‘मेरी जमीन DGP विनय कुमार और मोतिहारी के SP, DSP के कब्जे में है। मुझे अपनी जमीन कब्जा मुक्त चाहिए। वे लोग काली कमाई करने के लिए माफियाओं को पालकर रखते हैं। आप कुछ भी कीजिए, वे लोग माफियाओं के खिलाफ कुछ नहीं करते। मेरे पास रिकॉर्ड है। ये सरकार ऐसी है
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सीएम सम्राट चौधरी के दरबार के बाहर जमीन पर ईंटों को एक के ऊपर एक रखकर बैठे मोतिहारी से आए हरेंद्र किशोर इतना कहते-कहते चंद पलों के लिए रुकते हैं। हरेंद्र पैर से दिव्यांग हैं। चलने के लिए वॉकर का सहारा लेते हैं।
यहां क्यों आए हैं? यह सवाल सुनते ही बोलते हैं, ‘गृह मंत्रालय सम्राट चौधरी के अंडर में है। उन्हें मालूम होने चाहिए न कि पुलिस क्या कर रही है।’
मुख्यमंत्री सचिवालय में मंगलवार को राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 181 आवेदकों की फरियाद सुनी। दर्जनों लोगों को सीएम के सामने अपनी परेशानी सुनाने का मौका नहीं मिला।
दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में पढ़िए, सीएम के पास फरियाद लेकर आए लोगों का दर्द।
रजिस्ट्रेशन करने के बाद भी मुख्यमंत्री से नहीं मिलने दिया
मुख्यमंत्री सचिवालय में आयोजित इस कार्यक्रम के बाहर और मौके पर पहुंचे फरियादियों से बातचीत में सरकारी दावे से अलग तस्वीर नजर आई।
लोगों ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और आवेदन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी उन्हें मुख्यमंत्री के सामने अपनी समस्या रखने का मौका नहीं मिला। कुछ फरियादियों ने पुलिस और प्रशासन पर धक्का देकर हटाने का आरोप लगाया।
वहीं, कई लोगों ने जमीन विवाद में अंचल और जिला स्तर के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महीनों से दफ्तरों के चक्कर लगाने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।

राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम में महिला की फरियाद सुनते सीएम सम्राट चौधरी।
मोतिहारी के हरेंद्र बोले- 2024 से अधिकारियों के चक्कर लगा रहा हूं
मोतिहारी से पहुंचे हरेंद्र किशोर ने जमीन विवाद को लेकर पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि वह वर्ष 2024 से अपनी जमीन के मामले को लेकर अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई।
हरेंद्र किशोर ने आरोप लगाया, “पहले गुप्तेश्वर पांडे डीजीपी थे, फिर सरदार जी भट्टी आए और अभी विनय कुमार हैं। डीजीपी और मोतिहारी के एसपी-डीएसपी के कब्जे में मेरी जमीन है।”
उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा, ‘खाकी वर्दी में पुलिस गुंडागर्दी जैसा व्यवहार कर रही है। मुख्यमंत्री से मिलने के लिए रजिस्ट्रेशन भी कराया था, लेकिन उन्हें अंदर तक नहीं जाने दिया गया।’

हरेंद्र द्वारा पुलिस अधिकारियों और अन्य लोगों पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
नालंदा के ऋतिक का आरोप- दस्तावेज लेकर आया था, धक्का देकर हटाया
नालंदा से पहुंचे ऋतिक रौशन सिंह ने बताया कि उन्होंने सहयोग पोर्टल पर आवेदन किया था और उसी के आधार पर उन्हें पटना बुलाया गया था। उनका मामला जमीन विवाद से जुड़ा है। उनका आरोप है कि पटना पहुंचने के बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें धक्का देकर वहां से हटा दिया।
ऋतिक ने कहा, ‘प्रशासन मेरी जमीन को खासमहल की जमीन बता रहा है, जबकि मेरे पास जमीन से संबंधित दस्तावेज और मेरे पूर्वजों के नाम से कटी जमीन की रसीद मौजूद है। उन्होंने कहा कि एडीएम और डीएम को भी पहले आवेदन दे चुके हैं, लेकिन मुख्यमंत्री तक अपनी बात नहीं पहुंचा सके।

गया के जयंत बोले- CO से DM तक आवेदन दिया, समाधान नहीं हुआ
गयाजी से पहुंचे जयंत कुमार ने कहा कि उन्होंने 26 जुलाई को सहयोग शिविर में आने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन कार्यक्रम की सूची में उनका नाम नहीं आया।
जयंत के मुताबिक, गांव के कुछ लोगों ने मेरी जमीन पर कब्जा कर लिया है। इस मामले को लेकर CO और SDM से लेकर ब्लॉक, अनुमंडल और जिला स्तर के अधिकारियों तक आवेदन दिया, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।’
जयंत का कहना था कि जब वे मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि डीएम ने उनका नाम चयनित नहीं किया है। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री से मिलाने के बजाय उन्हें धक्का देकर वहां से हटा दिया गया।
बक्सर के मंगल राय का आरोप- ‘काम के लिए 50 हजार रुपये मांगे गए’
बक्सर से पहुंचे मंगल राय ने जमीन विवाद को लेकर अंचल स्तर के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से मिलने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मिलने नहीं दिया गया।
मंगल राय का दावा है कि उनके पास वर्ष 2027 तक की जमीन की रसीद मौजूद है, फिर भी उनकी जमीन पर कब्जा हो गया।
उन्होंने आरोप लगाया, “कहा जाता है कि 50 हजार रुपये लाओ, तभी काम होगा। मेरे पास पैसे नहीं हैं। मेरे पास कागज हैं तो कोई कागज देखने वाला भी नहीं है।”

