, गणेश स्थापना के समय अच्छे काम करने और बुरी आदतें छोड़ने का जो संकल्प लिया जाता है, उसे विसर्जन के बाद जीवन में उतारना चाहिए। गणेशजी बुद्धि, विवेक और सही निर्णय के देवता माने जाते हैं। उत्सव के दौरान लिए गए अच्छे संकल्प को आगे भी निभाना गणेश उपासना को रोजमर्रा के जीवन से जोड़ता है।

