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पूर्व मंत्री अब्दुल जलील का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा:नेता की झलक के लिए सड़क किनारे खड़े रहे लोग, बाजार-दुकानें बंद; कल सुपुर्द-ए-खाक




सीमांचल के बड़े नेता और पूर्व राज्य मंत्री अब्दुल जलील मस्तान का पार्थिव शरीर रविवार को उनके पैतृक गांव सिरसी पहुंचा। यह गांव अमौर विधानसभा क्षेत्र में आता है। अपने नेता के अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोग पहुंचे। अब्दुल जलील मस्तान को सोमवार को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। पूर्व मंत्री अब्दुल जलील मस्तान का पार्थिव शरीर रविवार सुबह दिल्ली से फ्लाइट से बागडोगरा एयरपोर्ट लाया गया। बागडोगरा एयरपोर्ट से उनके पार्थिव शरीर को एक एंबुलेंस के जरिए पूर्णिया के लिए रवाना किया गया। एंबुलेंस नेशनल हाईवे-3 के रास्ते किशनगंज होते हुए बायसी, अमौर और बैसा होते हुए उनके पैतृक गांव सिरसी पहुंची। बागडोगरा से सिरसी तक सड़क के दोनों ओर हजारों की संख्या में लोग घंटों खड़े रहे। जैसे ही एंबुलेंस सिरसी गांव पहुंची। हर कोई अपने नेता की एक झलक पाने को आतुर दिखा। स्थानीय बाजार-दुकानें बंद रहीं। दरअसल, अब्दुल जलील मस्तान पिछले कुछ दिनों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। दिल्ली के एम्स में उनका इलाज चल रहा था और वे आईसीयू में भर्ती थे।
कुछ तस्वीरें… राजकीय सम्मान के लिए आदेश का इंतजार क्षेत्र के कई दिग्गज राजनेता, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और प्रशासनिक अधिकारी श्रद्धांजलि देने सिरसी गांव पहुंचे हैं। पारिवारिक सूत्रों और स्थानीय प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, अब्दुल जलील मस्तान के पार्थिव शरीर को सोमवार सुबह 10:30 बजे सिरसी स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। राजकीय सम्मान पर बायसी अनुमंडल पदाधिकारी ने बताया कि आदेश का इंतजार किया जा रहा है। जैसे ही राजकीय सम्मान का आदेश आएगा प्रशासन तैयारी करेगा।
सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों को तैनात किया गया है, ताकि सोमवार को जुटने वाली भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।

6 बार विधायक, 11 बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा
अब्दुल जलील मस्तान सीमांचल में कांग्रेस के प्रमुख और जनाधार वाले नेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने पूर्णिया जिले की अमौर विधानसभा सीट का 6 बार प्रतिनिधित्व किया। 1985 से वे अमौर सीट पर कांग्रेस के टिकट से 11 बार चुनाव लड़ चुके थे। जनता के बीच उनकी मजबूत पकड़ के कारण चुनावी परिस्थितियां बदलने के बावजूद अमौर विधानसभा क्षेत्र में उनका प्रभाव बना रहा। महागठबंधन सरकार में मंत्री रहे 2015 में बिहार में महागठबंधन सरकार बनने के बाद अब्दुल जलील मस्तान बिहार सरकार में मंत्री बने। उन्होंने उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। वे करीब 40 वर्षों से कांग्रेस से जुड़े रहे और अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी के लिए सक्रिय रहे।

सीमांचल में गरीब की आवाज थे- अख्तरूल ईमान

अमौर के वर्तमान एआईएमआईएम विधायक अख्तरूल ईमान ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि अब्दुल जलील मस्तान सीमांचल में गरीबों की आवाज थे, उनके जाने से राजनीतिक मैदान में अपूरणीय क्षति हुई है ।
अमौर से जदयू के पूर्व विधायक रहे सबा जफर ने कहा कि अब्दुल जलील मस्तान सीमांचल के एक कद्दावर नेता थे। अल्लाह उनको जन्नत में जगह दे। इस दुख की घड़ी में हम उनके परिवार के साथ हैं ।



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