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मधेपुरा नगर परिषद में वित्तीय अनियमितता का आरोप:पूर्व पार्षद ने डस्टबिन, प्याऊ और एलईडी खरीद की जांच की मांग; आंदोलन की चेतावनी




मधेपुरा नगर परिषद की पूर्व पार्षद विनीता भारती ने नगर परिषद में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। रविवार को अपने आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने डस्टबिन खरीद, प्याऊ निर्माण, लाइट और एलईडी खरीद समेत कई कार्यों में गड़बड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने जेम पोर्टल और उपलब्ध दस्तावेजों में दर्ज दरों की तुलना करते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। लाइट खरीद में 2.50 लाख रुपए का भुगतान विनीता भारती ने शहर में लगाई गई लाइटों की खरीद को लेकर सवाल उठाया। उनका दावा है कि कुछ लाइटों के लिए करीब 2.50 लाख रुपए प्रति यूनिट तक का भुगतान किया गया है। उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसे दस्तावेज हैं, जिनमें समान लंबाई, चौड़ाई और क्षमता वाली लाइटों की दूसरी नगर परिषदों में खरीद करीब 60 हजार से 80 हजार रुपए के बीच दर्ज है। तकनीकी जांच से लेकर भुगतान तक हो पड़ताल पूर्व पार्षद ने कहा कि लाइटों की तकनीकी क्षमता, टेंडर प्रक्रिया, सक्षम स्तर से मिली मंजूरी, दर निर्धारण और भुगतान की पूरी प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि दस्तावेजों में दर्ज अंतर की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है। एलईडी खरीद की दरों पर भी सवाल एलईडी खरीद को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। उनका दावा है कि दूसरी जगहों पर इसी तरह की सामग्री की तुलना में मधेपुरा नगर परिषद में लागत अधिक दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि यदि दस्तावेजों में दर्ज बातें जांच में सही पाई जाती हैं तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला हो सकता है। फाइल में 216 के बाद सीधे 231 नंबर विनीता भारती ने संचिका में क्रमांक को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि फाइल में एक जगह 216 तक एंट्री है, जबकि इसके बाद 217 से 230 तक के क्रमांक दिखाई नहीं देते और सीधे 231 नंबर की एंट्री दर्ज है। गायब क्रमांकों से जुड़े दस्तावेज कहां? पूर्व पार्षद ने सवाल किया कि 217 से 230 तक के क्रमांकों से संबंधित दस्तावेज या प्रविष्टियां कहां हैं और इनके बीच का अंतर क्यों है। उन्होंने कहा कि यदि संचिका में संबंधित दस्तावेज या प्रविष्टियां मौजूद नहीं हैं तो इसकी जांच जरूरी है। भुगतान प्रक्रिया की जांच की मांग उन्होंने नगर परिषद के कार्यों से संबंधित बोर्ड बैठक, कार्यवाही पुस्तिका, सक्षम स्वीकृति, निर्णय और भुगतान के अभिलेखों की जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि किसी भी खरीद या निर्माण कार्य में पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड स्पष्ट होना चाहिए। पुराने आरोपों पर भी उठाए सवाल विनीता भारती ने कहा कि करीब एक साल पहले नगर परिषद की मुख्य पार्षद ने खुद कार्यपालक पदाधिकारी और कुछ कर्मचारियों पर गंभीर गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। इन आरोपों की जांच और संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर कई पार्षदों के साथ मुख्यमंत्री को आवेदन भी दिया गया था। कर्मचारियों के साथ काम पर सवाल पूर्व पार्षद ने सवाल उठाया कि जिन अधिकारी-कर्मचारियों पर पहले आरोप लगाए गए थे, वे अब मुख्य पार्षद के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि पहले लगाए गए आरोपों पर क्या कार्रवाई हुई और किन परिस्थितियों में मामला समाप्त हुआ। एक साल से नियमित बोर्ड बैठक नहीं उन्होंने आरोप लगाया कि करीब एक वर्ष से नगर परिषद की बोर्ड बैठकें नियमित रूप से नहीं हो रही हैं। इससे नगर परिषद के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने पिछले एक वर्ष की बोर्ड बैठकों, कार्यवाही पुस्तिका, संचिकाओं, स्वीकृतियों और भुगतान से जुड़े अभिलेखों की जांच कराने की मांग की। जनता के पैसे के खर्च की हो निष्पक्ष जांच विनीता भारती ने कहा कि नगर परिषद की राशि जनता के विकास कार्यों पर खर्च होनी चाहिए। किसी भी स्तर पर अनियमितता मिलने पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने संबंधित दस्तावेज विभागीय स्तर पर भेजकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। 7 दिन में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन पूर्व पार्षद ने कहा कि यदि सात दिनों के भीतर मुख्य पार्षद की ओर से विभाग को दोबारा पत्र लिखकर इन मामलों की जांच और कार्रवाई की मांग नहीं की जाती है और ठोस पहल नहीं होती है, तो वह नगर की जनता के साथ व्यापक जनआंदोलन शुरू करेंगी।



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