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आग से सुरक्षा रामभरोसे:पटना के 8 बड़े थानों में फायर सेफ्टी का इंतजाम नहीं, करोड़ों के वाहनों और केस रिकॉर्ड पर खतरा




इन थानों में व्यवस्था नहीं- कोतवाली, सचिवालय, शास्त्रीनगर, बुद्धा कॉलोनी, कदमकुआं, बहादुरपुर, मालसलामी और आलमगंज। कानून व्यवस्था का जिम्मा संभालने वाले शहर के थाने ही आग से सुरक्षा के मोर्चे पर ‘रामभरोसे’ हैं। कोतवाली और सचिवालय समेत पटना के 8 बड़े थानों में फिलहाल प्राथमिक अग्निशमन (फायर सेफ्टी) की पुख्ता व्यवस्था नहीं है। इन थानों में रोजाना सैकड़ों फरियादी आते हैं, पुलिसकर्मी 24 घंटे ड्यूटी पर रहते हैं और मालखानों में मुकदमों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज एवं साक्ष्य जमा हैं। परिसर में करोड़ों रुपए कीमत के सैकड़ों जब्त वाहन कबाड़ की शक्ल में खड़े हैं, जिनमें बचा पेट्रोल-डीजल बारूद की तरह काम कर सकता है। ऐसे में यदि शॉर्ट-सर्किट या अन्य वजह से आग भड़कती है तो उस पर शुरुआती स्तर पर काबू पाने का कोई साधन इन परिसरों के पास नहीं है। परिसर में खड़ी जब्त गाड़ियों पर दोहरी मार
पहचान का संकट : थानों में जब्त गाड़ियां आग के फैलाव का सबसे बड़ा जरिया बन सकती हैं। खुले आसमान के नीचे 10-15 साल पुराने मामले के वाहन खड़े हैं। भीषण आग में गाड़ियों के जलने पर चेसिस और इंजन नंबर तक मिट जाएंगे। ऐसे में यह साबित करना नामुमकिन हो जाएगा कि कौन-सा वाहन किसका था।
मुआवजा लटकेगा : पुलिस कस्टडी में वाहन नष्ट होने पर भरपाई या रिहाई केवल अदालती आदेश से तय होती है। कानूनी पचड़े के चलते मालिकों को वर्षों चक्कर काटने पड़ेंगे।
सुस्त स्क्रैप नीति : कागजी पेच और विभागों से एनओसी मिलने में देरी के कारण कानूनी प्रक्रिया पूरी कर चुके वाहनों की स्क्रैप नीलामी रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। मालखाने पर बड़ा खतरा : दस्तावेज और केस डायरी जलने की आशंका
लापरवाही की वायरिंग : थाने का मालखाना सबसे संवेदनशील हिस्सा होता है। यहां मुकदमों से जुड़े दस्तावेज, केस डायरी, डिजिटल साक्ष्य, नकदी और हथियार रखे जाते हैं। कई थानों में खुले लटकते तार, ओवरलोडेड बोर्ड और अस्थायी कनेक्शन शॉर्ट सर्किट के खतरे को सीधा न्योता दे रहे हैं।
अलग जोन की दरकार : जानकारों का मानना है कि जिन वाहनों का कानूनी निपटारा हो चुका है उन्हें तुरंत हटाया जाए और विचाराधीन मामलों के साक्ष्यों के लिए थाने से अलग सुरक्षित डंप यार्ड बनाया जाए। ये मानक भी अनिवार्य
1 आग लगने पर दमकल की बड़ी गाड़ियों के अंदर तक पहुंचने के लिए खुला और निर्बाध रास्ता।
2 यार्ड हाइड्रेंट, वेट राइजर-डाउनकमर और पर्याप्त क्षमता वाली भूमिगत पानी की टंकी।
3 ऑटोमैटिक फायर अलार्म, इमरजेंसी लाइट और स्पष्ट एग्जिट (निकासी) रूट।
4 सिर्फ उपकरण लगाना काफी नहीं। थाने के जवानों को आपात स्थिति में इनके संचालन का प्रशिक्षण मिलना जरूरी है। प्रस्ताव भेजा गया है
संबंधित 8 थानों में पुख्ता फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर प्रस्ताव भेजा गया है। मालखानों में कोई भी ज्वलनशील पदार्थ नहीं रखा जाना चाहिए। साथ ही आपात स्थिति के लिए भूमिगत जल पाइपलाइन, वेंटिलेशन और मानक ऊंचाई (कम से कम 14 फीट) जैसे तकनीकी प्रावधान जरूरी हैं। प्रस्ताव पर तेजी से काम कराने की दिशा में प्रक्रिया जारी है।-मनोज नट्ट, डीआईजी, फायर ब्रिगेड (बिहार)



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