मंगल ने यह भी आरोप लगाया कि थाना स्तर पर भी बिना पैसे के काम नहीं होता। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
बेगूसराय के सुधीर बोले- घर पर कब्जा हुआ, जांच के बाद भी कार्रवाई नहीं
बेगूसराय से आए सुधीर मंडल ने बताया कि उनके नाना की करीब डेढ़ कट्ठा जमीन थी, जिस पर परिवार घर बनाकर रह रहा था। गरीबी के कारण परिवार करीब चार साल के लिए बाहर चला गया था। इसी दौरान गांव के कुछ लोगों ने उनके घर पर कब्जा कर लिया।
सुधीर के मुताबिक, बची हुई जमीन पर भी मवेशी बांध दिए गए। विरोध करने पर उनके और उनकी पत्नी के साथ मारपीट की गई।
उन्होंने बताया कि कई बार अंचल कार्यालय और थाने के जनता दरबार में शिकायत की। जांच के बाद विपक्षी पक्ष को नोटिस भी दिया गया, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
सुधीर का आरोप है कि DM के सामने CO ने जमीन खाली कराने की बात कही थी, लेकिन मौके पर जाने के बाद उनसे कथित तौर पर एक लाख रुपए की मांग की गई। इसी समस्या को लेकर वह मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में पहुंचे थे।
पालीगंज के CO की पोस्टिंग पर भी उठे सवाल
पालीगंज से पहुंचे अमरेंद्र कुमार और उप प्रमुख धर्मेंद्र कुमार ने अंचलाधिकारी महेश कुमार की पोस्टिंग और कामकाज को लेकर सवाल उठाए। अमरेंद्र ने दावा किया कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ पहले शिकायतें हुई थीं, इसके बावजूद उन्हें दोबारा पालीगंज में पदस्थापित किया गया।
अमरेंद्र ने आरोप लगाया कि सरकारी व्यवस्था में पोस्टिंग को लेकर पैसे के लेन-देन का खेल चल रहा है। उन्होंने मंत्री विजय कुमार सिन्हा सहित कुछ राजनीतिक नेताओं के नाम लेते हुए भी आरोप लगाए। हालांकि, इन आरोपी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
उप प्रमुख ने कहा- ‘एक महीने बाद ही दोबारा पालीगंज लाए गए सीओ’
पालीगंज के उप प्रमुख धर्मेंद्र कुमार भी अंचलाधिकारी महेश कुमार की पोस्टिंग का मुद्दा लेकर मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित सीओ का करीब एक महीने पहले तबादला हुआ था, लेकिन एक महीने बाद ही उन्हें दोबारा पालीगंज में पदस्थापित कर दिया गया।
धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि उन्होंने इस मामले में एक मंत्री का नाम लेते हुए भी गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
400 बीघा जमीन पर कब्जा, CO पर मिलीभगत का आरोप
मनु शर्मा ने भी जमीन विवाद का मामला उठाया। उनका आरोप है कि उनके क्षेत्र में जमींदार परिवारों की करीब 400 बीघा जमीन पर भू-माफिया और बालू माफिया की नजर है।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय अंचलाधिकारी की भी इन लोगों से मिलीभगत है और बिना पैसे के कोई काम नहीं होता। उन्होंने इस मामले में एक मंत्री का नाम लेते हुए भी कई गंभीर आरोप लगाए।

हालांकि, मनु शर्मा के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
सीएम सम्राट ने सुनी 181 लोगों की फरियाद
मुख्यमंत्री सचिवालय में मंगलवार को आयोजित राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को अंतिम व्यक्ति तक न्याय और सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाने का निर्देश दिया। सरकार की ओर से दावा किया गया कि कार्यक्रम में पहुंचे 181 आवेदकों की समस्याओं का निष्पादन किया गया।
14 जुलाई 2026 को CM सम्राट चौधरी ने राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम की शुरुआत की थी। पहले दिन उन्होंने 129 चुनिंदा मामलों में से 100 को निपटाया था।
मुख्यमंत्री ने शिकायतों का समयबद्ध और निष्पक्ष समाधान, आम लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार और पात्र लोगों को तकनीकी कारणों से योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रखने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सहयोग शिविर के माध्यम से लोगों की समस्याओं का समाधान 30 दिनों के अंदर किया जाना सरकार का उद्देश्य है।
उन्होंने सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त रखने, वृद्धा पेंशन और राशन कार्ड के योग्य आवेदकों को शीघ्र लाभ दिलाने तथा शिकायतों के निष्पादन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों-कर्मियों पर कार्रवाई का भी निर्देश दिया।
सरकार बोली- 30 दिन में समाधान, फरियादियों ने कहा- सुनवाई तक नहीं
मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक सरकार की प्राथमिकता पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से लोगों की समस्याओं का समाधान करना है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ आम लोगों की शिकायतें सुनने और उनका समय पर निष्पादन करने का निर्देश दिया।
वहीं, कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे कई फरियादियों ने आरोप लगाया कि आवेदन और रजिस्ट्रेशन कराने के बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने का अवसर नहीं मिला। कुछ ने पुलिस पर धक्का देने का आरोप लगाया, जबकि कुछ का कहना था कि सूची में नाम नहीं होने के कारण उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया।
जमीन विवाद से जुड़े अधिकांश फरियादियों का कहना था कि वे पहले ही अंचल, थाना, अनुमंडल और जिला स्तर पर शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं होने के कारण मुख्यमंत्री के सहयोग कार्यक्रम में पहुंचे थे।
